रक्षाबंधन पर ग्रहण का साया नहीं, पर भाई की कलाई पर राखी बांधने से पहले जरूर करें ये उपाय
प्रयागराज, 27 अगस्त (आईएएनएस)। रक्षाबंधन का पर्व भाई-बहन के अटूट प्रेम, स्नेह और रक्षा के संकल्प प्रतीक है। इस दिन बहनें अपने भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधती हैं, ताकि वो हमेशा उनकी ढाल बनकर खड़ा रहे। इस साल भी रक्षाबंधन को लेकर लोगों में खास उत्साह है, लेकिन सनातन में राखी बांधने के लिए भी शुभ मुहूर्त देखा जाता है। इसे लेकर ज्योतिषी पंडित शिप्रा सचदेव ने आईएएनएस से खास बातचीत की।
ज्योतिषी शिप्रा सचदेव ने कहा कि इस बार रक्षाबंधन 28 अगस्त को पड़ रहा है। अच्छी बात यह है कि भद्रा 27 अगस्त को ही लगकर समाप्त हो जाएगी, इसलिए इस बार रक्षाबंधन के दिन भद्रा का साया नहीं रहेगा। ऐसे में बिना किसी बाधा के पूरे दिन राखी बांधी जा सकेगी।
उन्होंने बताया कि इस दिन सुबह चंद्रग्रहण भी है, लेकिन यह ग्रहण भारत में दृश्यमान नहीं होगा, इसलिए इसका सूतक काल मान्य नहीं होगा और इसका सीधा असर भी नहीं पड़ेगा। हालांकि, ज्योतिषीय दृष्टि से चंद्रग्रहण का कुंडली पर थोड़ा बहुत नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
इस नकारात्मक प्रभाव को दूर करने के लिए उन्होंने एक विशेष उपाय भी बताया। उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन के दिन सबसे पहला रक्षा सूत्र भगवान शिव को बांधना चाहिए। शिव जी ने विष को धारण किया है और चंद्रमा को भी अपने मस्तक पर धारण किया हुआ है, इसलिए वे नकारात्मकता को दूर करते हैं।
इसके बाद दूसरा रक्षा सूत्र भगवान विष्णु को और तीसरा अपने गुरु को बांधना चाहिए। इसके बाद ही भाई को राखी बांधें। ज्योतिषी का मानना है कि इस क्रम का पालन करने से धन संबंधी और व्यय संबंधी समस्याएं समाप्त हो जाती हैं और भाई-बहन के रिश्ते में सकारात्मकता आती है।
शुभ मुहूर्त की बात करें तो इस बार रक्षाबंधन पर सुबह से ही शुभ समय शुरू हो रहा है। पहला शुभ मुहूर्त सुबह 7:30 बजे तक रहेगा। इसके बाद दूसरा सबसे अच्छा मुहूर्त सुबह 9:25 बजे से शुरू होकर 10:30 बजे तक रहेगा। इस दौरान राखी बांधना बेहद शुभ माना जा रहा है।
ज्योतिषी ने लोगों को सलाह दी है कि वे राहु काल के दौरान राखी बांधने से बचें। इस बार राहु काल सुबह 10:30 बजे से शुरू होकर दोपहर 12:20 बजे तक रहेगा। इस समय में राखी न बांधें।
उन्होंने बताया कि दोपहर 2:30 बजे से 3:00 बजे तक भी एक अच्छा मुहूर्त है और उसके बाद पूरे दिन राखी बांधी जा सकती है।
--आईएएनएस
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