राम पर विवादित बयान से कुछ हासिल नहीं होगा, स्वामी प्रसाद मौर्य कुंठा और बौखलाहट में दे रहे बयान: जगदंबिका पाल
बस्ती, 25 जून (आईएएनएस)। भाजपा सांसद जगदंबिका पाल ने स्वामी प्रसाद मौर्य की ओर से भगवान राम पर की गई अशोभनीय टिप्पणी की निंदा की। उन्होंने गुरुवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा कि भगवान राम और सनातन धर्म पर अशोभनीय टिप्पणी करना स्वामी प्रसाद मौर्य की आदत हो चुकी है, जो कि सरासर गलत है।
जगदंबिका पाल ने यह दुर्भाग्य की बात है कि स्वामी प्रसाद मौर्य ने तुष्टिकरण की राजनीति की। इसके बावजूद भी लोगों ने उन्हें सिरे से खारिज कर दिया। इसी को लेकर उनके मन में बौखलाहट है। उनके अंदर एक कुंठा है। इसी वजह से वो इस तरह की अशोभनीय टिप्पणी कर रहे हैं।
भाजपा सांसद ने कहा कि मेरा स्वामी प्रसाद मौर्य से सवाल है कि आखिर वो किस कुल में पैदा हुए हैं। अगर उनके मन में किसी को लेकर गुस्सा या कुंठा है, तो वो किसी नेता की आलोचना कर सकते हैं, किसी की कार्यशैली की भर्त्सना कर सकते हैं, प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री की आलोचना कर सकते हैं, लेकिन जिस तरह से वो भगवान राम को लेकर विवादित टिप्पणी कर रहे हैं, वो गलत है।
उन्होंने कहा कि आज की तारीख में स्वामी प्रसाद मौर्य राजनीतिक जीवन में गुमनाम हैं, उसे देखते हुए उन्हें यह समझ लेना चाहिए कि भगवान राम पर किसी भी प्रकार की विवादित टिप्पणी करने से उन्हें कुछ भी प्राप्त नहीं हो सकता है।
भाजपा सांसद के मुताबिक, वो कभी भगवान राम पर अशोभनीय टिप्पणी करते हैं, तो कभी रामचरितमानस पर टिप्पणी करते हैं। आखिर वो ऐसा क्यों करते हैं। इसके पीछे की वजह समझने के लिए हमें उनकी पूरी यात्रा को समझना होगा कि आखिर उनकी यात्रा कैसे शुरू हुई। उनकी राजनीतिक यात्रा को बहुजन समाज पार्टी से शुरू हुई थी। स्वामी प्रसाद मौर्य जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल करते हैं, इसके पीछे सबसे गहरा असर अगर किसी का पड़ा है, तो वो बहुजन समाज पार्टी ही है। आज की तारीख में आप बहुजन समाज पार्टी की स्थिति के बारे में भी सहज ही अंदाजा लगा सकते हैं कि इस पार्टी की स्थिति कैसी बनी हुई है।
इसके अलावा, उन्होंने समाजवादी पार्टी की दुर्गति को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि आज की तारीख में सपा की दुर्गति कैसी है, यह बात किसी से छुपी नहीं है। अखिलेश यादव लगातार बयान दे रहे है, ट्वीट कर रहे हैं, आखिर वो कहां हैं? इन लोगों ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम का विरोध किया। इसके बाद पश्चिम बंगाल में हुए विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी को हार का मुंह देखना पड़ा। तमिलनाडु में स्टालिन को भी हार का मुंह देखना पड़ा। अब आप लोग देखिएगा कि 2027 में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी की भी स्थिति ठीक नहीं रहेगी।
--आईएएनएस
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