राजा रघुवंशी हत्याकांडः मेघालय सरकार ने सोनम की जमानत को सुप्रीम कोर्ट में दी चुनौती
नई दिल्ली, 2 जुलाई (आईएएनएस)। बहुचर्चित इंदौर के ट्रांसपोर्ट व्यापारी राजा रघुवंशी की हत्या के मामले में मेघालय सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में मेघालय हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें सोनम रघुवंशी को मिली जमानत को सही ठहराया गया था। सोनम पर मई 2025 में अपने पति राजा रघुवंशी की हनीमून के दौरान हत्या का मुख्य आरोपी होने का आरोप है।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जस्टिस एमएम सुंदरेश की अध्यक्षता वाली बेंच के सामने राज्य की याचिका का जिक्र करते हुए इसे जल्द सुनवाई के लिए लिस्ट करने की मांग की।
एसजी तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि सोनम रघुवंशी को केवल इस आधार पर जमानत दे दी गई कि गिरफ्तारी के समय उसे गिरफ्तारी के सभी कारण पूरी तरह उपलब्ध नहीं कराए गए थे। तुषार मेहता ने यह भी कहा कि दस्तावेज में केवल एक कानूनी धारा के नंबर टाइप करने में गलती हुई थी। इतनी छोटी तकनीकी गलती के आधार पर जमानत नहीं मिलनी चाहिए। तुषार मेहता ने कहा कि जमानत बरकरार रहने की सूरत में सोनम के फरार होने की आशंका है, इसलिए मामले की तत्काल सुनवाई की जरूरत है।
बता दें कि मेघालय हाईकोर्ट ने 29 जून को शिलॉन्ग अदालत के उस आदेश को बरकरार रखा था, जिसमें राजा रघुवंशी मर्डर केस की मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी को जमानत दी गई थी। अदालत ने राज्य सरकार की अपील को खारिज कर दिया।
जस्टिस डब्ल्यू. डिएंगडोह की एकल पीठ ने अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश (न्यायिक), शिलॉन्ग के अप्रैल 2026 के आदेश को चुनौती देने वाली राज्य सरकार की याचिका को खारिज कर दिया था। इस आदेश में गिरफ्तारी में गंभीर प्रक्रियात्मक खामियां पाए जाने के बाद सोनम को जमानत दी गई थी। हाईकोर्ट ने 10 जून को दोनों पक्षों की विस्तृत दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।
शिलॉन्ग कोर्ट ने सोनम को जमानत देते समय कहा था कि जांच अधिकारियों ने गिरफ्तारी के आधार सही तरीके से नहीं बताए, जिससे आरोपी के बचाव के अधिकार पर असर पड़ा।
कोर्ट ने पाया कि गिरफ्तारी से जुड़े सभी दस्तावेज (जैसे गिरफ्तारी मेमो, चेकलिस्ट, अधिकारों की सूचना और केस डायरी के अंश) में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 403(1) लिखी गई थी, जबकि सही धारा 103(1) होनी चाहिए थी, जो हत्या से संबंधित है।
अभियोजन पक्ष ने इसे केवल टाइपिंग की गलती बताया, लेकिन अदालत ने कहा कि यही गलती सभी दस्तावेजों में लगातार पाई गई और आरोपी को औपचारिक रूप से 'हत्या के आरोप' की जानकारी नहीं दी गई थी।
राज्य सरकार ने हाई कोर्ट में दलील दी कि यह केवल प्रक्रियात्मक गलती थी और इससे आरोपी को कोई वास्तविक नुकसान नहीं हुआ।
सरकारी पक्ष ने कहा कि सोनम को हत्या के आरोप की जानकारी थी, क्योंकि उसने गिरफ्तारी के दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए थे, वह मजिस्ट्रेट के सामने पेश हुई थी और उसके पास वकील भी था।
लेकिन हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की दलील को स्वीकार नहीं किया और शिलॉन्ग कोर्ट का आदेश बरकरार रखते हुए सोनम को जमानत पर रहने की अनुमति दे दी।
यह मामला इंदौर के व्यवसायी राजा रघुवंशी की हत्या से जुड़ा है, जो मई 2025 में अपनी पत्नी सोनम के साथ हनीमून पर मेघालय गए थे। दोनों सोहरा (चेरापूंजी) यात्रा के दौरान लापता हो गए थे। बाद में राजा का शव वीसावडोंग फॉल्स के पास एक गहरी खाई से बरामद हुआ, जिसमें कई चोटों के निशान थे।
पुलिस जांच में आरोप लगाया गया कि सोनम ने अपने कथित प्रेमी और अन्य लोगों के साथ मिलकर राजा की हत्या की साजिश रची थी। इसके बाद सोनम को गिरफ्तार किया गया और अन्य आरोपियों को भी अलग-अलग राज्यों से पकड़ा गया। जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी है और मामला फिलहाल ट्रायल में है।
--आईएएनएस
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