क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक: जयशंकर के निमंत्रण पर भारत पहुंचेंगे अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्री
नई दिल्ली, 22 मई (आईएएनएस)। भारत की अध्यक्षता में 26 मई 2026 को नई दिल्ली में होने वाली ‘क्वाड’ विदेश मंत्रियों की बैठक में ऑस्ट्रेलिया, जापान और अमेरिका के शीर्ष राजनयिक शामिल होंगे। बैठक के दौरान सदस्य देश जुलाई 2025 में वाशिंगटन डीसी में हुई चर्चाओं को आगे बढ़ाते हुए क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर विचार-विमर्श करेंगे।
'क्वाड' विदेश मंत्रियों की इस बैठक में भाग लेने के लिए विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर के निमंत्रण पर ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग, जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी और संयुक्त राज्य अमेरिका के विदेश सचिव मार्को रुबियो नई दिल्ली की आधिकारिक यात्रा करेंगे।
इस बैठक के दौरान मंत्री एक जुलाई 2025 को वाशिंगटन डीसी में हुई चर्चाओं को एक स्वतंत्र और खुले हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए 'क्वाड' के दृष्टिकोण के अनुरूप आगे बढ़ाएंगे। वे प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में क्वाड सहयोग को आगे बढ़ाने पर विचारों का आदान-प्रदान करेंगे। साथ ही क्वाड की चल रही पहलों की प्रगति की समीक्षा करेंगे। साथ ही साथ हिंद-प्रशांत क्षेत्र में हाल के घटनाक्रमों और आपसी चिंता के अन्य अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर विचार-विमर्श करेंगे।
अपनी यात्रा के दौरान, ऑस्ट्रेलिया और जापान के विदेश मंत्रियों के साथ-साथ अमेरिका के विदेश मंत्री के भी, विदेश मंत्री जयशंकर के साथ द्विपक्षीय बैठकें करने की उम्मीद है। इसके अलावा, राष्ट्रीय राजधानी में अपने प्रवास के दौरान वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात करेंगे।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह यात्रा क्वाड साझेदारों के बीच लगातार उच्च-स्तरीय जुड़ाव को दर्शाती है और एक स्वतंत्र, खुला और समावेशी हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए उनके साझा दृष्टिकोण को मजबूत करती है।
क्वाड की यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब हिंद-प्रशांत क्षेत्र की भू-राजनीतिक गतिशीलता लगातार बदल रही है और सदस्य देश साझा क्षेत्रीय तथा वैश्विक चुनौतियों पर सहयोग और समन्वय को गहरा करने का प्रयास कर रहे हैं।
इस बीच, भारत की अपनी यात्रा से पहले, रुबियो ने कहा कि वाशिंगटन नई दिल्ली के साथ ऊर्जा संबंधों का विस्तार करना चाहता है और क्वाड के माध्यम से समन्वय को गहरा करना चाहता है; साथ ही उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ी वैश्विक आपूर्ति बाधाओं के बीच भारत को एक "महान सहयोगी" और "महान साझेदार" बताया।
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