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राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले पर सपा का संसद परिसर में प्रदर्शन, निष्पक्ष जांच की मांग

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले पर सपा का संसद परिसर में प्रदर्शन, निष्पक्ष जांच की मांग
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले पर सपा का संसद परिसर में प्रदर्शन, निष्पक्ष जांच की मांग

नई दिल्ली, 7 अगस्त (आईएएनएस)। संसद के मानसून सत्र के दौरान शुक्रवार को समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसदों ने संसद परिसर के बाहर प्रदर्शन कर अयोध्या स्थित राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। बारिश के बावजूद सपा सांसदों ने विरोध प्रदर्शन जारी रखा और आरोप लगाया कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा यह मामला अत्यंत गंभीर है, लेकिन सरकार इस पर चर्चा से बच रही है।

वहीं आरक्षण, छात्रों के आंदोलनों और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत के हालिया बयानों को लेकर भी विभिन्न विपक्षी सांसदों ने प्रतिक्रिया दी। सपा सांसद राम गोपाल यादव ने राम मंदिर चढ़ावा चोरी पर कहा कि यह केवल वित्तीय अनियमितता का मामला नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की धार्मिक आस्था से जुड़ा विषय है। उन्होंने कहा कि बारिश उनके विरोध को नहीं रोक सकती और जब तक सरकार निष्पक्ष जांच कर यह स्पष्ट नहीं करती कि इस मामले में कौन-कौन जिम्मेदार हैं, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा।

सपा सांसद प्रिया सरोज ने भी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि जो लोग भगवान राम के नाम पर राजनीति कर सत्ता में आए, वही अब इस मुद्दे पर चर्चा से बच रहे हैं।

उन्होंने कहा कि यदि चढ़ावे की चोरी या हेराफेरी हुई है तो जनता को यह जानने का अधिकार है कि इसके लिए कौन जिम्मेदार है और उनके खिलाफ क्या कार्रवाई की जा रही है। सरकार जवाबदेही से बचने का प्रयास कर रही है।

इसी मुद्दे पर सपा सांसद धर्मेंद्र यादव ने कहा कि जब तक आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि भगवान राम के नाम पर जुटाए गए धन का एक-एक पैसा मंदिर तक पहुंचना चाहिए और इसके लिए जिम्मेदार लोगों को कानून के दायरे में लाया जाना चाहिए।

सपा सांसद आनंद भदौरिया ने आरोप लगाया कि राम मंदिर के दानपात्र और बैंक खातों में जमा धन दोनों में कथित हेराफेरी हुई है। उन्होंने कहा कि जांच करने वाली एसआईटी की निष्पक्षता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। उनके अनुसार यदि जांच एजेंसियों की भूमिका ही संदेह के घेरे में होगी तो उनकी रिपोर्ट पर भरोसा करना मुश्किल होगा। उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष लगातार संसद में इस मुद्दे पर चर्चा की मांग कर रहा है, लेकिन यदि विपक्ष को अपनी बात रखने का अवसर नहीं दिया जाएगा तो सच्चाई सामने कैसे आएगी।

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए धर्मेंद्र यादव ने कहा कि यदि आरक्षण और सामाजिक न्याय की बात हो रही है तो सरकार और व्यवस्था में पिछड़े, अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति वर्गों की वास्तविक भागीदारी भी सामने आनी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि देश के विश्वविद्यालयों में कितने कुलपति, प्रधानमंत्री कार्यालय में कितने अधिकारी और भारत सरकार में कितने सचिव इन वर्गों से आते हैं।

आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के अध्यक्ष और सांसद चंद्रशेखर आजाद ने भी जेन जी आंदोलन को लेकर टिप्पणी करते हुए कहा कि इस मुद्दे पर अलग-अलग स्तरों पर विरोधाभासी बयान सामने आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि आरएसएस छात्रों की बात सुनने की बात कर रही है, जबकि भाजपा के कुछ नेता उसी आंदोलन को देश-विरोधी बता रहे हैं तो दोनों में से कोई एक पक्ष गलत है। उन्होंने दावा किया कि संसद के भीतर भी भाजपा नेताओं द्वारा आंदोलनकारियों के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां की गई थीं।

वहीं झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) की सांसद महुआ मांझी ने कहा कि झारखंड सरकार ने छात्रों की शिकायतों को गंभीरता से लिया और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पहले ही दिन संबंधित चेयरमैन का इस्तीफा लिया, सीआईडी जांच शुरू कराई और कई गिरफ्तारियां भी हुईं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार छात्रों के साथ न्याय करने के लिए प्रतिबद्ध है।

--आईएएनएस

एसएके/वीसी

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