राहुल द्रविड़: एक विनम्र खिलाड़ी, जिन्होंने बतौर कोच भारत को दिलाए वर्ल्ड कप खिताब
नई दिल्ली, 10 जनवरी (आईएएनएस)। भारतीय क्रिकेट के महानतम बल्लेबाजों में शुमार राहुल द्रविड़ भारतीय क्रिकेट के आदर्श हैं। 'द वॉल' के नाम से प्रसिद्ध द्रविड़ अपनी मजबूत तकनीक, धैर्य अनुशासन और विनम्र स्वभाव के लिए जाने जाते हैं। बतौर कोच उन्होंने भारतीय क्रिकेट को नई दिशा देते हुए सीनियर टीम के अलावा अंडर-19 टीम को वर्ल्ड कप खिताब जिताने में मदद की।
द्रविड़ की तकनीक और उनके धैर्य ने मुश्किल परिस्थितियों में भारत को जीत दिलाई। बतौर विकेटकीपर भी उनका प्रदर्शन काबिल-ए-तारीफ रहा।
11 जनवरी 1973 को इंदौर में जन्मे राहुल शरद द्रविड़ ने 1990/91 में फर्स्ट क्लास करियर की शुरुआत की, जिसके बाद 1992/93 में लिस्ट ए क्रिकेट खेलना शुरू किया। घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन करते हुए राहुल द्रविड़ ने साल 1996 में अंतरराष्ट्रीय करियर की शुरुआत की।
दाएं हाथ के बल्लेबाज ने 3 अप्रैल 1996 को श्रीलंका के विरुद्ध मुकाबले के साथ वनडे करियर की शुरुआत की, जिसके बाद 20 जून को इंग्लैंड के खिलाफ मैच के साथ टेस्ट करियर शुरू किया। अपनी डेब्यू टेस्ट पारी में राहुल द्रविड़ ने लॉर्ड्स के मैदान पर 95 रन की पारी खेलकर मुकाबला ड्रॉ करवाया।
इसके बाद जनवरी 1997 में जोहान्सबर्ग में साउथ अफ्रीका के विरुद्ध एक ही मुकाबले में 148 और 81 रन बनाए। हालांकि, नवंबर-दिसंबर 1997 में लगातार दो मुकाबले में शतक लगाने से चूक गए। इसके बाद जनवरी 1999 में न्यूजीलैंड के खिलाफ 190 और 103* रन की पारी खेलकर मुकाबला ड्रॉ करवाया।
नवंबर 2000 में दिल्ली में खेले गए टेस्ट मैच में राहुल द्रविड़ के नाबाद दोहरे शतक को शायद ही कोई भूल सके। 200* रन की पारी के बाद द्रविड़ ने 70* रन बनाए थे।
साल 2003 में एडिलेड में, जब भारत ने एक पीढ़ी में पहली बार ऑस्ट्रेलिया में टेस्ट जीता तो उस मुकाबले की दो पारियों में द्रविड़ ने 835 मिनट तक बल्लेबाजी की। इस दौरान उन्होंने 233 और नाबाद 72 रन बनाए और भारत को 4 विकेट से जीता।
पाकिस्तान के खिलाफ अप्रैल 2004 में उन्होंने 12 घंटे क्रीज पर टिककर 270 रन बनाए। उनकी इस पारी की मदद से भारत ने पाकिस्तान में अपनी पहली सीरीज जीती। वनडे फॉर्मेट में 8 नवंबर 1999 को न्यूजीलैंड के खिलाफ 153 रन की पारी शायद ही कोई फैन भूल सके।
राहुल द्रविड़ ने अपने करियर में 164 मैच खेले, जिसमें 52.31 की औसत के साथ 13,288 रन बनाए। इस दौरान 36 शतक और 63 अर्धशतक लगाए। वहीं, 344 वनडे मुकाबलों में द्रविड़ के नाम 12 शतक और 83 अर्धशतक के साथ 10,889 रन दर्ज हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 379 कैच लेने के अलावा, 14 स्टंपिंग भी कीं। उन्होंने फर्स्ट क्लास करियर में 23,794 और लिस्ट-ए करियर में 15,271 रन बनाए।
राहुल द्रविड़ ने अपने करियर में 89 इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) मैच खेले, जिसमें 28.23 की औसत के साथ 2,174 रन बनाए। इस लीग में उनके नाम 11 अर्धशतक दर्ज हैं।
राहुल द्रविड़ ने बतौर कोच अनुशासन, निरंतरता और युवाओं पर भरोसे की मजबूत छाप छोड़ी। उनके कार्यकाल में भारत ने तीनों फॉर्मेट में प्रतिस्पर्धात्मक क्रिकेट खेला, आईसीसी टूर्नामेंट्स में लगातार नॉकआउट तक पहुंचा और टेस्ट में मजबूत बेंच स्ट्रेंथ तैयार की। उन्होंने टी20 विश्व कप 2024 की जीत के साथ भारतीय सीनियर टीम के कोच के तौर पर अपना कार्यकाल समाप्त किया।
अंडर-19 और इंडिया-ए अनुभव का लाभ भारत की सीनियर टीम को मिला, जिससे शुभमन गिल और यशस्वी जायसवाल जैसे खिलाड़ी निखरे। उनका कोचिंग कार्यकाल नतीजों के साथ-साथ दीर्घकालिक सोच के लिए याद किया जाता है। उनकी कोचिंग में भारतीय अंडर-19 टीम ने 2018 अंडर-19 क्रिकेट विश्व कप जीता था, जबकि साल 2016 में यह टीम उपविजेता रही थी।
क्रिकेट में उत्कृष्ट योगदान के लिए राहुल द्रविड़ को साल 1998 में 'अर्जुन पुरस्कार' से सम्मानित किया गया, जिसके बाद वह साल 2004 में 'आईसीसी क्रिकेटर ऑफ द ईयर' और 'टेस्ट क्रिकेटर ऑफ द ईयर' भी चुने गए थे। साल 2004 में उन्हें 'पद्म श्री' और साल 2013 में 'पद्म भूषण' से सम्मानित किया गया।
--आईएएनएस
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