रीम नौसैनिक अड्डे पहुंचा आईएनएस कुलिश, कंबोडिया के साथ बढ़ेगा समुद्री सहयोग
नई दिल्ली, 13 सितंबर (आईएएनएस)। भारतीय नौसेना का युद्धपोत आईएनएस कुलिश कंबोडिया के रीम नौसैनिक अड्डे पर पहुंचा है। यहां दोनों देशों के जवान कई समुद्री पेशेवर व नौसैनिक गतिविधियों में हिस्सा लेंगे। इससे दोनों नौसेनाओं के बीच आपसी समझ, संपर्क और ऑपरेशनल तालमेल को मजबूत करने में मदद मिलेगी। दोनों देशों के नौसैनिक एक-दूसरे के साथ अनुभव भी साझा करेंगे।
दरअसल भारत और कंबोडिया के बीच समुद्री सहयोग बढ़ाने के लिए भारतीय नौसेना का यह युद्धपोत कंबोडियाई तट पर है। यह दौरा भारतीय नौसेना के पूर्वी बेड़े की ऑपरेशनल तैनाती का हिस्सा है।नौसेना के मुताबिक रीम पहुंचने पर आईएनएस कुलिश का कंबोडियाई नौसेना के प्रतिनिधियों और कंबोडिया में भारतीय दूतावास के अधिकारियों ने स्वागत किया। इस दौरान दोनों देशों के नौसैनिकों के बीच बातचीत और पेशेवर संपर्क को बढ़ावा दिया जाएगा।
आईएनएस कुलिश के ठहराव के दौरान कई कार्यक्रम आयोजित होंगे। इनमें नौसैनिक अधिकारियों के बीच पेशेवर बातचीत के साथ साथ नौसैनिक सुविधाओं का परिचय, खेल प्रतियोगिताएं और अन्य नौसैनिक गतिविधियां शामिल हैं। इन कार्यक्रमों से दोनों देशों के नौसैनिकों को एक-दूसरे के अनुभव और समुद्री क्षेत्र से जुड़ी जानकारी साझा करने का अवसर मिलेगा। इस यात्रा से दोनों नौसेनाओं के बीच आपसी समझ और काम करने का तालमेल भी बेहतर होगा।
साथ ही, यह भारत की हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री पहुंच बढ़ाने की कोशिशों को मजबूती देती है। आईएनएस कुलिश का कंबोडिया दौरा भारत की एक्ट ईस्ट नीति और महासागर की सोच के अनुरूप है। भारत का प्रयास है कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्र सुरक्षित, खुला और सभी के लिए समावेशी बना रहे। भारत व कंबोडिया के बीच सैन्य संबंध लगातार मजबूत होते रहे हैं।
बीते दिनों कंबोडिया में आतंकवादियों के खिलाफ काउंटर टेररिज्म ऑपरेशन जैसे घातक व खतरनाक मिशन का अभ्यास पूरा किया गया था। कंबोडिया में हुए इस अभ्यास में भारतीय सैन्य दल भी शामिल था। यहां भारत व कंबोडिया के संयुक्त सैन्य युद्धाभ्यास ‘सिनबैक्स–टू 2026’ में दोनों देशों के जवानों ने ड्रोन, मोर्टार तथा स्नाइपर अभ्यास किया था। यहां विशेष रणनीतियों सहित जवानों का विशेष कौशल प्रशिक्षण भी आयोजित किया गया।
इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के सैन्य दलों के बीच अंतर-संचालन क्षमता, समन्वय तथा परिचालन तालमेल को सुदृढ़ करना था।
--आईएएनएस
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