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पुणे में एमडी ड्रग्स लैब की खबरों का सीबीएन ने किया खंडन, कहा- केवल उपकरण हुए थे बरामद

पुणे में एमडी ड्रग्स लैब की खबरों का सीबीएन ने किया खंडन, कहा- केवल उपकरण हुए थे बरामद
पुणे में एमडी ड्रग्स लैब की खबरों का सीबीएन ने किया खंडन, कहा- केवल उपकरण हुए थे बरामद

पुणे, 14 जुलाई (आईएएनएस)। पुणे के दिघी-भोसरी क्षेत्र में कथित तौर पर हाईटेक एमडी (मेफेड्रोन) ड्रग्स लैब संचालित होने की खबरों पर केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो ने स्पष्टीकरण जारी करते हुए इन दावों का खंडन किया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि पुणे में एमडी बनाने वाली कोई सक्रिय प्रयोगशाला नहीं पाई गई थी और इस संबंध में प्रसारित कुछ खबरें तथ्यों पर आधारित नहीं हैं।

सीबीएन, नीमच (मध्य प्रदेश) की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, यह मामला फरवरी 2026 में चलाए गए ‘ऑपरेशन वज्र’ से जुड़ा हुआ है। इस अभियान के तहत सबसे पहले मध्य प्रदेश के मंदसौर में छापेमारी कर 8.17 किलोग्राम मेफेड्रोन बरामद किया गया था।

जांच आगे बढ़ने पर अधिकारियों ने महू (मध्य प्रदेश) में कार्रवाई करते हुए 43.82 किलोग्राम मेफेड्रोन, 261.32 किलोग्राम प्रीकर्सर केमिकल्स तथा ड्रग्स निर्माण में इस्तेमाल होने वाले उपकरण जब्त किए थे।

जांच के दौरान यह भी पता चला कि इस पूरे नेटवर्क का मुख्य आरोपी राजस्थान के जोधपुर का रहने वाला है और वहीं पर मेफेड्रोन निर्माण की लैब संचालित कर रहा था। आरोपी ने एमडी ड्रग्स बनाने में इस्तेमाल होने वाले कुछ उपकरण पुणे में अपने एक रिश्तेदार के घर पर छिपाकर रखे थे।

इस जानकारी के आधार पर सीबीएन ने जोधपुर और पुणे में एक साथ छापेमारी की। पुणे के दिघी इलाके में कार्रवाई के दौरान अधिकारियों ने ड्रग्स निर्माण में इस्तेमाल होने वाले उपकरण बरामद किए, जिन्हें सीलबंद बक्सों में रखा गया था।

सीबीएन की जांच में यह भी सामने आया कि जिन रिश्तेदारों के घर ये उपकरण रखे गए थे, उन्हें इनके वास्तविक उपयोग या उद्देश्य की कोई जानकारी नहीं थी। इसी कारण पुणे से किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी नहीं की गई।

विभाग ने प्रेस नोट जारी कर स्पष्ट किया है कि पुणे (दिघी) में कोई कार्यशील या हाईटेक एमडी उत्पादन प्रयोगशाला नहीं मिली थी। वहां से केवल उपकरण बरामद हुए थे, जिन्हें मुख्य आरोपी ने छिपाकर रखा था।

सीबीएन ने कहा कि पुणे में एमडी ड्रग्स का उत्पादन शुरू होने या सक्रिय ड्रग्स लैब संचालित होने संबंधी खबरें भ्रामक हैं और इससे आम जनता के बीच गलतफहमी पैदा हो सकती है। विभाग ने लोगों से अपुष्ट जानकारी पर विश्वास न करने और केवल आधिकारिक स्रोतों से प्राप्त जानकारी को ही सही मानने की अपील की है।

--आईएएनएस

एएमटी/डीकेपी

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