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इमरान मसूद ने राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण की एसआईटी जांच में पारदर्शिता की मांग की

इमरान मसूद ने राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण की एसआईटी जांच में पारदर्शिता की मांग की
इमरान मसूद ने राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण की एसआईटी जांच में पारदर्शिता की मांग की

नई दिल्ली, 15 जुलाई (आईएएनएस)। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने उत्तर प्रदेश की राजनीति से जुड़े कई अहम मुद्दों पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने समाजवादी पार्टी (सपा)-कांग्रेस गठबंधन, भोजशाला मामले और राम मंदिर चंदा चढ़ावा प्रकरण में चल रही जांच को लेकर अपनी बात रखी। इसके अलावा उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के रामलीला और कांवड़ यात्रा से जुड़े बयान पर भी प्रतिक्रिया दी।

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा, "इस मामले में एफआईआर ट्रस्ट की ओर से दर्ज कराई गई थी, जबकि चोरी का आरोप भी ट्रस्ट से जुड़े लोगों पर ही लगाया जा रहा है। अगर आरोप गंभीर हैं तो एसआईटी ने अब तक एफआईआर क्यों दर्ज नहीं की।"

उन्होंने कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है ताकि सच्चाई सामने आ सके। इमरान मसूद ने आरोप लगाया कि जांच प्रक्रिया में पारदर्शिता होनी चाहिए और किसी भी संस्था से जुड़े मामले में कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के उस बयान पर जिसमें उन्होंने कहा था कि जिन लोगों ने कभी रामलीला और कांवड़ यात्रा पर रोक लगाई, वही अब आस्था की बात कर रहे हैं, इमरान मसूद ने कहा, "उन्हें ऐसी किसी रोक की जानकारी नहीं है। रामलीला हमेशा समाज के सभी वर्गों के लिए रही है और इसके मंचन में कभी कलाकारों या दर्शकों को धर्म के आधार पर नहीं देखा गया।"

उन्होंने कहा कि रामलीला भारतीय संस्कृति का हिस्सा रही है और इसमें सभी समुदायों के लोग भाग लेते रहे हैं। उनके अनुसार, धार्मिक आयोजनों को राजनीतिक विवाद का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए।

धार भोजशाला मामले में सुप्रीम कोर्ट की ओर से नोटिस जारी किए जाने और हाई कोर्ट के आदेश को बरकरार रखने पर इमरान मसूद ने कहा कि वह सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिप्पणी नहीं करना चाहते। हालांकि, उन्होंने कहा कि 800 साल से चली आ रही एक परंपरा समाप्त कर दी गई है। उन्होंने कहा कि भारत में सभी नागरिकों को समान अधिकार प्राप्त है और हर समुदाय की भावनाओं का सम्मान होना चाहिए।

समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच गठबंधन को लेकर चल रही बयानबाजी पर इमरान मसूद ने कहा कि उन्होंने कभी यह दावा नहीं किया कि वह गठबंधन का फैसला करेंगे। उन्होंने कहा कि गठबंधन को लेकर अंतिम निर्णय कांग्रेस नेतृत्व और समाजवादी पार्टी के नेतृत्व को लेना है।

उन्होंने कहा, "अगर गठबंधन की बात हो रही है तो उसे जमीन पर भी दिखाई देना चाहिए। केवल टीवी बहस और बयानों तक सीमित रहने वाले गठबंधन का कोई मतलब नहीं है। उन्होंने कहा कि वह गठबंधन के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि कांग्रेस को मजबूत करने की बात करते हैं।

समाजवादी पार्टी के प्रदर्शन का आंकड़ा बताते हुए इमरान मसूद ने कहा कि 2014 में सपा ने अकेले चुनाव लड़कर पांच सीटें जीती थीं। 2019 में सपा और बसपा गठबंधन के बावजूद सीटों की संख्या पांच ही रही, जबकि 2024 में कांग्रेस और सपा ने मिलकर बेहतर प्रदर्शन किया और 37 सीटें हासिल कीं।

उन्होंने कहा कि सीट बंटवारे और गठबंधन को लेकर सभी दलों को उदारता दिखानी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि कांग्रेस को केवल 17 सीटें दी गई थीं तो अब मुख्यमंत्री पद की आकांक्षा रखने वालों को भी उसी तरह सहयोग और समझदारी दिखानी चाहिए।

--आईएएनएस

एससीएच/डीकेपी

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