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आरडी. बर्मन से लेकर जतिन-ललित तक, दिग्गज संगीतकारों के साथ काम कर चमके मोंटी शर्मा

मुंबई, 16 अप्रैल (आईएएनएस)। हिंदी सिनेमा में कई ऐसे संगीतकार रहे हैं, जिन्होंने अपने काम से अलग पहचान बनाई। उन्हीं में से एक हैं मोंटी शर्मा, जिन्होंने अपने संगीत से फिल्मों को नई जान दी। उन्होंने अपने करियर में कई बड़े और मशहूर संगीतकारों के साथ काम किया, जिससे उनकी कला में और भी निखार आया। इसी अनुभव के साथ वह आगे बढ़ते चले गए।
आरडी. बर्मन से लेकर जतिन-ललित तक, दिग्गज संगीतकारों के साथ काम कर चमके मोंटी शर्मा

मुंबई, 16 अप्रैल (आईएएनएस)। हिंदी सिनेमा में कई ऐसे संगीतकार रहे हैं, जिन्होंने अपने काम से अलग पहचान बनाई। उन्हीं में से एक हैं मोंटी शर्मा, जिन्होंने अपने संगीत से फिल्मों को नई जान दी। उन्होंने अपने करियर में कई बड़े और मशहूर संगीतकारों के साथ काम किया, जिससे उनकी कला में और भी निखार आया। इसी अनुभव के साथ वह आगे बढ़ते चले गए।

मोंटी शर्मा का जन्म 17 अप्रैल 1970 को मुंबई में हुआ था। वह एक ऐसे परिवार से आते हैं, जहां संगीत का माहौल हमेशा से रहा है। उनके दादा पंडित राम प्रसाद शर्मा जाने-माने संगीत गुरु थे, जिनसे उन्होंने बचपन में ही संगीत सीखना शुरू कर दिया था। इसके अलावा, वह मशहूर संगीतकार प्यारेलाल शर्मा के भतीजे हैं, जो लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल जोड़ी का हिस्सा रहे हैं। ऐसे में मोंटी को शुरू से ही सही मार्गदर्शन और माहौल मिला।

उन्होंने बहुत छोटी उम्र में ही संगीत की दुनिया में कदम रख दिया था। उन्होंने सिर्फ 16 साल की उम्र में एक कीबोर्ड प्लेयर के रूप में काम करना शुरू कर दिया था। उस समय वह लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल के साथ जुड़े और फिल्मी संगीत की बारीकियां सीखीं। इसके बाद उन्होंने कई बड़े संगीतकारों के साथ काम किया, जिससे उनका अनुभव और भी बढ़ता गया।

मोंटी शर्मा ने अपने करियर में आर.डी. बर्मन, जतिन-ललित, राजेश रोशन और नदीम-श्रवण जैसे दिग्गज संगीतकारों के साथ काम किया। इन सभी के साथ काम करते हुए उन्होंने अलग-अलग तरह के संगीत को समझा। उदाहरण के तौर पर, आर.डी. बर्मन के साथ काम करते समय उन्होंने म्यूजिक में नए प्रयोगों को करीब से देखा। वहीं जतिन-ललित के साथ काम करते हुए उन्होंने रोमांटिक गानों की बारीकियां सीखी। राजेश रोशन के साथ काम ने उन्हें सॉफ्ट और मेलोडी म्यूजिक की समझ दी, जबकि नदीम-श्रवण के साथ उन्होंने भावनात्मक गानों की गहराई को महसूस किया।

धीरे-धीरे उन्होंने खुद भी म्यूजिक कंपोज करना शुरू किया और अपनी अलग पहचान बनाई। फिल्म 'ब्लैक' में दिया गया उनका बैकग्राउंड म्यूजिक काफी सराहा गया। इसके बाद फिल्म 'सावंरिया' में उनके गाने 'जब से तेरे नैना' और 'छबीला' काफी लोकप्रिय हुए। इसके अलावा, उन्होंने फिल्म 'रामलीला' में भी बेहतरीन बैकग्राउंड स्कोर दिया। वहीं, उन्होंने 'गदर 2' जैसी फिल्मों में भी काम किया।

उनकी मेहनत और प्रतिभा के लिए उन्हें कई बड़े पुरस्कार भी मिले। फिल्म 'ब्लैक' के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ बैकग्राउंड म्यूजिक का फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला। इसके अलावा, उन्हें आईफा और जी सिने अवॉर्ड भी मिले। फिल्म 'सांवरिया' के लिए उन्हें नए संगीत प्रतिभा का सम्मान भी दिया गया।

वह आज भी संगीत की दुनिया में सक्रिय हैं और नए प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहे हैं।

--आईएएनएस

पीके/एबीएम

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