पंजाब के मोस्ट वांटेड गैंगस्टर गुरविंदर उर्फ अफरीदी को इथियोपिया से लाया गया भारत, 10 महीने से थी तलाश
चंडीगढ़, 8 नवंबर (आईएएनएस)। पंजाब पुलिस को गैंगस्टर नेटवर्क के खिलाफ बड़ी कामयाबी मिली है। पुलिस की एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स (एजीटीएफ) ने केंद्रीय एजेंसियों की मदद से डोनी बाल-प्रभ दासूवाल गैंग के प्रमुख सरगना गुरविंदर उर्फ अफरीदी को इथियोपिया से भारत डिपोर्ट कराया है।
उसे पकड़ने के लिए पिछले 10 महीने से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अभियान चलाया जा रहा था। पंजाब पुलिस ने इस कार्रवाई को 'ऑपरेशन शहीद' नाम दिया था।
पंजाब पुलिस के डीजीपी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर बताया कि इस अभियान में एजीटीएफ के साथ काउंटर इंटेलिजेंस पंजाब की ओवरसीज फ्यूजिटिव ट्रैकिंग एंड एक्सट्राडिशन सेल और केंद्रीय एजेंसियां शामिल थीं। कई देशों में खुफिया जानकारी जुटाने, निगरानी करने और आरोपी की लोकेशन ट्रैक करने के बाद उसे इथियोपिया से भारत लाने में सफलता मिली।
पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया है कि गुरविंदर उर्फ अफरीदी विदेश में रहकर पंजाब में टारगेट किलिंग, रंगदारी के लिए फायरिंग और संगठित आपराधिक गतिविधियों को संचालित कर रहा था। उसकी गिरफ्तारी में मददगार सूचना देने वाले व्यक्ति के लिए पंजाब सरकार ने 5 लाख रुपए का इनाम भी घोषित किया था।
इस ऑपरेशन के तहत एशिया, दक्षिण अमेरिका और अफ्रीका के कई देशों में लगातार खुफिया जानकारी जुटाई गई और निगरानी रखी गई। पंजाब पुलिस ने इस अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई में सहयोग के लिए विदेश मंत्रालय और अन्य केंद्रीय एजेंसियों का आभार जताया है। पुलिस का कहना है कि राज्य में गैंगस्टर नेटवर्क को खत्म करने, संगठित अपराध रोकने और शांति-सुरक्षा बनाए रखने के लिए अभियान जारी रहेगा।
इससे पहले 3 नवंबर को पंजाब पुलिस ने अवैध हथियारों और नशीले पदार्थों की तस्करी करने वाले तीन अलग-अलग नेटवर्क का पर्दाफाश किया था। इस कार्रवाई में 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। उनके कब्जे से 12 अवैध पिस्टल, दो हैंड ग्रेनेड, 310.10 ग्राम हेरोइन और 33 कारतूस बरामद किए गए थे।
डीजीपी की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, शुरुआती जांच में पता चला था कि आरोपी विदेश में बैठे अपने हैंडलरों और गैंगस्टरों के संपर्क में थे। इन्हीं की मदद से ड्रोन के जरिए पंजाब में अवैध हथियारों और नशीले पदार्थों की खेप भेजी जाती थी। बाद में इनकी सप्लाई आपराधिक गतिविधियों में शामिल लोगों तक पहुंचाई जाती थी।
जांच में यह भी सामने आया था कि आरोपी हथियारों के दम पर लोगों को डराते-धमकाते थे। रंगदारी वसूलने के लिए घरों और दुकानों पर फायरिंग कर इलाके में दहशत फैलाई जाती थी, ताकि लोग डरकर उनकी मांगें मानने को मजबूर हो जाएं।
--आईएएनएस
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