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राज्यसभाः कांग्रेस ने कहा, बजट में सिर्फ आंकड़ों की चमक, लोगों के लिए रोशनी नहीं

नई दिल्ली, 10 फरवरी (आईएएनएस)। राज्यसभा में बजट पर चर्चा के दौरान कांग्रेस ने कहा कि यह बजट आंकड़ों की चमक से भरा हुआ जरूर है, लेकिन यह बजट आम आदमी की जिंदगी में किसी तरह की रोशनी नहीं ला पाता है। राजस्थान से कांग्रेस के राज्यसभा सांसद नीरज डांगी ने पार्टी का पक्ष रखते हुए कहा कि यह नौवां अवसर था जब वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सदन में बजट प्रस्तुत किया, लेकिन ईमानदारी से कहूं तो यह अब तक का सबसे नीरस और निराशाजनक बजट है।
राज्यसभाः कांग्रेस ने कहा, बजट में सिर्फ आंकड़ों की चमक, लोगों के लिए रोशनी नहीं

नई दिल्ली, 10 फरवरी (आईएएनएस)। राज्यसभा में बजट पर चर्चा के दौरान कांग्रेस ने कहा कि यह बजट आंकड़ों की चमक से भरा हुआ जरूर है, लेकिन यह बजट आम आदमी की जिंदगी में किसी तरह की रोशनी नहीं ला पाता है। राजस्थान से कांग्रेस के राज्यसभा सांसद नीरज डांगी ने पार्टी का पक्ष रखते हुए कहा कि यह नौवां अवसर था जब वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सदन में बजट प्रस्तुत किया, लेकिन ईमानदारी से कहूं तो यह अब तक का सबसे नीरस और निराशाजनक बजट है।

डांगी ने कहा कि पिछले 11 वर्षों में बजट में की गई अनेक घोषणाओं को यह सरकार आज तक पूरा नहीं कर पाई। और अब एक बार फिर आने वाले वर्षों के लिए सिर्फ घोषणाओं का पुलिंदा पेश कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि बजट पेश होते ही शेयर बाजार में भारी गिरावट देखने को मिली। सेंसेक्स लगभग 2300 अंकों तक गिरा, और लाखों करोड़ रुपए का निवेश स्वाहा हो गया। यह बजट न तो निवेशकों की उम्मीदों पर खरा उतरा, न बाजार के भरोसे पर और न ही आम आदमी की आकांक्षाओं पर।

उन्होंने सदन में कहा कि यह बजट इस बात का प्रमाण है कि मोदी सरकार आज की समस्याओं का जवाब 2047 में ढूंढ रही है। 2014 से 2026 के बीच की जो नाकामियां हैं, वे इतनी बढ़ चुकी हैं कि सरकार के पास निकट भविष्य के लिए कोई ठोस रोडमैप नहीं बचा है। सिर्फ बड़ी-बड़ी बातें हैं, और वे बातें भी राजनीतिक कल्पनाओं से भरी हुई हैं।

नीरज डांगी ने कहा कि यह बजट आज युवा बनाम वादे साबित हो रहा है। देश आज बेरोजगारी, महंगाई और आय की असमानता जैसी गंभीर समस्याओं से जूझ रहा है। सरकार स्टार्टअप और स्किल की बात तो करती है, लेकिन सवाल यह है कि कितने स्थायी, सुरक्षित और सम्मानजनक रोजगार पैदा हुए। कांग्रेस सांसद ने कहा कि एमएसएमई, औद्योगिक क्षेत्र, ऑरेंज इकोनॉमी, एनीमेशन और विजुअल इफेक्ट्स के माध्यम से रोजगार देने की बात की जा रही है, लेकिन जब पिछले 11 वर्षों में हर साल दो करोड़ नौजवानों को रोजगार देने का वादा पूरा नहीं हो पाया तो अब नए रोजगार कैसे पैदा होंगे?

उन्होंने कहा कि सरकारी भर्तियां लगभग ठप हैं। ठेका और अस्थायी नौकरियां बढ़ रही हैं। निजी क्षेत्र में न सुरक्षा है, न स्थिरता। यह बजट युवाओं को नौकरी नहीं, सिर्फ भाषण देता है। रोजगार पैदा करने के नाम पर पब्लिक कैपिटल एक्सपेंडिचर को सही ठहराया जा रहा है, लेकिन भारत का यह अभूतपूर्व कैपेक्स पुश सार्थक रोजगार सृजन में नाकाम रहा है। खर्च और नतीजों के बीच एक बुनियादी खाई साफ दिखाई देती है।

कांग्रेस सांसद ने कहा कि लगभग 2.8 करोड़ पढ़े-लिखे युवा सक्रिय रूप से बेरोजगार हैं। मनरेगा की बात करें तो देशभर में किसान और श्रमिक मनरेगा में किए गए बदलावों के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन उनकी मांगों को इस बजट में पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया। उन्होंने कहा कि मनरेगा यानी महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना का नाम बदलकर 'विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन' कर दिया गया। मनरेगा से महात्मा गांधी का नाम हटा दिया गया, लेकिन इस नई योजना में भगवान श्रीराम को भी स्थापित नहीं कर पाए। डांगी ने कहा कि यह सरकार न महात्मा गांधी की विरासत को स्वीकार कर पाई और न ही भगवान श्रीराम के आदर्शों को अपनाने का साहस दिखा पाई।

--आईएएनएस

जीसीबी/डीकेपी

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