'राम मंदिर चंदा चोरी मामले में दोषियों पर हो कार्रवाई', दत्तात्रेय होसबोले के बयान का संतों ने किया समर्थन
अयोध्या, 3 जुलाई (आईएएनएस)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले द्वारा राम मंदिर चंदे से जुड़े कथित अनियमितता के मामले में दिए गए बयान का अयोध्या के कई संतों और धार्मिक नेताओं ने समर्थन किया। संतों ने एक कहा कि यदि किसी तरह की गड़बड़ी हुई है तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि राम जन्मभूमि आंदोलन और मंदिर की गरिमा पर कोई आंच न आए।
राम जन्मभूमि ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष सत्येंद्र दास वेदांती ने कहा कि दत्तात्रेय होसबोले के बयान से यह स्पष्ट होता है कि उन्होंने एक जायज मांग उठाई है। श्रीराम जन्मभूमि ट्रस्ट से जुड़ी कथित चोरी के मामले में कार्रवाई की मांग उचित है। इस घटना को पूरे देश और दुनिया ने देखा है और राम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़ी गतिविधियों पर सभी की नजर रहती है। जो लोग आज इस विषय पर चर्चा कर रहे हैं, उन्हें यह समझना चाहिए कि इस प्रकार की घटनाओं से राम जन्मभूमि आंदोलन और मंदिर की छवि प्रभावित होती है। इसलिए यदि जांच में कोई भी व्यक्ति दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि वह दत्तात्रेय होसबोले के बयान का पूरा समर्थन करते हैं।
पंडित कल्कि राम ने कहा कि यह पूरी तरह सत्य है और उन्होंने स्वयं भी काफी पहले इस विषय पर अपील की थी। जिन लोगों ने शुरू से ही राम मंदिर निर्माण का विरोध किया, वे लगातार विरोध करते रहे, लेकिन हर प्रयास के बावजूद सफल नहीं हो सके। प्राण-प्रतिष्ठा समारोह के दौरान पूरी दुनिया ने सनातन धर्म को मानने वालों की एकजुटता देखी थी और उसी एकता को बनाए रखना आवश्यक है। उन्होंने लोगों से किसी भी प्रकार के भ्रम में न पड़ने की अपील करते हुए कहा कि कुछ लोग आज भी राम मंदिर का विरोध कर रहे हैं और मंदिर को बदनाम करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों से सतर्क रहने की आवश्यकता है। कुछ लोग इस्लामिक एजेंडे के तहत काम करते हुए सनातन समाज को आपस में बांटने की कोशिश कर रहे हैं।
वहीं, अयोध्याधाम स्थित साकेत भवन मंदिर के महंत सीताराम दास महाराज ने भी दत्तात्रेय होसबोले के बयान को सही बताया। उन्होंने कहा कि हिंदू समाज सहनशील, सरल और उदार होता है। हिंदू स्वभाव से दयालु होते हैं और न तो किसी पर हमला करते हैं और न ही किसी पर अत्याचार करते हैं। हिंदू संस्कृति "वसुधैव कुटुम्बकम" की भावना में विश्वास करती है और सभी को साथ लेकर चलने तथा सबके कल्याण की बात करती है। उन्होंने कहा कि हिंदू समाज का मूल स्वभाव सभी के हित और समरसता की भावना को आगे बढ़ाना है।
--आईएएनएस
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