रंकिणी देवी मंदिर : झारखंड का प्रसिद्ध सिद्धपीठ, नवरात्रि में उमड़ता है श्रद्धालुओं का सैलाब
जमशेदपुर, 16 मार्च (आईएएनएस)। हिंदू धर्म में चैत्र नवरात्रि का विशेष महत्व है। इस दौरान देश के सभी देवी मंदिरों में अलग धूम रहती है। हर साल इस त्योहार की शुरुआत चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से होती है, जो इस साल गुरुवार, 19 मार्च से शुरू हो रही है और 27 मार्च तक चलेगी।
चैत्र नवरात्रि देश के सबसे बड़े पर्वों में से एक है, जिसे 9 दिनों तक मनाया जाता है। इस दौरान देवी दुर्गा के नौ अलग-अलग रूपों की विधि अनुसार पूजा-पाठ की जाती है और माता के मंदिरों में अलग ही रौनक और धूम रहती है। हर ओर भक्ति भाव का वातावरण रहता है।
देश में देवी के हजारों मंदिर हैं। माता के उन्हीं मंदिरों में से एक झारखंड राज्य के जमशेदपुर जिले के जादूगोड़ा के पास बंसिला ग्राम पंचायत के रोहिणीबेरा गांव में स्थित 'रंकिणी देवी मंदिर' है, जो कि एक प्राचीन और जागृत सिद्धपीठ है। यह मंदिर मुख्य रूप से देवी काली को समर्पित है। इसे कपड़गड़ी घाट रंकिणी देवी मंदिर के नाम से भी जाना जाता है।
रंकिणी देवी मंदिर में रखी पत्थर की मूर्ति को देवी काली का अवतार माना जाता है। माना जाता है कि देवी रंकिणी एक पत्थर में विराजमान हैं और आज भी जागृत हैं, जिसका आकार और चमक समय के साथ बढ़ता जा रहा है।
रंकिणी देवी मंदिर को लेकर मान्यता है कि यहां स्थापित पत्थर की मूर्ति देवी रंकिणी का साक्षात अवतार है। माना जाता है कि पहले घने जंगलों से गुजरने वाले लोग अपनी सुरक्षा और कल्याण के लिए माता रंकिणी देवी की पूजा करते थे। उनसे अपने मंगल के लिए आदर्शवाद लेते थे। आज भी इस ओर से गुजरने वाले यात्री, ड्राइवर और छात्र माता के दर्शन और आशीर्वाद लेकर ही अपनी आगे की यात्रा करते हैं।
कपड़गड़ी घाट के पास स्थित रंकिणी देवी मंदिर की खासियत है कि यह सड़क के ठीक किनारे पर स्थित है, ऐसे में यहां बुजुर्गों को आने में सहूलियत रहती है। वहीं, दिन भर, खासकर नवरात्रि के दौरान, मंदिर के परिसर में श्रद्धालुओं की भीड़ जुटी रहती है।
मंदिर में प्रतिदिन होने वाली सुबह-शाम की आरती काफी आकर्षक होती है, जिसमें भारी संख्या में भक्त शामिल होते हैं। नवरात्रि के समय, रंकिणी देवी मंदिर में नौ दिनों तक देवी दुर्गा के विभिन्न रूपों की पूजा-पाठ, श्रृंगार और आरती की जाती है। इस दौरान, दूर-दूर से आने वाले श्रद्धालु देवी मां के दर्शन और आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए मंदिर परिसर में उमड़ते रहते हैं।
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