राजस्थान के कई इलाके में सूखे से लोग परेशान, हजारों गायों की हुई मौत और सरकार को खबर नहीं: अशोक गहलोत
जयपुर, 18 अक्टूबर (आईएएनएस)। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राज्य सरकार से सूखे और चारे की कमी को दूर करने के लिए केंद्र सरकार से मदद मांगने का आग्रह किया है। उन्होंने स्थानीय निकाय चुनावों में अनियमितताओं और पुलिस द्वारा धमकाने का आरोप लगाया है और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौर से अपने बयानों के लिए माफी मांगने की मांग की है।
राजस्थान में सूखे को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा, "भाजपा शासित राज्यों में भी कांग्रेस नेता प्रभावित इलाकों का दौरा कर रहे हैं और राज्य स्तर पर निगरानी रखी जा रही है। राजस्थान इकलौता ऐसा राज्य है, जहां सरकार को अभी तक यह भी नहीं पता कि गांवों में सूखा कितना गंभीर है। मैंने हाल ही में बीकानेर का दौरा किया, जहां हालात बहुत गंभीर हैं। जैसलमेर, बाड़मेर और जोधपुर समेत कई इलाकों में स्थिति बहुत खराब है। अगर हमने समय रहते कदम नहीं उठाए और मुख्यमंत्री स्तर पर निगरानी सुनिश्चित नहीं की, तो पूरे राज्य के लोगों को भुगतना पड़ेगा।"
उन्होंने कहा कि चारे का प्रबंधन एक बड़ी चिंता है और मवेशी मरने लगे हैं। कल जैसलमेर के एक पूर्व विधायक से बात हुई, जिन्होंने बताया कि वहां हजारों गायें मर चुकी हैं। सरकार को स्थिति का जायजा लेना चाहिए, लेकिन चारे का कोई इंतजाम नहीं किया जा रहा है। अभी चारे की कीमत 20 रुपये प्रति किलो है। पूरे राज्य में पीने के पानी की भारी किल्लत है। बारिश कम होने की वजह से राजस्थान और उत्तर भारत में पानी का संकट और गहरा गया है। राजस्थान में हमारे बांध भी नहीं भर पाए हैं।
अशोक गहलोत ने कहा, "एक बार ऐसी स्थिति आई थी, जब हमने 16 अगस्त से ही राहत कार्य शुरू कर दिया था। ग्रामीणों को आज भी याद है कि हमारी सरकार ने 16 अगस्त से काम शुरू कराया था। 16 अगस्त से काम शुरू करने का मतलब है, करीब 10-11 महीने तक काम जारी रखना, जो छोटी बात नहीं है। मैं समझता हूं कि उनके लिए यह मुश्किल हो सकता है, लेकिन यह तो डबल इंजन की सरकार है, फिर वे केंद्र से बात क्यों नहीं करते? उस समय हम भी केंद्र से मदद लेकर आए थे। तब अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री थे और मैं 'काम के बदले अनाज' योजना लेकर आया था। हमने संकट का बेहतर तरीके से सामना किया था।"
भाजपा नेता मदन राठौड़ द्वारा भाजपा को समर्थन देने वाली टिप्पणी पर अशोक गहलोत ने कहा, "मदन राठौड़ को बिना किसी 'अगर-मगर' के ईमानदारी से और स्पष्ट रूप से खेद जताना चाहिए। उन्हें यह मानते हुए माफी मांगनी चाहिए कि उन्होंने कुछ ऐसा कह दिया जो उन्हें नहीं कहना चाहिए था। हालांकि, वे मीडिया के सामने जितनी ज्यादा सफाई देने की कोशिश कर रहे हैं, उतनी ही गहरी अपनी कब्र खोदते जा रहे हैं। वे भले ही यह तर्क दें कि जिस संदर्भ या परिस्थिति में उन्होंने बात कही, वह अलग थी, या उनका इरादा वह नहीं था जो जनता ने समझा है, लेकिन इससे सच्चाई नहीं बदल जाती। भारत के संदर्भ में पाकिस्तान का इतिहास एक काला अध्याय है; लोग इसे कैसे भूल सकते हैं? पाकिस्तान का जिक्र आते ही जनता में इतना गहरा आक्रोश पैदा हो जाता है कि भाजपा इसे संभाल नहीं पा रही है और न ही संभाल पाएगी, जब तक कि मदन राठौड़ स्पष्ट रूप से माफी नहीं मांगते और जनता के सामने अपना पक्ष नहीं रखते।"
--आईएएनएस
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