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प्योंगयांग का परमाणु कार्यक्रम बना चिंता का सबब, अमेरिका और दक्षिण कोरिया ने निरस्त्रीकरण पर दिया जोर

प्योंगयांग का परमाणु कार्यक्रम बना चिंता का सबब, अमेरिका और दक्षिण कोरिया ने निरस्त्रीकरण पर दिया जोर
प्योंगयांग का परमाणु कार्यक्रम बना चिंता का सबब, अमेरिका और दक्षिण कोरिया ने निरस्त्रीकरण पर दिया जोर

सोल, 29 अक्टूबर (आईएएनएस)। उत्तर कोरिया के परमाणु निरस्त्रीकरण को दक्षिण कोरिया, अमेरिका और उनके सहयोगी देशों ने जरूरी बताया है। इन देशों ने प्योंगयांग के परमाणु हथियारों और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रमों के लिए धन जुटाने के प्रयासों को रोकने के उद्देश्य से लगाए गए नए प्रतिबंधों का समर्थन करते हुए संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंधों को पूरी तरह लागू करने की अपील की है।

योनहाप समाचार एजेंसी ने गुरुवार को बताया कि, बुधवार को जारी संयुक्त बयान में 11 देशों और यूरोपीय संघ (ईयू) ने अक्टूबर में अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और ईयू की ओर से उत्तर कोरिया पर लगाए गए प्रतिबंधों का स्वागत किया। इन प्रतिबंधों का उद्देश्य उत्तर कोरिया के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों के वित्तपोषण के स्रोतों को बाधित करना है।

संयुक्त बयान जारी करने वाले देशों में दक्षिण कोरिया, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, नीदरलैंड, न्यूजीलैंड और ब्रिटेन शामिल हैं। बयान में उत्तर कोरिया के आधिकारिक नाम डेमोक्रेटिक पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ कोरिया (डीपीआरके) का इस्तेमाल करते हुए उसके पूर्ण, सत्यापन योग्य और अपरिवर्तनीय परमाणु निरस्त्रीकरण के लक्ष्य को दोहराया गया।

इन देशों ने संयुक्त राष्ट्र के सभी सदस्य देशों, विशेष रूप से सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्यों से उत्तर कोरिया पर लागू प्रतिबंधों से जुड़े प्रस्तावों को पूरी तरह लागू करने का आग्रह किया।

संयुक्त बयान में बहुपक्षीय प्रतिबंध निगरानी दल (एमएसएमटी) की रिपोर्टों का भी उल्लेख किया गया। इन रिपोर्टों में उत्तर कोरिया और रूस के बीच सैन्य सहयोग, साइबर गतिविधियों के जरिए संचालित सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) कर्मियों की योजनाओं तथा विदेशों में उत्तर कोरियाई श्रमिकों के संचालन से जुड़े मामलों को उजागर किया गया है।

एमएसएमटी का गठन अप्रैल 2024 में संयुक्त राष्ट्र के उस विशेषज्ञ पैनल का कार्यकाल बढ़ाने संबंधी प्रस्ताव पर रूस के वीटो के बाद किया गया था, जो उत्तर कोरिया पर लगाए गए प्रतिबंधों के क्रियान्वयन की निगरानी करता था। नए निगरानी दल में 11 देश शामिल हैं।

इस बीच, अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने बुधवार को उत्तर कोरिया के आईटी कर्मियों से जुड़ी कथित अवैध गतिविधियों के खिलाफ नए प्रतिबंधों की घोषणा की। मंत्रालय के अनुसार, 10 व्यक्तियों और एक इकाई पर कार्रवाई की गई है। इन पर अमेरिकी कंपनियों को निशाना बनाने वाली योजनाओं के जरिए उत्तर कोरिया के लिए अवैध राजस्व जुटाने में मदद करने का आरोप है।

अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि उत्तर कोरियाई आईटी कर्मी अपनी पहचान छिपाकर विदेशी कंपनियों में काम हासिल करते हैं और उनकी कमाई का बड़ा हिस्सा प्योंगयांग के हथियार कार्यक्रमों के वित्तपोषण में इस्तेमाल किया जा सकता है। प्रतिबंधों का उद्देश्य ऐसे नेटवर्कों को वित्तीय सहायता और अंतरराष्ट्रीय कारोबारी पहुंच से वंचित करना है।

उत्तर कोरिया के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम लंबे समय से क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए चिंता का विषय बने हुए हैं। अमेरिका, दक्षिण कोरिया और जापान इन कार्यक्रमों पर रोक लगाने के लिए आपसी समन्वय बढ़ाते रहे हैं। हालांकि, वाशिंगटन ने प्योंगयांग के साथ कूटनीतिक बातचीत की संभावना भी खुली रखी है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन के साथ बातचीत दोबारा शुरू करने में रुचि दिखाई है। लेकिन पिछले दौर की वार्ताओं में परमाणु निरस्त्रीकरण की शर्तों पर सहमति नहीं बन सकी थी। ऐसे में नए प्रतिबंधों और कूटनीतिक प्रयासों के बीच संतुलन बनाना अमेरिका तथा उसके सहयोगियों के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।

संयुक्त बयान से स्पष्ट है कि दक्षिण कोरिया, अमेरिका और उनके साझेदार उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम को लेकर साझा रुख बनाए रखना चाहते हैं। साथ ही, वे प्रतिबंधों के प्रभावी क्रियान्वयन और अवैध वित्तीय नेटवर्कों पर कार्रवाई को प्योंगयांग के हथियार कार्यक्रमों पर दबाव बढ़ाने के प्रमुख उपायों के रूप में देख रहे हैं।

--आईएएनएस

केआर/

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