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पुणे में जहरीली शराब से 12 से ज्यादा लोगों की मौत, परिजनों ने सरकार से शराबबंदी की मांग की

पुणे, 29 मई (आईएएनएस)। पुणे के पिंपरी-चिंचवड इलाके में जहरीली शराब पीने की वजह से 12 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई। इस घटना ने पूरे इलाके में दहशत और गुस्से का माहौल पैदा कर दिया है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, कई लोग शराब पीने के बाद अचानक बीमार पड़ने लगे और फिर एक के बाद एक मौतों का सिलसिला शुरू हो गया।
पुणे में जहरीली शराब से 12 से ज्यादा लोगों की मौत, परिजनों ने सरकार से शराबबंदी की मांग की

पुणे, 29 मई (आईएएनएस)। पुणे के पिंपरी-चिंचवड इलाके में जहरीली शराब पीने की वजह से 12 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई। इस घटना ने पूरे इलाके में दहशत और गुस्से का माहौल पैदा कर दिया है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, कई लोग शराब पीने के बाद अचानक बीमार पड़ने लगे और फिर एक के बाद एक मौतों का सिलसिला शुरू हो गया।

पुलिस ने इस मामले में तेजी से कार्रवाई करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनकी पहचान योगेश वानखेड़े, राधेश्याम प्रजापति, मिरका सिंह और गुरु मंगल सिंह के रूप में हुई है। सभी आरोपियों को पिंपरी कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें 8 जून तक पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि आखिर यह जहरीली शराब कहां से आई और इसमें कौन-कौन शामिल हैं।

मृतक के परिवार का एक सदस्य ने आईएएनएस से बातचीत में बताया, "उनके रिश्तेदार बाबा शेख और उनका दोस्त अकबर पठान अक्सर साथ बैठकर शराब पीते थे। परिवार को इस बात की जानकारी नहीं थी कि उनकी हालत इतनी गंभीर हो सकती है। जब बाबा शेख को तबीयत खराब हुई तो उन्हें लगा कि शायद यह सामान्य बीमारी होगी, लेकिन अस्पताल ले जाने पर पता चला कि उन्होंने बहुत ज्यादा शराब पी थी और उनके पेट से लगभग एक लीटर शराब निकाली गई। डॉक्टरों ने भी शुरुआत में कुछ और कारण बताया, जिससे परिवार और भी उलझन में था। धीरे-धीरे हालात बिगड़ते गए और बाबा शेख की मौत हो गई।

उन्होंने बताया कि परिवार को पहले लगा कि यह प्राकृतिक मौत हो सकती है, लेकिन अगले ही दिन जब अकबर पठान की भी तबीयत उसी तरह बिगड़ी, तो शक गहराने लगा। दोनों की हालत लगभग एक जैसी थी। मुंह से झाग आ रहा था। फिर जानकारी मिली कि फुगीवाड़ी इलाके में ही करीब 10 से 12 लोगों की जान इसी तरह गई है।

उनका कहना है कि इस दर्दनाक घटना ने कई परिवारों को पूरी तरह तोड़ दिया है। जिन घरों में कमाने वाले लोग थे, वहां अब सिर्फ रोना और सन्नाटा है। सबसे बड़ी चिंता छोटे बच्चों के भविष्य को लेकर है, जिनके सिर से पिता का साया उठ गया है। परिवारों का कहना है कि प्रशासन को अब सिर्फ जांच ही नहीं करनी चाहिए, बल्कि सख्त कदम उठाने चाहिए ताकि इस तरह का धंधा हमेशा के लिए बंद हो सके।

वहीं, एक स्थानीय महिला, उषा साठे, ने कहा, "हमारी छोटी सी बस्ती में इतनी बड़ी त्रासदी हो गई है, हम किसके आंसू पोंछें? सरकार ने यह होने दिया और इसे ऐसे ही छोड़ दिया। प्रशासन को इस पर रोक लगानी चाहिए। शराब ही इन सबका कारण है। शराब सबका घर बर्बाद कर रही है। इस पर प्रतिबंध लगना चाहिए।"

--आईएएनएस

पीआईएम/डीकेपी

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