'राम मंदिर मामले में सपा नेताओं के बयान गैर-जिम्मेदाराना', विवाद पर अनिल राजभर और दिनेश शर्मा की प्रतिक्रिया
लखनऊ, 26 जून (आईएएनएस)। अयोध्या राम मंदिर दान प्रकरण पर उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री अनिल राजभर और भाजपा सांसद दिनेश शर्मा ने प्रतिक्रिया दी है। राजभर ने कहा कि समाजवादी पार्टी, खासकर उसके राष्ट्रीय अध्यक्ष गैर-जिम्मेदाराना बयान दे रहे हैं। विपक्ष को बयानबाजी बंद करनी चाहिए। वहीं, दिनेश शर्मा ने कहा कि जांच अभी भी जारी है। इसलिए सभी को इंतजार करना चाहिए।
मंत्री अनिल राजभर ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए कहा, "विपक्ष को बयानबाजी बंद करनी चाहिए। एसआईटी रिपोर्ट आने के बाद अगर किसी को उसमें कोई कमी नजर आती है, तो वे सवाल उठाने के लिए स्वतंत्र हैं। हालांकि, अभी तक रिपोर्ट सौंपी नहीं गई है और समाजवादी पार्टी, खासकर उसके राष्ट्रीय अध्यक्ष गैर-जिम्मेदाराना बयान दे रहे हैं।"
राजभर ने कहा, "किसी भी प्रकरण में जांच शुरू होती है, वैसे ही सपा नेताओं की ओर से बयानबाजी शुरू होती है। अखिलेश यादव पूर्व मुख्यमंत्री हैं और वे जानते हैं कि बयानों से जांच प्रभावित होती है। मुख्यमंत्री ने पहले ही दिन कहा था कि रिपोर्ट आने के बाद जिसको जो कहना है, वह कह सकता है। मैं प्रदेश की जनता को आश्वस्त करना चाहता हूं कि कोई कितना भी बड़ा पदाधिकारी हो, वह इस प्रकरण में बच नहीं सकता है। वह इसलिए कि इससे गंभीर विषय कुछ नहीं हो सकता है। यह लोगों की आस्था और उनके विश्वास से जुड़ा विषय है। इसलिए सरकार कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करेगी।"
राज्यसभा सांसद दिनेश शर्मा ने इस विवाद पर कहा, "विपक्ष का एकमात्र एजेंडा सरकार को बदनाम करना है। 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले विपक्ष मुद्दाविहीन हो चुका है। विकास की गति तेज हुई है, इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार हुआ है और शिक्षा व स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार हुआ है। ऐसे में विपक्ष के पास कोई मुद्दा नहीं बचा है। इसलिए भाजपा का विरोध करते-करते ये लोग भगवान राम के ही आलोचक बन जाते हैं।"
उन्होंने कहा, "राम मंदिर आंदोलन की शुरुआत से ही उन्होंने कार सेवकों का विरोध किया। उन्होंने उन पर गोलियां चलवाईं। उन्होंने ऐसे बयान दिए कि 'एक परिंदा भी पर नहीं मार पाएगा'। सुप्रीम कोर्ट के फैसले और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राम मंदिर के निर्माण के बाद भी उन्होंने 'चंदा चोरी' को लेकर एक झूठा अभियान शुरू किया था। कांग्रेस के कुछ नेता अदालत तक चले गए थे। कांग्रेस ने यह भी दावा किया कि भगवान राम का कोई अस्तित्व ही नहीं था, राम सेतु का कोई अस्तित्व नहीं था।"
दिनेश शर्मा ने आगे कहा, "अब वे एक और प्रकरण लेकर आए हैं। हालांकि, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने खुद एफआईआर कराई है। मुख्यमंत्री ने भी कठोरतम शब्दों में कहा कि कोई भी दोषी को बक्शा नहीं जाएगा, चाहे वह छोटा हो या बड़ा हो।"
भाजपा सांसद ने यह भी कहा कि एसआईटी ने तय समय के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंप दी। रिपोर्ट सौंपे जाने के पांच मिनट के भीतर ही एफआईआर दर्ज कर ली गई और आठ लोगों को जेल भेज दिया गया। जांच अभी भी जारी है। इसलिए सभी को इंतजार करना चाहिए।
--आईएएनएस
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