Samachar Nama
×

राष्ट्रीय बालिका दिवस: जब पीएम मोदी से मुलाकात ने ताइक्वांडो खिलाड़ी तारुषी को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया

नई दिल्ली, 24 जनवरी (आईएएनएस)। राष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर भारत यह संदेश दोहराता है कि बेटियों का सशक्तीकरण ही देश की मजबूती की नींव है। यही विश्वास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन और शासन की सोच का आधार रहा है। उनकी यह सोच राष्ट्रीय प्राथमिकताओं और सामाजिक दृष्टिकोण को नई दिशा देती रही है।
राष्ट्रीय बालिका दिवस: जब पीएम मोदी से मुलाकात ने ताइक्वांडो खिलाड़ी तारुषी को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया

नई दिल्ली, 24 जनवरी (आईएएनएस)। राष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर भारत यह संदेश दोहराता है कि बेटियों का सशक्तीकरण ही देश की मजबूती की नींव है। यही विश्वास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन और शासन की सोच का आधार रहा है। उनकी यह सोच राष्ट्रीय प्राथमिकताओं और सामाजिक दृष्टिकोण को नई दिशा देती रही है।

इस सोच का प्रभाव चंडीगढ़ की युवा तारुषी गौड़ जैसी बेटियों के जीवन में भी साफ दिखाई देता है। मात्र चार वर्ष की उम्र में ताइक्वांडो की शुरुआत करने वाली तारुषी की यात्रा अनुशासन, दृढ़ संकल्प और समर्पण की मिसाल है।

'मोदी आर्काइव' की तरफ से 'एक्स' प्लेटफॉर्म पर जारी वीडियो में तारुषी गौड़ बताती हैं कि बीते वर्षों में उन्होंने नेशनल स्कूल गेम्स, फेडरेशन प्रतियोगिताओं और सीबीएसई नेशनल स्तर पर कई पदक अपने नाम किए। इसके साथ ही वे गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड की धारक भी बनीं। वर्ष 2022 में राष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर ही उन्हें प्रधानमंत्री से राष्ट्रीय बाल शक्ति पुरस्कार प्राप्त हुआ।

अपने अनुभव साझा करते हुए तारुषी कहती हैं कि प्रधानमंत्री होने के बावजूद उनका स्वभाव बेहद सरल है। वे बच्चों से आत्मीयता से बात करते हैं और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं। तारुषी ने कहा, "वे प्रधानमंत्री हैं, फिर भी वो कितने डाउन टू अर्थ हैं। वे बच्चों के साथ खुश होकर बात करते हैं। उन्होंने मुझे प्रेरित किया कि कैसे मैं और परिश्रम कर सकती हूं। उन्होंने कहा कि अभी रुकना नहीं है। हमें और आगे मेहनत करते जाना है।"

अवॉर्ड से बढ़कर, वह बातचीत थी जिसने एक गहरा असर छोड़ा। प्रधानमंत्री की गर्मजोशी और सादगी ने युवा पुरस्कार विजेताओं को सहज महसूस कराया और उनमें आत्मविश्वास जगाया। कई लड़कियां जो शुरू में घबराई हुई थीं, उन्हें उनके शब्दों से हिम्मत मिली।

तारुषी ने बताया कि मेरे साथ कार्यक्रम में और भी गर्ल अवॉर्डी थीं। कुछ बच्चियां डर रही थीं कि प्रधानमंत्री से कैसे बात करनी है, लेकिन पीएम मोदी की आभा ने हम सभी को सहज कर दिया। फिर सभी ने उनके साथ खुलकर अच्छे से बातें कीं।"

'बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ' और 'कन्या केलवणी' जैसी पहलों व शिक्षा, खेल, विज्ञान और इनोवेशन में लड़कियों को लगातार समर्थन देने से यह संदेश साफ है कि राष्ट्र निर्माण के लिए लड़कियों को सशक्त बनाना जरूरी है। लाइव टेलीकास्ट और स्कूलों में दिखाए गए इस समारोह ने अनगिनत युवा लड़कियों को प्रेरित किया, जिनमें से कई ने देखा कि वे भी क्या हासिल कर सकती हैं।

तारुषी गौड़ बताती हैं, "जब हमें अवॉर्ड मिला था, तब उसका लाइव टेलीकास्ट दूरदर्शन और अन्य चैनलों पर हुआ था। इसकी वजह से बाकी स्कूलों की लड़कियों ने वह वीडियो देखा और प्रेरित हुईं कि कैसे वे भी कुछ कर सकती हैं और प्रधानमंत्री मोदी से मिलने का मौका मिल सकता है।

'मोदी आर्काइव' ने 'एक्स' पर लिखा कि राष्ट्रीय बालिका दिवस सिर्फ एक उत्सव से कहीं ज्यादा है। यह बेटियों पर विश्वास करने, उनकी महत्वाकांक्षाओं का समर्थन करने और उन्हें आगे बढ़ने के लिए समान अवसर देने की याद दिलाता है, क्योंकि जब लड़कियां आगे बढ़ती हैं, तो देश आगे बढ़ता है।

--आईएएनएस

डीसीएच/एएस

Share this story

Tags