'राजनीति चमकाने के लिए सांप्रदायिक अशांति फैलाना चाहती है भाजपा', मुरादाबाद मस्जिद विवाद पर बोले सपा प्रवक्ता
लखनऊ, 9 सितंबर (आईएएनएस)। समाजवादी पार्टी ने मुरादाबाद में दिल्ली रोड पर स्थित मुस्तफा मस्जिद को जारी नोटिस की कड़ी आपत्ति जताई है। पार्टी के प्रवक्ता उदयवीर सिंह ने कहा कि भाजपा अपनी राजनीति चमकाने के लिए देश में सांप्रदायिक अशांति फैलाना चाहती है। साथ ही, उन्होंने कहा कि सपा इस बात के लिए प्रतिबद्ध है कि सरकार के षड्यंत्रों को सफल नहीं होने दिया जाएगा।
मुरादाबाद की मस्जिद के विवाद पर सपा प्रवक्ता उदयवीर सिंह ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा कहा, "भारतीय जनता पार्टी की सरकार के पास अब कोई काम नहीं बचा है। पिछले साढ़े 9 सालों से उन्होंने सिर्फ लूट-खसोट, भ्रष्टाचार और बेईमानी ही की है। सड़कों से लेकर किसानों और युवाओं तक हर किसी की व्यवस्था को ध्वस्त को किया है।"
सपा प्रवक्ता ने आगे कहा, "उन्होंने (सरकार ने) जनता का पैसा लूटा है और अब उन्हें आगे बढ़ने का बस एक ही रास्ता दिखता है कि अलग-अलग जगहों पर धार्मिक विवाद पैदा किए जाएं, मस्जिदों के विवाद किए जाएं और मंदिरों की आड़ में छिपा जाए। वे अपनी राजनीति चमकाने के लिए देश में सांप्रदायिक अशांति फैलाना चाहते हैं। हम इस बात के लिए प्रतिबद्ध हैं कि सरकार के षड्यंत्रों को सफल नहीं होने देंगे।"
सहारनपुर मस्जिद गिराने का मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंचने पर उदयवीर सिंह ने कहा, "सहारनपुर के लोगों और मस्जिद से जुड़े लोगों को जिला अदालत के फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट में अपील करने का अधिकार था। सरकार ने यह कानूनी अधिकार छीन लिया। प्रशासन ने देश और राज्य में अशांति फैलाने के इरादे से ऐसा आक्रामक रवैया अपनाया। बेदखली का नोटिस और आदेश तो था, लेकिन मस्जिद को गिरा दिया गया। इसलिए, जाहिर है कि उन्हें अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा। मुझे पूरा भरोसा है कि वहां के प्रशासन और जिला मजिस्ट्रेट को अदालत से कड़ी सजा मिलेगी।"
संभल में एएसआई की टीम के पहुंचने और बाबा बहाउद्दीन शाह मस्जिद के निर्माण से जुड़े रिकॉर्ड्स की जांच करने पर सपा प्रवक्ता ने कहा, "यह बात सभी जानते हैं। सुप्रीम कोर्ट पहले ही बुलडोज़र कार्रवाई को लेकर आदेश जारी कर चुका है। जिन इमारतों को वे निशाना बना रहे हैं, वे 100-200 साल पुरानी हैं। एएसआई के तहत कड़े नियम हैं, लेकिन भारतीय जनता पार्टी कानून या संविधान में विश्वास नहीं रखती। वे लोगों के बीच बंटवारा करके राजनीति करना चाहते हैं और उन्होंने यही किया है।"
समाजवादी पार्टी की ओर से अपने छात्र विंग के ड्रेस कोड को नीला करने पर पार्टी प्रवक्ता ने कहा, "यह एक नया दौर है और इसमें नए लोग हैं। बदलाव ही एकमात्र स्थायी चीज है और नए दौर के साथ-साथ यह रंग एक वैचारिक क्रांति का भी प्रतीक है। यह सामाजिक न्याय का रंग है और देश में संविधान व कानून का शासन स्थापित करने का भी प्रतिनिधित्व करता है।"
उन्होंने कहा, "समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने युवाओं को यह रंग दिया है और उन्हें एक जिम्मेदारी सौंपी है। उन्होंने लोगों को सकारात्मक राजनीति की ओर आकर्षित किया है और संकेत दिया है कि ये युवा बाहर जाकर लोगों को संविधान, कानून के शासन और सामाजिक न्याय से जोड़ने का काम करेंगे। नीला रंग आसमान का रंग है, जो युवाओं की असीम संभावनाओं को दर्शाता है।"
भाजपा के इस आरोप पर कि समाजवादी पार्टी गिरगिट की तरह रंग बदल रही है, प्रवक्ता उदयवीर सिंह ने कहा, "भाजपा नेताओं को नीले रंग से बहुत दिक्कत है। उन्हें दबे-कुचले, शोषित और वंचित वर्गों, बाबासाहेब और उनकी विचारधारा से गहरी समस्या है। उनकी वैचारिक समझ बाबासाहेब के सामाजिक न्याय और कानून के शासन के सिद्धांतों के बिल्कुल उलट है। तो नीले रंग से उन्हें क्या लेना-देना है? भाजपा नेताओं को इस बात की चिंता क्यों है कि समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता कौन सी जर्सी पहनेंगे? ऐसा इसलिए है, क्योंकि उन्हें सामाजिक न्याय, कानून के शासन और संविधान से नफरत है।"
मंत्री ओम प्रकाश राजभर पर सपा प्रवक्ता ने कहा, "सब जानते हैं कि भाजपा आखिरकार ओम प्रकाश राजभर से पीछा छुड़ा लेगी। उन्होंने खुद पहले कहा है कि भाजपा उन्हें अपने 'भोंपू' के तौर पर इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने यह भी कहा है कि उनके जो भी ट्वीट या भाषण होते हैं, वे भाजपा नेताओं की ओर से ही दिए जाते हैं। उन्होंने खुद कहा है कि जब आप किसी बैंड का हिस्सा होते हैं, तो आपको बैंडमास्टर के हिसाब से ही 'पीपनी' बजाना पड़ता है। तो, चूंकि वे बैंडमास्टर के हिसाब से ही 'पीपनी' बजा रहे हैं, इसलिए उनके बयानों को गंभीरता से नहीं लेना चाहिए और न ही उन पर ध्यान देना चाहिए।"
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं का मानदेय बढ़ाने पर उदयवीर सिंह ने कहा, "योगी आदित्यनाथ 9 साल से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं और अब 10वां साल चल रहा है। उन्हें यह बताना चाहिए कि नौ साल तक आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के साथ न्याय क्यों नहीं हुआ, उन्हें उनका हक क्यों नहीं मिला और उनके पैसे कौन ले रहा था? भाजपा सरकार के दौरान, क्या योगी आदित्यनाथ पैसे अपने पास रख रहे थे या दिल्ली भेज रहे थे? उस पैसे का क्या किया जा रहा था?"
--आईएएनएस
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