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राजस्थान जलजीवन मिशन घोटाले में हाईकोर्ट से बड़ी राहत, पांच आरोपियों को मिली जमानत

राजस्थान जलजीवन मिशन घोटाले में हाईकोर्ट से बड़ी राहत, पांच आरोपियों को मिली जमानत

राजस्थान के जलजीवन मिशन घोटाले से जुड़े मामले में एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है। राजस्थान हाईकोर्ट ने श्री श्याम ट्यूबवेल कंपनी के संचालक पदमचंद जैन के बेटे पीयूष जैन, गणपति ट्यूबवेल कंपनी के मालिक महेश मित्तल और उनके बेटे हेमंत मित्तल सहित कुल पांच आरोपियों को जमानत दे दी है। एसीबी (एंटी करप्शन ब्यूरो) ने इन सभी को दिसंबर 2025 में गिरफ्तार किया था, जिसके बाद से यह मामला सुर्खियों में बना हुआ था।

जलजीवन मिशन घोटाले की पृष्ठभूमि

जलजीवन मिशन का उद्देश्य राज्य के ग्रामीण इलाकों में स्वच्छ पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करना था। यह मिशन केंद्र सरकार द्वारा शुरू किया गया था, और इसके तहत प्रदेशों को पानी के बुनियादी ढांचे को सुधारने के लिए धन और संसाधन प्रदान किए गए थे। लेकिन राजस्थान में इस मिशन के तहत हुए कामों में अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोप सामने आए थे। आरोपियों पर यह आरोप था कि उन्होंने मिशन के तहत वितरित धन का गबन किया और कामों में गड़बड़ियां कीं।

जमानत पर हाईकोर्ट का आदेश

राजस्थान हाईकोर्ट ने आरोपियों की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए पांचों आरोपियों को राहत देने का फैसला लिया। कोर्ट ने कहा कि, "पुलिस और एसीबी द्वारा इस मामले में आरोपियों के खिलाफ प्रस्तुत किए गए सबूतों के आधार पर, जमानत दी जा सकती है।" हालांकि, अदालत ने जमानत के दौरान कुछ शर्तें भी लगाई हैं, जैसे आरोपियों को अदालत में समय पर हाजिर होना होगा और वे किसी तरह के गवाहों को प्रभावित नहीं करेंगे।

जमानत मिलने के बाद आरोपियों का क्या कहना है?

जमानत मिलने के बाद आरोपियों ने राहत की सांस ली है। पीयूष जैन और महेश मित्तल ने अपने बयान में कहा कि वे अदालत के फैसले का सम्मान करते हैं और पूरी तरह से न्याय की प्रक्रिया का पालन करेंगे। उनका कहना था कि इस घोटाले में उनकी कोई भूमिका नहीं थी और वे इस मामले में जल्द ही पूरी तरह से निर्दोष साबित होंगे।

आगे की कानूनी प्रक्रिया

हालांकि आरोपियों को जमानत मिल चुकी है, लेकिन मामले में जांच और कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। एसीबी के अधिकारियों का कहना है कि इस घोटाले की जांच अभी पूरी नहीं हुई है और आरोपियों के खिलाफ सबूत जुटाने के लिए और कार्रवाई की जाएगी। जलजीवन मिशन के तहत हुई वित्तीय गड़बड़ियों की जांच अभी भी चल रही है और इस मामले में कई और गिरफ्तारी हो सकती है।

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