कर्पूर चंद्र कुलिश की जन शताब्दी पर झालावाड़ में आयोजित स्वास्थ्य जागरूकता शिविर में उमड़ा शहरवासियों का उत्साह
राजस्थान पत्रिका के संस्थापक श्रद्धेय कर्पूर चंद्र कुलिश की जयंती और जन शताब्दी पर्व के अवसर पर रविवार को झालावाड़ के खेल संकुल परिसर में एक विशाल स्वास्थ्य जागरूकता शिविर आयोजित किया गया। इस शिविर में शहरवासियों ने बड़ी संख्या में भाग लिया और स्वास्थ्य संबंधी जानकारी प्राप्त करने में गहरी रुचि दिखाई।
स्वास्थ्य शिविर में विशेषज्ञ चिकित्सकों ने उपस्थित लोगों को अंगदान, देहदान, नेत्रदान और रक्तदान के महत्व के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जीवन और मृत्यु के बाद भी अंगदान के माध्यम से कई लोगों की जान बचाई जा सकती है। रक्तदान के महत्त्व पर भी जोर देते हुए लोगों को नियमित रूप से रक्तदान करने और अपने स्वास्थ्य की जांच करवाने के लिए प्रेरित किया गया।
विशेषज्ञ चिकित्सकों ने शिविर में उपस्थित नागरिकों को विभिन्न बीमारियों से बचाव के तरीके भी बताए। उन्होंने बताया कि सही खान-पान, नियमित व्यायाम, मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान और समय-समय पर मेडिकल जांच करवाना स्वस्थ जीवन के लिए जरूरी है। शिविर में बीपी, शुगर और अन्य सामान्य स्वास्थ्य जांच की भी व्यवस्था की गई थी, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने अपना स्वास्थ्य परीक्षण कराया।
शिविर में शामिल लोगों ने आयोजकों की इस पहल की सराहना की और कहा कि ऐसे कार्यक्रम लोगों को अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक बनाने के साथ-साथ समाज में अंगदान और रक्तदान जैसी मानवता की सेवाओं के प्रति सजग करते हैं। शिविर में बच्चों और युवाओं को भी स्वास्थ्य और स्वच्छता के महत्व के बारे में जानकारी दी गई, ताकि वे जीवन भर स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें।
आयोजकों का कहना है कि यह स्वास्थ्य जागरूकता शिविर कर्पूर चंद्र कुलिश के सामाजिक और मानवतावादी दृष्टिकोण को समर्पित था। उन्होंने बताया कि संस्थापक ने जीवनभर समाज और नागरिकों के हित के लिए काम किया और उनके आदर्शों को याद करते हुए इस तरह के सामाजिक स्वास्थ्य कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किए जाएंगे।
इस अवसर पर शहरवासियों ने न केवल अपने स्वास्थ्य की जांच करवाई बल्कि रक्तदान और अंगदान के लिए भी उत्साहपूर्वक पंजीकरण करवाया। शिविर में उपस्थित अधिकारी और चिकित्सक सभी ने लोगों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने और समाज के लिए सेवा करने की प्रेरणा दी।
झालावाड़ में आयोजित यह स्वास्थ्य जागरूकता शिविर न केवल कर्पूर चंद्र कुलिश के योगदान को याद करने का अवसर था, बल्कि नागरिकों के स्वास्थ्य और मानवता की दिशा में एक सकारात्मक कदम भी साबित हुआ।

