पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने किया स्वीकारः अंशुल छत्रपति
सिरसा, 11 अगस्त (आईएएनएस)। पत्रकार अंशुल छत्रपति ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने राम चंद्र छत्रपति हत्याकांड में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ एक स्पेशल लीव पिटीशन दाखिल की है। इस पिटीशन को सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार कर ली है और गुरमीत राम रहीम सिंह व अन्य लोगों को नोटिस जारी किए हैं।
राम चंद्र छत्रपति के बेटे अंशुल प्रजापति ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, "हाई कोर्ट ने मेरे पिता के हत्या के आरोप से गुरमीत राम रहीम को बरी कर दिया है, जबकि 3 सह आरोपियों की सजा बरकार रखी है। इसी फैसले के खिलाफ मैंने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है। 10 अगस्त को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के तीन जजों की पीठ ने इस मामले को सुना और डेरा प्रमुख राम रहीम सहित अन्य जिम्मेदारों को नोटिस जारी किया है। इसके साथ ही मेरी अपील को कोर्ट ने स्वीकार लिया है। इस मामले को नवंबर में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है। यह हमारे लिए राहत की बात है।"
अंशुल प्रजापति ने कहा, "मेरी याचिका का सुप्रीम कोर्ट में राम रहीम के वकीलों की ओर से विरोध किया गया। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के बेंच ने विरोध को दरकिनार करते हुए, मेरी अपील को स्वीकार किया। अब सुप्रीम कोर्ट में हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ लड़ाई लड़ेंगे।"
अंशुल ने कहा, "पंचकूला की सीबीआई अदालत ने गुरमीत राम रहीम और तीन आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इस सजा के खिलाफ आरोपियों के अपील पर हाई कोर्ट ने 7 मार्च 2026 को जो फैसला सुनाया था, उससे हम संतुष्ट नहीं है।"
बता दें कि अक्टूबर 2002 में छत्रपति को उनके घर के बाहर मोटरसाइकिल सवार हमलावरों ने गोली मार दी थी। इलाज के दौरान 21 नवंबर 2002 को उनकी मृत्यु हो गई थी। छत्रपति की हत्या के मामले में पंचकूला की विशेष सीबीआई अदालत ने जनवरी 2019 में राम रहीम और कुलदीप सिंह, निर्मल सिंह और कृष्ण लाल को आजीवन कारावास (उम्रकैद) की सजा सुनाई थी। बाद में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने राम रहीम को बरी कर दिया था।
--आईएएनएस
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