राज्यसभा चुनाव में भाजपा ने जमीनी कार्यकर्ताओं को दिया मौका: भाजपा प्रवक्ता दिनेश प्रताप सिंह
लखनऊ, 5 अक्टूबर (आईएएनएस)। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता दिनेश प्रताप सिंह ने राज्यसभा चुनाव के लिए पार्टी की ओर से घोषित आठ उम्मीदवारों को लेकर समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि भाजपा कार्यकर्ता आधारित पार्टी है और घोषित उम्मीदवारों में ऐसे लोगों को स्थान दिया गया है, जिनका राजनीतिक परिवार से कोई संबंध नहीं है, लेकिन उन्होंने संगठन के लिए जमीनी स्तर पर काम किया है।
दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि भाजपा केवल कार्यकर्ता आधारित पार्टी होने की बात नहीं करती, बल्कि उसे करके भी दिखाती है। दूसरी पार्टियों में परिवार और परिवार के हित को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है, जबकि भाजपा में सामान्य कार्यकर्ता भी अपनी मेहनत के दम पर बड़ी जिम्मेदारी तक पहुंच सकता है। उन्होंने राज्यसभा के लिए घोषित उम्मीदवारों का जिक्र करते हुए कहा कि इनमें कई नाम ऐसे हैं, जो अपेक्षित नहीं थे। उम्मीदवारों के चयन में सामाजिक समीकरण का भी ध्यान रखा गया है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास' के नारे का उल्लेख करते हुए कहा कि यह केवल राजनीतिक नारा नहीं है, बल्कि भाजपा संगठन और उसकी सरकारों का मूल मंत्र है।
समाजवादी पार्टी के पीडीए को लेकर उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव लगातार पीडीए की बात करते हैं, लेकिन भाजपा पहले दिन से कहती रही है कि समाजवादी पार्टी का पीडीए वास्तव में 'परिवार डेवलपमेंट अथॉरिटी' है। अगर समाजवादी पार्टी को राज्यसभा की दो सीटों के लिए उम्मीदवार उतारने थे तो पार्टी ने अपने परिवार से जुड़े लोगों को प्राथमिकता दी। इससे यह साफ होता है कि सपा को पिछड़ों और दलितों की चिंता नहीं है।
दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि समाजवादी पार्टी केवल परिवार को आगे बढ़ाने की राजनीति कर रही है। प्रदेश की जनता सपा के राजनीतिक चरित्र और चेहरे को पहचान चुकी है और राज्यसभा चुनाव में भी इसका जवाब देगी। साथ ही उन्होंने दावा किया कि 2027 के विधानसभा चुनाव में भाजपा एक बार फिर बहुमत की सरकार बनाएगी।
अखिलेश यादव के उस बयान पर भी दिनेश प्रताप सिंह ने प्रतिक्रिया दी, जिसमें उन्होंने कहा था कि समाजवादी पार्टी ऐसा तीसरा उम्मीदवार उतारेगी, जिससे भाजपा के पैरों तले जमीन खिसक जाएगी। भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि अखिलेश यादव ने जिस तरह तीसरे उम्मीदवार को लेकर भाजपा के पैर के नीचे से जमीन खिसकाने की बात कही थी, उससे पहले दो उम्मीदवार उतारते ही समाजवादी पार्टी के अपने पैरों के नीचे की जमीन खिसक गई। पिछड़ा समाज उम्मीद कर रहा था कि उसके समाज से किसी व्यक्ति को उम्मीदवार बनाया जाएगा, लेकिन सपा ने परिवार के सदस्य को उम्मीदवार बनाया। इसी तरह दलित समाज की ओर से भी उम्मीद थी कि उसे प्रतिनिधित्व मिलेगा, लेकिन पार्टी ने किसी धनवान व्यक्ति को उम्मीदवार बना दिया।
दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि समाजवादी पार्टी जिस मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति का दावा करती रही है, उसमें मुस्लिम समाज भी इंतजार करता रह गया। सपा की राजनीति में परिवार को आगे बढ़ाना और मुस्लिम तुष्टिकरण प्रमुख रहा है। उन्होंने अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि सपा ने अपने विधान परिषद के नेता तक को बदल दिया और इसके लिए एक यादव नेता को हटाया गया। उन्होंने गोरखपुर में शिक्षा के मामले में यादव समाज के एक नेता के खिलाफ कार्रवाई का भी जिक्र किया।
उन्होंने सवाल किया कि क्या समाजवादी पार्टी यादव समाज को अपना बंधुआ मजदूर समझती है। कोई भी समाज बंधुआ मजदूर नहीं है और यादव समाज भी स्वाभिमान के साथ जीता है। उन्होंने यादव समाज को सनातनी बताते हुए दावा किया कि समाजवादी पार्टी की कथित मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति का जवाब यादव समाज 2027 के विधानसभा चुनाव में देगा।
--आईएएनएस
पीएसके

