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राजौरी की ऐतिहासिक भैरव यात्रा को मिली राष्ट्रीय पहचान, देश की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर सूची में किया गया शामिल

राजौरी की ऐतिहासिक भैरव यात्रा को मिली राष्ट्रीय पहचान, देश की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर सूची में किया गया शामिल
राजौरी की ऐतिहासिक भैरव यात्रा को मिली राष्ट्रीय पहचान, देश की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर सूची में किया गया शामिल

श्रीनगर, 15 जुलाई (आईएएनएस)। जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने राजौरी जिले के लिए गर्व का क्षण बताते हुए जानकारी दी कि राजौरी की ऐतिहासिक भैरव यात्रा को आधिकारिक रूप से भारत की राष्ट्रीय अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर की सूची में शामिल कर लिया गया है।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट करते हुए मनोज सिन्हा ने इस उपलब्धि के लिए राजौरी जिला प्रशासन और जम्मू-कश्मीर संस्कृति विभाग को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह सम्मान इस क्षेत्र की गहरी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, दस्तावेजीकरण और प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

उपराज्यपाल ने कहा कि यह राष्ट्रीय सम्मान उन पीढ़ियों की आस्था और समर्पण का भी सम्मान है, जिन्होंने सदियों से इस परंपरा को जीवित रखा। भैरव यात्रा को राष्ट्रीय अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर सूची में शामिल किए जाने से राजौरी की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी। साथ ही इससे शोध, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और सतत विरासत पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।

बता दें कि राजौरी भैरव यात्रा जम्मू-कश्मीर के राजौरी क्षेत्र का सदियों पुराना और बेहद लोकप्रिय आध्यात्मिक उत्सव है, जो मुख्य रूप से होली पर्व के अवसर पर मनाया जाता है। यह यात्रा अपनी अनोखी परंपराओं और धार्मिक आस्था के लिए जानी जाती है।

इस यात्रा की सबसे खास बात यह है कि एक श्रद्धालु बाबा भैरव देव का स्वरूप धारण करता है। उसके पूरे शरीर पर काला रंग लगाया जाता है और वह भव्य शोभायात्रा का नेतृत्व करता है। यात्रा के दौरान वह श्रद्धालुओं को प्रतीकात्मक रूप से चिमटे से हल्का स्पर्श करता है। स्थानीय लोगों की मान्यता है कि इससे सौभाग्य, सुरक्षा और बाबा भैरव का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

इस ऐतिहासिक यात्रा को भारत की राष्ट्रीय अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर सूची में शामिल करने का यह सम्मान न केवल इसकी धार्मिक और सांस्कृतिक महत्ता को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता देता है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए इस अनमोल परंपरा के संरक्षण और संवर्धन का मार्ग भी प्रशस्त करता है।

--आईएएनएस

वीकेयू/पीएम

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