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राजस्थान में फिजूलखर्ची का इतिहास बन रहा है : अशोक गहलोत

जयपुर, 12 अप्रैल (आईएएनएस)। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता अशोक गहलोत ने स्वास्थ्य मॉडल को लेकर प्रदेश की भाजपा सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि राजस्थान में फिजूलखर्ची का इतिहास बन रहा है। प्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री बड़ी-बड़ी बातें व भाषण तो कर रहे हैं, लेकिन फिजूलखर्ची का नया इतिहास रच रहे हैं।
राजस्थान में फिजूलखर्ची का इतिहास बन रहा है : अशोक गहलोत

जयपुर, 12 अप्रैल (आईएएनएस)। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता अशोक गहलोत ने स्वास्थ्य मॉडल को लेकर प्रदेश की भाजपा सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि राजस्थान में फिजूलखर्ची का इतिहास बन रहा है। प्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री बड़ी-बड़ी बातें व भाषण तो कर रहे हैं, लेकिन फिजूलखर्ची का नया इतिहास रच रहे हैं।

गहलोत ने कहा कि अनावश्यक बड़े-बड़े कार्यक्रम आयोजित कर तमाशा किया जा रहा है। लोगों को कलेक्टरों के माध्यम से बुलवाया जा रहा है और सरकार के खर्चे पर सबकुछ हो रहा है। यह तरीका बिल्कुल ठीक नहीं है। पहले ही सरकार घाटे में है, पेमेंट नहीं कर पा रही। बुजुर्गों, महिलाओं, पुरुषों, दिव्यांगों और विधवाओं पर भी दया नहीं आ रही। तीन-तीन और चार-चार महीने तक पेमेंट नहीं हो रहे हैं। दुकानदारों ने दवाइयां देना बंद कर दिया है। उनके हजार करोड़ रुपए बकाया हैं। आम लोग अपनी जेब से भुगतान कर रहे हैं, यह दर्द सिर्फ वे ही जानते हैं।

उन्होंने कहा कि प्राइवेट अस्पताल अब इलाज बंद कर रहे हैं क्योंकि उनके बिलों का भुगतान नहीं हो रहा। गहलोत ने याद दिलाया कि उनके कार्यकाल में राजस्थान का स्वास्थ्य मॉडल पूरे देश में मिसाल बना था। भाजपा शासित राज्यों सहित कई राज्यों में इसकी तारीफ होती थी।

उन्होंने कहा कि भजनलाल चाहते तो इस मॉडल को और मजबूत कर सकते थे और देशभर में वाहवाही लूट सकते थे, लेकिन उन्होंने इसे इतना कमजोर कर दिया कि अब प्राइवेट अस्पताल भी इलाज देने से मना कर रहे हैं। दवाओं की दुकानों में दवाइयां नहीं मिल रही हैं। रिटायर्ड कर्मचारी, सर्विंग कर्मचारी, पत्रकार और आम लोग आरजीएचएस योजना के तहत भारी परेशानी झेल रहे हैं।

गहलोत ने कहा कि विपक्ष की आलोचना को सरकार को सकारात्मक रूप में लेना चाहिए। अगर हमारी बातों में सच्चाई है तो उसे सुधारें, नहीं तो छोड़ दें। लेकिन, दुर्भाग्य से न तो केंद्र और न ही राज्य सरकार विपक्ष की बात समझती है। जमीनी हकीकत बिल्कुल अलग है, जबकि ये लोग हवा में उड़ रहे हैं। किसान खून-पसीना बहाता है। महीनों लगातार मेहनत करता है, फिर भी ओलावृष्टि या बीमारी से फसल खराब हो जाती है। तब उसके दिल में कितनी आग लगती है। ऐसे में किसानों के बारे में हल्की-फुल्की बातें नहीं करनी चाहिए।

गहलोत ने स्पष्ट किया कि सरकार को संवेदनशीलता दिखानी चाहिए, न कि संवेदनहीन रवैया अपनाना चाहिए।

--आईएएनएस

डीकेएम/एबीएम

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