राम मंदिर चंदा चोरी मामले में ट्रस्ट की जांच से संतुष्ट : आलोक कुमार
नई दिल्ली, 6 जुलाई (आईएएनएस)। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की हालिया बैठक और राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी कथित अनियमितताओं के मुद्दे पर विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट ने पूरे मामले की समीक्षा की है और जांच प्रक्रिया को लेकर सभी ट्रस्टी संतुष्ट हैं। जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ बिना किसी पक्षपात के कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही, उन्होंने विपक्ष पर इस मामले का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया।
आईएएनएस से खास बातचीत में आलोक कुमार ने बताया कि ट्रस्ट की बैठक में चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा को छोड़कर लगभग सभी ट्रस्टी मौजूद थे। बैठक के दौरान पिछले छह वर्षों में ट्रस्ट द्वारा किए गए कार्यों की समीक्षा की गई। भव्य राम मंदिर का निर्माण, उससे जुड़ी सुविधाओं का विकास और अब तक हुए कार्यों पर ट्रस्ट ने संतोष व्यक्त किया। हालांकि, चढ़ावे से जुड़े कथित चोरी के मामले पर सभी ट्रस्टियों ने दुख भी जताया। जैसे ही कथित अनियमितताओं की जानकारी सामने आई, ट्रस्ट ने स्वयं सरकार से एसआईटी गठित करने का अनुरोध किया। एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट आने के बाद एफआईआर दर्ज की गई और अब जांच जारी है। ट्रस्ट की स्पष्ट इच्छा है कि यदि जांच में कोई भी व्यक्ति दोषी पाया जाता है तो उसे कड़ी से कड़ी सजा मिले और किसी भी स्तर पर कोई रियायत न दी जाए।
चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार किए जाने पर आलोक कुमार ने कहा कि दोनों को उनके पदों से हटाया नहीं गया, बल्कि उन्होंने स्वयं नैतिक आधार पर इस्तीफा दिया था। कुछ लोगों द्वारा यह आशंका जताई जा रही थी कि यदि दोनों अपने पद पर बने रहते तो जांच को प्रभावित कर सकते हैं या गवाहों और सबूतों पर असर डाल सकते हैं। ऐसी किसी भी आशंका को समाप्त करने के लिए दोनों ने स्वयं इस्तीफा दिया और ट्रस्ट ने उनकी भावना का सम्मान करते हुए उसे स्वीकार कर लिया। नियमित नियुक्ति तक कृष्ण मोहन को अंतरिम व्यवस्था के तहत कार्यवाहक महासचिव बनाया गया है। इसके अलावा, मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) की नियुक्ति के लिए एक सर्च कमेटी का गठन भी किया गया है।
राम मंदिर में दान के रूप में मिले सोने-चांदी के रिकॉर्ड को लेकर पूछे गए सवाल पर आलोक कुमार ने कहा कि सामान्य नकद चढ़ावे की व्यक्तिगत जांच संभव नहीं है, क्योंकि यह पता नहीं लगाया जा सकता कि किस श्रद्धालु ने कितनी राशि दान की। जिन श्रद्धालुओं ने सोना, चांदी या अन्य कीमती वस्तुएं दान की हैं, उन्हें ट्रस्ट ने आमंत्रित किया है कि वे समय लेकर अयोध्या आएं और अपनी दान की गई वस्तुओं का सत्यापन कर सकते हैं। चांदी की वस्तुओं को सरकारी कंपनी के माध्यम से नियमानुसार गलाया गया है और उसका पूरा रिकॉर्ड उपलब्ध है। इसलिए उसका भी सत्यापन कराया जा सकता है।
चंपत राय के विश्व हिंदू परिषद में भविष्य को लेकर पूछे गए सवाल पर आलोक कुमार ने स्पष्ट कहा कि वे वीएचपी में अपनी भूमिका निभाते रहेंगे। उन्होंने कहा कि केवल आरोप लग जाने भर से किसी व्यक्ति को दोषी मान लेना उचित नहीं है। उनका पक्ष भी जांच समिति के समक्ष रखा गया है और जांच पूरी होने तक किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।
उन्होंने आरोप लगाया कि जो राजनीतिक दल आज राम मंदिर के नाम पर सवाल उठा रहे हैं, वही अतीत में राम जन्मभूमि आंदोलन का विरोध करते रहे हैं। 1990 के राम जन्मभूमि आंदोलन का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि उस समय कारसेवकों पर गोलियां चलाई गई थी और कई लोगों की जान गई थी। जनता इतिहास को भूली नहीं है और वह राजनीतिक स्वार्थ तथा वास्तविक मुद्दों के बीच अंतर समझती है।
--आईएएनएस
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