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पंजाब: परविंदर झोटा के अंतिम संस्कार में देरी, परिवार और प्रशासन के बीच नहीं बनी सहमति, मानसा में जारी धरना

पंजाब: परविंदर झोटा के अंतिम संस्कार में देरी, परिवार और प्रशासन के बीच नहीं बनी सहमति, मानसा में जारी धरना
पंजाब: परविंदर झोटा के अंतिम संस्कार में देरी, परिवार और प्रशासन के बीच नहीं बनी सहमति, मानसा में जारी धरना

मानसा, 16 अक्टूबर (आईएएनएस)। पंजाब के एंटी-ड्रग एक्टिविस्ट परविंदर सिंह झोटा की हत्या के बाद उनके परिजनों और जिला प्रशासन के बीच बैठक में मांगों पर सहमति नहीं बनी है। परिजन मामले की सीबीआई जांच और मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग पर अड़े हैं। मांगें नहीं माने जाने के कारण परविंदर सिंह के परिजन और उनके समर्थनों का मानसा में धरना जारी है।

परविंदर सिंह के समर्थक और परिजन मानसा के सिविल अस्पताल के बाहर धरना दे रहे हैं। मानसा डिप्टी कमिश्नर की रेजिडेंसी के पास तिकोनी चौक पर भी धरना प्रदर्शन जारी है।

परविंदर को इंसाफ के लिए बनाई गई कमेटी की मांग है कि मामले की सीबीआई से जांच कराई जाए और पोस्टमार्टम पीजीआई के डॉक्टरों के पैनल की टीम से करवाया जाए। इंसाफ कमेटी ने शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी से मांग की है कि परविंदर सिंह को शहीद का दर्जा दिया जाए। वहीं, परविंदर की ओर से बनाई गई एंटी ड्रग टास्क फोर्स टीम के सदस्यों की मांग है कि जहां पर कत्ल किया गया, वहां दुकान के पास परविंदर सिंह की प्रतिमा लगाई जाए।

एक्टिविस्ट अवतार सिंह ने आईएएनएस से कहा, "चौथे दिन धरना शुरू हो चुका है। कमेटी की मांग है कि राज्य के मुख्यमंत्री और डीजीपी को अपने पदों से इस्तीफा देना चाहिए, लेकिन अभी तक कोई इस्तीफा नहीं हुआ है। इस्तीफा होने के बाद ही परविंदर सिंह का अंतिम संस्कार किया जाएगा।"

उधर, शुक्रवार को परविंदर सिंह के समर्थन में तिकोनी चौक पर जारी धरना प्रदर्शन में श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार कुलदीप सिंह गढ़गाज शामिल हैं। उन्होंने कहा, "नशा धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं करता। जो कोई भी नशे की लत का शिकार होता है, वह प्रभावित होता है और 'चिट्टा' एक बहुत बड़ी समस्या है।"

जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गढ़गाज ने कहा, "परविंदर सिंह की आवाज हर घर तक पहुंच रही थी, जिसमें वे लोगों से अपने बच्चों को मेडिकल और सिंथेटिक नशीले पदार्थों से बचाने की अपील कर रहे थे। उनके परिवार ने मुझे बताया कि नशीले पदार्थों की सप्लाई करने वाले दुकानदार के यहां कई बार छापेमारी हुई और नशीले पदार्थ जब्त भी किए गए, फिर भी वह उन्हें बेचना जारी रखते थे। परिवार का कहना था कि परविंदर सिंह छह-सात दिनों से इस मुद्दे को उठा रहे थे, लेकिन सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की। अब परविंदर सिंह को गोली का शिकार बनाया गया।"

उन्होंने कहा कि पंजाब में नशा लगातार बढ़ रहा है। नौजवान नशे की वजह से अपनी जान से हाथ धो रहे हैं। उन्होंने कहा कि नशे के खिलाफ जंग लड़ने वाले परविंदर सिंह नौजवानों को बचाते हुए शहीद हुए हैं। उन्होंने कहा कि नशे को खत्म करने के लिए सभी को एकजुट होना चाहिए।

--आईएएनएस

डीसीएस/

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