रिकॉर्ड तोड़ने के लिए ही होते हैं, मैं चाहती हूं कि अधिक लड़कियां वर्ल्ड चैंपियन बनकर सामने आएं: मनीषा
नई दिल्ली, 31 अक्टूबर (आईएएनएस)। सीनियर वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतने वाली पहली भारतीय महिला मनीषा भनवाला चाहती हैं कि उनकी इस ऐतिहासिक उपलब्धि से अन्य भारतीय महिला पहलवानों के लिए शीर्ष तक पहुंचने का रास्ता खुले। महिला रेसलिंग वर्ल्ड चैंपियनशिप 2026 में भारत ने अब तक का अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए कुल चार मेडल जीते हैं।
शुक्रवार को 59 किलोग्राम वर्ग में ऐतिहासिक गोल्ड मेडल जीतने वाली मनीषा का मानना है कि उनकी इस बड़ी कामयाबी का असली महत्व तब दिखेगा, जब और भी भारतीय महिलाएं वर्ल्ड चैंपियन बनेंगी और ऐसी उपलब्धियां देश की कुश्ती में एक आम बात बन जाएगी। शनिवार को एक संयुक्त मीडिया बातचीत के दौरान 'आईएएनएस' के एक सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा, "रिकॉर्ड तोड़ने के लिए ही होते हैं और मैं चाहती हूं कि यह रिकॉर्ड और उपलब्धि भी आगे चलकर टूटे। मैं चाहती हूं कि ज्यादा से ज्यादा लड़कियां वर्ल्ड चैंपियन बनकर सामने आएं, ताकि भारतीय महिला पहलवानों का वर्ल्ड टाइटल जीतना कोई अपवाद न रहकर एक सामान्य बात बन जाए। हमारा लक्ष्य 2028 के लॉस एंजिल्स ओलंपिक में भी रिकॉर्ड तोड़ना है।"
भारत ने एक गोल्ड, दो सिल्वर और एक ब्रॉन्ज मेडल के साथ मेडल टैली में चौथा स्थान हासिल किया। मनीषा की ऐतिहासिक जीत के अलावा, नीलम सिरोही ने 50 किलोग्राम वर्ग में सिल्वर मेडल जीता, जबकि काजल ढोचक ने 76 किलोग्राम वर्ग में सिल्वर मेडल हासिल किया। तनु शर्मा ने 72 किलोग्राम वर्ग में ब्रॉन् मेडल जीतकर भारत के मेडल टैली को पूरा किया।
टीम रैंकिंग में भी भारत 94 अंकों के साथ पांचवें स्थान पर रहा। भारत से आगे अमेरिका, जापान, चीन और यूक्रेन रहे। चार मेडल जीतने का यह प्रदर्शन महिला रेसलिंग वर्ल्ड चैंपियनशिप में भारत के पिछले सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन से बेहतर है। इससे पहले भारत ने 2012 और 2021 के संस्करणों में दो-दो मेडल जीते थे। हालांकि, वे दोनों चैंपियनशिप ओलंपिक वर्षों में आयोजित हुई थीं, जब प्रतियोगिताओं में भागीदारी और प्रतिस्पर्धा का स्तर अपेक्षाकृत कम था। अपनी व्यक्तिगत उपलब्धि के अलावा, मनीषा ने अपनी साथी भारतीय पहलवानों - खासकर सिरोही और ढोचक - के लिए एक संदेश भी दिया। उन्होंने उनसे धैर्य रखने को कहा और सलाह दी कि किसी बड़ी प्रतियोगिता में मिली हार को अपने करियर का पैमाना न बनने दें।
उन्होंने कहा, "मैं बस उन लड़कियों से इतना कहना चाहती हूं कि कभी-कभी दिन आपका नहीं होता। उदाहरण के लिए, 76 किलोग्राम वर्ग में हिस्सा लेने वाली काजल (ढोचक) के साथ ऐसा ही हुआ। इसी तरह, नीलम (सिरोही) के लिए इतने बड़े और कड़े मुकाबले में हिस्सा लेना एक नया अनुभव था। हो सकता है कि भविष्य में भगवान ने उनके लिए कुछ और भी बेहतर सोच रखा हो, इसलिए उन्हें धैर्य रखना चाहिए और अपने मौकों का इंतजार करना चाहिए। मैंने खुद भी ऐसा ही अनुभव किया है। मैंने धैर्य के साथ इंतजार किया और आखिरकार मुझे अच्छे परिणाम मिले। मेरी उन्हें यही सलाह है कि वे धैर्य बनाए रखें, क्योंकि आगे उनके लिए बहुत कुछ बेहतर होने वाला है।"
खेल के शिखर तक पहुंचने से पहले खुद भी कई निराशाओं का सामना कर चुकीं मनीषा का मानना है कि भारतीय महिला पहलवानों की अगली पीढ़ी के लिए धैर्य रखना बहुत आवश्यक होगा, खासकर तब जब वे देश के शानदार प्रदर्शन को और आगे ले जाने की कोशिश कर रही हैं।
--आईएएनएस
एसएम/पीएम

