राहुल गांधी पर भड़कीं शिवसेना नेता शाइना एनसी, बोलीं-सावन के महीने में मछली उत्सव मनाने वाले हिंदू विरोधी
मुंबई, 25 अगस्त (आईएएनएस)। शिवसेना सांसद शाइना एनसी ने राहुल गांधी को लेकर हिमंता बिस्वा सरमा के बयान, दिल्ली में फिर से होने वाले सीजेपी के प्रदर्शन सहित कई मामलों पर प्रतिक्रिया दी है।
आईएएनएस से बातचीत करते हुए राहुल गांधी पर किए गए हिमंता बिस्वा सरमा के बयान पर शाइना एनसी ने कहा, "जो लोग सावन के पवित्र महीने में मछली उत्सव मना रहे हैं, वे स्वाभाविक रूप से हिंदू-विरोधी हैं। राहुल गांधी ने केवल तुष्टिकरण की राजनीति की है और जब भी कोई महिला अपनी आवाज उठाती है, तो मनुस्मृति का जिक्र करने की क्या जरूरत है? आप इस पर चर्चा क्यों नहीं करते कि आप उन्हें शिक्षा, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता कैसे प्रदान कर रहे हैं? आपके पास इसके लिए कोई एजेंडा, विजन या योजना नहीं है। उनका ध्यान केवल विवादास्पद बयानों, तुष्टिकरण की राजनीति और वोट बैंक पर है।"
सीजेपी की ओर से 5 सितंबर को दिल्ली में शांतिपूर्ण मार्च की घोषणा पर शिवसेना की प्रवक्ता शाइना एनसी ने कहा, "देखिए, जब भी कोई विरोध-प्रदर्शन होता है, तो यह प्रदर्शन करने वाले लोगों का अधिकार है। साथ ही, हमें पुलिस बल का सम्मान करना चाहिए और संवेदनशीलता के साथ उनकी स्थिति को भी देखना चाहिए। वे क्या कर रहे हैं? वे अपना काम कर रहे हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई भी उपद्रवी या भारत को अस्थिर करने की कोशिश करने वाला व्यक्ति सफल न हो पाए। इसलिए, मुझे लगता है कि हमें इसे संवेदनशीलता के साथ और दोनों पक्षों को ध्यान में रखते हुए देखना चाहिए।"
कांग्रेस सांसद पी. चिदंबरम के बयान पर शाइना एनसी ने कहा कि 'एक देश, एक चुनाव', देश और जनता के हित में है। जब भी आप रुकावट डालने वाली राजनीति करते हैं, हर 6 महीने में चुनाव आ जाता है, आचार संहिता लागू हो जाती है, लोगों को विकास का लाभ नहीं मिल पाता और टैक्स देने वालों का पैसा खर्च होता है। यहां, एक बार चुनाव होने के बाद आपको 5 साल तक बिना किसी रुकावट के काम करने का मौका मिलता है। जब चुनाव आयोग को कोई आपत्ति नहीं है, तो विपक्ष इसका विरोध क्यों कर रहा है? शायद पी. चिदंबरम घर पर इतने खाली हैं कि, जैसा कि अंग्रेजी में कहावत है, 'खाली दिमाग शैतान का घर होता है'।"
प्रियंका गांधी के बयान पर शाइना एनसी ने कहा, "प्रियंका गांधी को पता होना चाहिए कि कांग्रेस पार्टी बेरोजगारी के मुद्दे पर बात कर रही है। उनके पास कोई डेटा नहीं है जबकि सरकार के पास पूरा डेटा है। पीएलएफएस डेटा से पता चलता है कि अगर बेरोजगारी कभी सबसे कम रही है, तो वह अभी 5.1% है। जब यह सबसे ज्यादा थी, तो वह यूपीए के शासनकाल में 6 प्रतिशत थी।"
--आईएएनएस
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