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मैंने कभी नहीं सोचा था कि राम मंदिर के दानपात्र को लेकर इस तरह के आरोप लगेंगे: अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन

मैंने कभी नहीं सोचा था कि राम मंदिर के दानपात्र को लेकर इस तरह के आरोप लगेंगे: अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन
मैंने कभी नहीं सोचा था कि राम मंदिर के दानपात्र को लेकर इस तरह के आरोप लगेंगे: अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन

नई दिल्ली, 26 जून (आईएएनएस)। अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने राम मंदिर के दानपात्र में हुए घपले के आरोपों को लेकर दुख जाहिर किया और कहा कि हमें एक ऐसी व्यवस्था को जन्म देना होगा, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं नहीं हो।

उन्होंने शुक्रवार को समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में कहा कि मैंने कभी जीवन में नहीं सोचा था कि इस तरह के आरोप राम मंदिर ट्रस्ट पर लगेंगे, क्योंकि इस ट्रस्ट का गठन सुप्रीम कोर्ट की ओर से किया गया था, जिसमें तमाम कुशल और प्रशिक्षित लोगों को शामिल किया गया था। सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देश पर ही इस ट्रस्ट का गठन किया गया था, लेकिन इसमें जिस तरह से अब घपलेबाजी का मामला प्रकाश में आया है, उसे लेकर हम बहुत दुखी हैं। मैं और मेरे पिताजी भी इस आंदोलन का हिस्सा थे। एक बहुत ही मजबूत व्यवस्था का जन्म किया गया था, ताकि राम मंदिर की व्यवस्था में कोई आंच न आए।

इसके अलावा, उन्होंने राम मंदिर दानपात्र में घपलेबाजी के बाद हुए इस्तीफों को लेकर भी विष्णु शंकर जैन ने प्रतिक्रिया दी। उनके मुताबिक, यह इस्तीफा नैतिक मूल्यों के आधार पर हुआ है, लेकिन मैं एक बात साफ कर देना चाहता हूं कि इस मामले में इस्तीफे से किसी भी प्रकार का असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि एसआईटी पूरे मामले की जांच कर रही है। हर पहलू की जांच की जा रही है। जांच संपन्न होने के बाद आरोपपत्र अदालत में पेश किया जाएगा। हम चाहते हैं कि पूरे मामले की गंभीरता से जांच हो और यह सुनिश्चित किया जाए कि निकट भविष्य में इस तरह का मामला प्रकाश में नहीं आया है।

अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन के मुताबिक, हम यह मांग कर रहे हैं कि मंदिर का नियंत्रण सरकार के दायरे के बाहर जाए। अगर एक व्यवस्था में इतने सारे बुद्धिजीवी लोगों को एक व्यवस्था में शामिल करने के बाद इस तरह के मामले में सामने आ रहे हैं, तो हमें चिंता करने की जरूरत है। हम एक बार फिर से एक ऐसी व्यवस्था को जन्म देना होगा, ताकि फिर से इस तरह की घटनाएं न हो सकें।

उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने राम मंदिर के अस्तित्व पर सवाल उठाया था। जिन राम भक्तों पर गोली चलवाई थी, जिन लोगों ने रामायण की चौपाइयों की व्यख्या गलत तरीके से करके लोगों को गुमराह करने की कोशिश की थी, ऐसे लोग कभी नहीं चाहते हैं कि स्थिति पूरी तरह से सामान्य हो। ऐसे लोगों को एक मुद्दा मिल गया है, जिससे वो राजनीति कर सके।

उन्होंने कहा कि जो लोग राम मंदिर के दानपात्र घोटाले का मुद्दा उठा रहे हैं। ऐसे लोगों से मैं पूछना चाहता हूं कि ये लोग कर्नाटक के मंदिरों में हो रहे कुप्रबंधन को लेकर चुप क्यों हैं? ऐसे लोगों को इन मुद्दों पर भी खुलकर बोलना चाहिए। ये लोग बार-बार कह रहे हैं कि अयोध्या के राम मंदिर का जिक्र करके इन्हें राजनीतिक फायदा मिलेगा। इसी वजह से ये लोग बार-बार इसका जिक्र कर रहे हैं।

--आईएएनएस

एसएचके/वीसी

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