आरएसएस की कार्रवाई की मांग के बाद गरमाया राम मंदिर चढ़ावा विवाद, विपक्ष ने उठाए सवाल
नई दिल्ली, 3 जुलाई (आईएएनएस)। राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरकार्यवाहक दत्तात्रेय होसबोले की कार्रवाई की मांग के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक दलों और विभिन्न संगठनों की प्रतिक्रियाएं सामने आई। सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेताओं ने मामले की जांच, दोषियों के खिलाफ कार्रवाई और इस मुद्दे पर राजनीति को लेकर अपने-अपने विचार रखे।
राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के उपाध्यक्ष तनवीर हसन ने कहा कि सबसे पहले यह स्पष्ट होना चाहिए कि क्या राम मंदिर में चोरी हुई है या नहीं। यह सवाल कोई मुस्लिम नहीं उठा रहा, बल्कि हिंदुत्व का समर्थन करने वाले लोग ही इस विषय को उठा रहे हैं। मंदिर के प्रबंधन में कोई मुस्लिम शामिल नहीं है और न ही किसी मुस्लिम ने इस मुद्दे पर कोई बयान दिया है। तनवीर हसन ने आरोप लगाया कि यह पूरा मामला केवल दिखावा है।
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता गुरु प्रकाश ने कहा कि यह अत्यंत गंभीर और संवेदनशील मामला है। जैसे ही मामला सामने आया, सरकार ने तत्काल एसआईटी का गठन किया, एफआईआर दर्ज कराई और गिरफ्तारी भी की गई। सरकार पूरे मामले को लेकर पूरी तरह सक्रिय है और लोगों को निश्चिंत रहने की जरूरत है। साथ ही उन्होंने कहा कि उन लोगों से भी सावधान रहने की आवश्यकता है जो भगवान राम को नहीं मानते थे। उन्होंने भरोसा जताया कि सरकार जल्द से जल्द इस मामले में सख्त कार्रवाई करेगी।
आरएसएस नेता इंद्रेश कुमार ने कहा कि हिंदू समाज दत्तात्रेय होसबोले के साथ खड़ा है और करोड़ों लोग इस मामले में जल्द न्याय मिलने का इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने राजनीतिक दलों से अपील की कि इस विषय पर राजनीति न करें और एसआईटी को अपना काम निष्पक्ष तरीके से करने दें। उन्होंने विश्वास जताया कि देश की जनता को जल्द न्याय मिलेगा।
सीपीआई (एम) के पूर्व सांसद हन्नान मोल्लाह ने आरोप लगाया कि एक सप्ताह तक किसी बड़े नेता ने इस मामले पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी और न ही किसी ने इसकी निंदा की। भगवान राम के नाम पर इतनी बड़ी लूट हुई और भगवान के नाम पर चोरी हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि छोटे लोगों को गिरफ्तार किया जाएगा, जबकि बड़े लोगों को बचाने की कोशिश की जाएगी। उनके अनुसार, इस मामले में बड़े लोगों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए।
जनता दल (यूनाइटेड) के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ स्वयं को एक सांस्कृतिक संगठन बताता है। भगवान श्रीराम के चरणों में नमन करते हुए यह स्वीकार करना चाहिए कि लंबी कानूनी लड़ाई के बाद न्यायपालिका के फैसले से राम मंदिर का मार्ग प्रशस्त हुआ और सभी पक्षों ने उस निर्णय को स्वीकार किया। भगवान श्रीराम को चढ़ाए गए चढ़ावे में कथित वित्तीय अनियमितताओं की खबर अत्यंत दुखद है। धैर्य और संयम भारत की परंपरा है। उन्होंने महात्मा बुद्ध और राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का उल्लेख करते हुए कहा कि भगवान राम के प्रति देशवासियों की गहरी श्रद्धा है और इसी कारण इस घटना को लेकर लोगों में नाराजगी है।
विश्व हिंदू परिषद के अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा कि उनका संगठन भी यही कह रहा है कि इस प्रकार की घटना का कोई बचाव नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि राम मंदिर के लिए साढ़े बारह करोड़ से अधिक लोगों द्वारा दिए गए दान का प्रसाद चोरी हुआ, जिससे सभी को दुख पहुंचा है। उन्होंने कहा कि यह गलत हुआ है और विश्व हिंदू परिषद भी इसे स्वीकार करती है।
वहीं, शिवसेना (यूबीटी) की नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि सबसे पहले यह स्वीकार करना होगा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को आखिरकार यह एहसास हुआ है कि इस मामले में गंभीर गड़बड़ी हुई है। जिन लोगों ने अपनी पूरी राजनीति श्रीराम मंदिर के इर्द-गिर्द खड़ी की, उन्हीं के कार्यकाल में यह स्थिति बनी। अब आरएसएस इस मामले पर बयान दे रहा है। प्रियंका चतुर्वेदी ने यह भी आरोप लगाया कि फिलहाल केवल छोटे आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि मुख्य आरोपी को अभी भी बचाया जा रहा है।
--आईएएनएस
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