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राम मंदिर आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले कारसेवकों को श्रद्धांजलि, दिगंबर अखाड़े में शोक सभा का आयोजन

राम मंदिर आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले कारसेवकों को श्रद्धांजलि, दिगंबर अखाड़े में शोक सभा का आयोजन
राम मंदिर आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले कारसेवकों को श्रद्धांजलि, दिगंबर अखाड़े में शोक सभा का आयोजन

लखनऊ, 2 नवंबर (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश के अयोध्या में राम मंदिर आंदोलन के दौरान 2 नवंबर 1990 को हुई पुलिस गोलीबारी में कई कारसेवकों की जान चली गई थी। सोमवार को राम मंदिर आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले कारसेवकों को श्रद्धांजलि देने के लिए दिगंबर अखाड़े में एक शोक सभा आयोजित की गई। इसमें राम मंदिर धार्मिक समिति के सदस्य राजकुमार दास, मेयर गिरीश पति त्रिपाठी और मंत्री सूर्य प्रताप शाही शामिल हुए।

शोक सभा को लेकर राम मंदिर धार्मिक समिति के सदस्य राजकुमार दास ने कहा कि शहीदों की मजारों पर लगेंगे हर बरस मेले... वतन पर मरने वालों का यही बाकी निशां होगा। श्री राम जन्मभूमि को मुक्ति कराने के क्रम में जो आंदोलन चले, उसमें जिन लोगों ने अपने प्राणों की आहुति दी थी, उन्हें आज नमन वंदन करने का कार्यक्रम था।

उन्होंने कहा कि यहां रामजी का भव्य मंदिर बनकर तैयार हुआ है। यह विरोधियों के मुंह पर एक तमाचा है कि 500 वर्षों का जो मामला चल रहा था, सर्वोच्च न्यायालय ने आदेश देकर सनातन धर्मियों और भारत की अस्मिता की पहचान को बरकरार रखा है।

अयोध्या राम मंदिर के मेयर गिरीश पति त्रिपाठी ने कहा कि 2 नवंबर 1990 में जिन कारसेवकों ने राम मंदिर के लिए अपना बलिदान दिया था, उनके लिए आज श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई है। इस श्रद्धांजलि सभा में अयोध्या के सभी उच्च संत-महंत आगे बढ़कर उनको श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं। इसी के साथ उस काले दिन को याद कर रहे हैं, जब अपनी राजनीतिक आकांक्षाओं को पूर्ण करने के लिए अपने वोट बैंक को संतुष्ट करने के लिए किस तरह से यहां पर गोलियां चलाई गई थीं और कारसेवकों के खून से अयोध्या को लाल कर दिया गया था।

प्रभारी मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि 30 अक्टूबर और 2 नवंबर 1990 की घटनाएं भारतीय इतिहास के लिए एक काला धब्बा हैं, जब अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान निहत्थे कारसेवकों पर गोलियां चलाई गईं और अयोध्या की गलियां और सरयू का पानी लाल कर दिया गया था। आज उन हुतात्माओं को मैं नमन करता हूं, जिन्होंने श्री राम जन्मभूमि के लिए अपना बलिदान उस आंदोलन में दिया।

--आईएएनएस

डीके/वीसी

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