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रणथंभौर टाइगर रिजर्व में दुर्लभ नजारा: एक ही जोन में दिखे चीता, तेंदुआ और बाघ

रणथंभौर टाइगर रिजर्व में दुर्लभ नजारा: एक ही जोन में दिखे चीता, तेंदुआ और बाघ

राजस्थान का प्रसिद्ध वन्यजीव स्थल रणथंभौर टाइगर रिजर्व इन दिनों वन्यजीव प्रेमियों के लिए रोमांच और चर्चा का केंद्र बना हुआ है। यहां एक बेहद दुर्लभ और चौंकाने वाला नजारा सामने आया है, जहां एक ही क्षेत्र में चीता, तेंदुआ और बाघ की मौजूदगी देखी गई है।

वन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, मध्यप्रदेश के कूनो नेशनल पार्क से आया चीता KP-2 हाल ही में रणथंभौर टाइगर रिजर्व के जोन नंबर-9 में देखा गया है। यह वही क्षेत्र है जहां बाघिन T-127 का नियमित मूवमेंट बताया जाता है।

वन अधिकारियों के मुताबिक, इस क्षेत्र में पहले से ही तेंदुए की मौजूदगी दर्ज की जाती रही है, लेकिन अब एक ही जोन में चीता, तेंदुआ और बाघ की गतिविधियां सामने आने से यह इलाका बेहद संवेदनशील और आकर्षक बन गया है।

वन विभाग की टीम ने गश्त के दौरान KP-2 चीते को जोन-9 में ट्रैक किया। इसी दौरान बाघिन T-127 के भी मूवमेंट के संकेत मिले, जबकि तेंदुआ भी उसी क्षेत्र में सक्रिय पाया गया। हालांकि अभी तक इन तीनों बड़े शिकारी जानवरों के बीच किसी प्रत्यक्ष संघर्ष की कोई पुष्टि नहीं हुई है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थिति वन्यजीव व्यवहार के अध्ययन के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो सकती है। एक ही प्राकृतिक आवास में तीन अलग-अलग शिकारी प्रजातियों की मौजूदगी दुर्लभ मानी जाती है। ऐसे में इनके मूवमेंट और आपसी व्यवहार पर लगातार नजर रखी जा रही है।

वन विभाग ने इलाके में निगरानी और कड़ी कर दी है। कैमरा ट्रैप और पेट्रोलिंग टीमों को सक्रिय कर दिया गया है ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति को रोका जा सके। अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है और जानवर अपने-अपने क्षेत्र में सामान्य रूप से विचरण कर रहे हैं।

वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, रणथंभौर जैसे घने और समृद्ध जंगलों में इस तरह की घटनाएं जैव विविधता को दर्शाती हैं, लेकिन साथ ही यह भी जरूरी है कि प्राकृतिक संतुलन बना रहे। बाघ, तेंदुआ और चीता जैसे शिकारी जानवर आमतौर पर अपने-अपने टेरिटरी में रहना पसंद करते हैं, लेकिन कभी-कभी ओवरलैपिंग क्षेत्रों में उनकी मौजूदगी देखी जा सकती है।

फिलहाल इस अनोखे दृश्य ने वन्यजीव प्रेमियों और पर्यटकों में उत्सुकता बढ़ा दी है। हर कोई इस बात पर नजर बनाए हुए है कि आने वाले दिनों में इस क्षेत्र में इन बड़े शिकारियों का व्यवहार कैसा रहता है।

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