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आरबीआई ने वित्त वर्ष 2027 के लिए जारी की अपर लेयर एनबीएफसी की सूची, इस बार 17 कंपनियां शामिल, टाटा संस पर यथास्थिति बरकरार

आरबीआई ने वित्त वर्ष 2027 के लिए जारी की अपर लेयर एनबीएफसी की सूची, इस बार 17 कंपनियां शामिल, टाटा संस पर यथास्थिति बरकरार
आरबीआई ने वित्त वर्ष 2027 के लिए जारी की अपर लेयर एनबीएफसी की सूची, इस बार 17 कंपनियां शामिल, टाटा संस पर यथास्थिति बरकरार

नई दिल्ली, 6 अगस्त (आईएएनएस)। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए अपर लेयर गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) की नई सूची जारी कर दी है। इस बार सूची में कुल 17 एनबीएफसी को शामिल किया गया है, जबकि वित्त वर्ष 2024-25 और 2023-24 में यह संख्या 15 थी। अपर लेयर में शामिल कंपनियों पर आरबीआई की ओर से अधिक कड़े नियामकीय प्रावधान लागू होते हैं।

आरबीआई ने एक बयान में स्पष्ट किया कि टाटा संस को एक बार फिर अपर लेयर सूची में शामिल किया गया है। हालांकि, केंद्रीय बैंक ने कहा कि यह शामिल किया जाना कंपनी द्वारा दायर पंजीकरण निरस्तीकरण (डी-रजिस्ट्रेशन) आवेदन के अंतिम निर्णय से अलग है। यह आवेदन अभी आरबीआई के विचाराधीन है। इससे पहले जनवरी 2025 में जारी सूची में भी आरबीआई ने यही स्थिति स्पष्ट की थी।

आरबीआई ने बताया कि वर्ष 2025-26 के दौरान अपर लेयर एनबीएफसी की पहचान के मानकों की व्यापक समीक्षा की गई थी। इसी कारण उस वर्ष के लिए अलग से सूची जारी नहीं की गई। संशोधित मानदंड लागू होने के बाद अब वित्त वर्ष 2026-27 की सूची नए नियमों के आधार पर तैयार की गई है।

नए मानकों के अनुसार, जिन एनबीएफसी के पास कम से कम एक लाख करोड़ रुपए (एक ट्रिलियन रुपए) की प्रबंधनाधीन परिसंपत्तियां हैं, उन्हें अपर लेयर में शामिल किया जाता है। इस श्रेणी की कंपनियों को अधिक सख्त नियामकीय निगरानी, जोखिम प्रबंधन और अनुपालन संबंधी मानकों का पालन करना होता है।

इस बार आरबीआई ने आरईसी लिमिटेड, पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन (पीएफसी) और इंडियन रेलवे फाइनेंस कॉरपोरेशन (आईआरएफसी) को पहली बार अपर लेयर सूची में शामिल किया है। इन कंपनियों के शामिल होने से सूची में कंपनियों की संख्या बढ़कर 17 हो गई है।

पीएनबी हाउसिंग फाइनेंस और सम्मान कैपिटल इस बार निर्धारित मानदंडों को पूरा नहीं कर सकीं, इसलिए इन्हें नई सूची में शामिल नहीं किया गया है। हालांकि, आरबीआई के नियमों के अनुसार यदि किसी एनबीएफसी को एक बार अपर लेयर में वर्गीकृत किया जाता है, तो वह कम से कम 5 वर्षों तक इस श्रेणी के लिए निर्धारित कड़े नियामकीय प्रावधानों के दायरे में बनी रहती है, भले ही बाद के वर्षों में वह निर्धारित मानदंडों को पूरा न करे। इसी कारण ये दोनों कंपनियां सूची में नाम नहीं होने के बावजूद अपर लेयर से जुड़े नियामकीय प्रावधानों के अधीन रहेंगी।

आरबीआई द्वारा जारी सूची में बजाज फाइनेंस, श्रीराम फाइनेंस, एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस, टाटा कैपिटल सहित कई प्रमुख गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां भी शामिल हैं। केंद्रीय बैंक का मानना है कि इन बड़ी वित्तीय संस्थाओं पर मजबूत नियामकीय निगरानी बनाए रखना देश की वित्तीय प्रणाली की स्थिरता और पारदर्शिता के लिए आवश्यक है।

--आईएएनएस

डीबीपी

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