राजा भैया की पत्नी भानवी सिंह ने बताई आपबीती, बोलीं-अदालत आना शौक नहीं, मजबूरी थी
नई दिल्ली, 19 जनवरी (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश में कुंडा सीट से विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया और उनकी पत्नी भानवी सिंह से जुड़े घरेलू हिंसा के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट को चार महीने के भीतर फैसला करने का निर्देश दिया है। सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद भानवी सिंह ने कहा कि उन्हें अदालत पर भरोसा है।
मीडिया से बातचीत में भानवी सिंह ने कहा, "हम अपने हक की लड़ाई लड़ रहे हैं। हमें अदालतों के चक्कर लगाने का कोई शौक नहीं था, लेकिन हालात ऐसे बना दिए गए कि हमें यह कदम उठाना पड़ा।"
उन्होंने समाज में महिलाओं की स्थिति पर भी खुलकर बात की। भानवी सिंह ने कहा कि जब एक लड़की पैदा होती है, तो वह बचपन से यही सुनते हुए बड़ी होती है कि लड़की पराया धन होती है और एक दिन उसे दूसरे घर जाना है। करीब 20 साल की उम्र में उसकी शादी होती है, वह पर्दा प्रथा और परिवार की परंपराओं को अपनाती है और अपने ससुराल के ढांचे में खुद को ढाल लेती है। वह यह सोचकर सब कुछ सहती है कि उसका घर एक मंदिर है और उसे उस मंदिर को बचाकर रखना है।
भानवी सिंह ने बताया कि शादी के बाद उनकी भी तीन बेटियां हुईं। इसके बाद उन्हें यह सुनना पड़ा कि अगर लड़के नहीं हुए तो दूसरी शादी करनी पड़ेगी, क्योंकि लड़कियों से वंश नहीं चलता।
उन्होंने कहा कि इसके बाद वह इलाज के लिए मुंबई गईं और दो बेटों को जन्म दिया, ताकि वंश चले। इसके बाद उन्होंने पूरी ताकत अपने घर को संभालने और एक आदर्श परिवार बनाने में लगा दी, लेकिन इसके बाद भी हालात और बिगड़ते चले गए।
उन्होंने आरोप लगाया कि घर में बाहरी महिलाओं का आना शुरू हो गया। जब उन्होंने इसका विरोध किया तो उन्हें घरेलू हिंसा का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि यह सामान्य घरेलू हिंसा नहीं थी, बल्कि इतनी गंभीर थी कि उन्हें अस्पताल में भर्ती तक नहीं होने दिया गया। इलाज इसलिए नहीं कराने दिया गया कि कहीं यह खबर अखबारों की सुर्खियां न बन जाए। उन्हें बिना इलाज के ही घर वापस बुला लिया गया और कहा गया कि घर पर ही इलाज हो जाएगा।
भानवी सिंह ने कहा कि इसके बावजूद वह चुप रहीं, क्योंकि उन्हें हमेशा यही सिखाया गया था कि बच्चों का भविष्य मां से नहीं, पिता से जुड़ा होता है। उन्होंने कहा कि वह अकेली नहीं हैं। देश में ऐसी अनगिनत महिलाएं हैं जो अपने बच्चों और परिवार के लिए चुप रहती हैं। सब कुछ सहती हैं और घर को बचाने की कोशिश करती हैं।
उन्होंने आगे कहा कि हालात इतने खराब हो गए कि गोली चलने जैसी घटनाएं भी हुईं, लेकिन फिर भी वह चुप रहीं। इसके बाद उन पर संपत्ति से जुड़े कागजों पर जबरन हस्ताक्षर कराए गए। संपत्तियां नौकरों, ड्राइवरों, रसोइयों, नेताओं और अनजान लोगों के नाम कर दी गईं, ताकि उनके पास कुछ भी न बचे। इसके बाद तलाक की आड़ में उनके खिलाफ एक के बाद एक मामले दर्ज कराए गए।
भानवी सिंह ने आरोप लगाया कि अलग-अलग राज्यों की पुलिस ने उनके खिलाफ झूठी एफआईआर और चार्जशीट दाखिल कीं। लखनऊ, दिल्ली, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश में उन्हें लगातार मामलों में उलझाया गया, ताकि वह मानसिक रूप से टूट जाएं और हार मानकर तलाक देने को मजबूर हो जाएं। उन्होंने साफ कहा कि वह टूटी नहीं हैं, बल्कि पहले से ज्यादा मजबूती से खड़ी हैं।
उन्होंने कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है और सच की जीत जरूर होगी। वह यह लड़ाई अपने लिए नहीं, बल्कि अपने बच्चों और अपने अधिकारों के लिए लड़ रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यह बहुत गलत है कि कोई पति तलाक दायर किए बिना ही दूसरी महिला के साथ रहने लगे। मजबूरी में घर छोड़ना पड़ा।
भानवी सिंह ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने जो भी फैसला दिया है, वह सही दिशा में उठाया गया कदम है और उन्हें उम्मीद है कि आगे भी न्याय मिलेगा।
--आईएएनएस
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