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पुणे में अवैध निर्माणों पर बुलडोजर कार्रवाई, मस्जिद गिराए जाने पर स्थानीय लोगों में नाराजगी

पुणे, 10 जून (आईएएनएस)। महाराष्ट्र के पुणे शहर में अवैध निर्माणों पर नगर निगम की बड़ी कार्रवाई के बाद विवाद गहरा गया है। नगर निगम ने कुडलवाड़ी क्षेत्र में बुलडोजर चलाकर 11 निर्माणों को ध्वस्त कर दिया, जिनमें कुछ मंदिर और मस्जिदें भी शामिल थीं। इस कार्रवाई के बाद स्थानीय लोगों और मुस्लिम समुदाय के कुछ प्रतिनिधियों ने नाराजगी जताते हुए प्रशासन के फैसले पर सवाल उठाए हैं।
पुणे में अवैध निर्माणों पर बुलडोजर कार्रवाई, मस्जिद गिराए जाने पर स्थानीय लोगों में नाराजगी

पुणे, 10 जून (आईएएनएस)। महाराष्ट्र के पुणे शहर में अवैध निर्माणों पर नगर निगम की बड़ी कार्रवाई के बाद विवाद गहरा गया है। नगर निगम ने कुडलवाड़ी क्षेत्र में बुलडोजर चलाकर 11 निर्माणों को ध्वस्त कर दिया, जिनमें कुछ मंदिर और मस्जिदें भी शामिल थीं। इस कार्रवाई के बाद स्थानीय लोगों और मुस्लिम समुदाय के कुछ प्रतिनिधियों ने नाराजगी जताते हुए प्रशासन के फैसले पर सवाल उठाए हैं।

एक स्थानीय निवासी ने आईएएनएस से कहा कि उन्हें कई वर्षों से परेशान किया जा रहा है। उनका आरोप है कि पहले इलाके का बाजार तोड़ा गया और अब मस्जिद को भी ध्वस्त कर दिया गया।

उन्होंने दावा किया कि उन्हें अदालत से स्टे ऑर्डर मिलने वाला था, लेकिन उससे पहले ही कार्रवाई कर दी गई। उन्होंने कहा कि लगातार दबाव बनाया जा रहा है और लोगों को परेशान किया जा रहा है। साथ ही प्रशासन से न्याय की उम्मीद भी जताई।

सामाजिक कार्यकर्ता राजन नायर ने आरोप लगाया कि प्रशासन जानबूझकर एक खास समुदाय को निशाना बना रहा है। उन्होंने कहा कि निर्माण को अवैध बताकर तोड़ा जा रहा है, लेकिन इसके पीछे की वजह स्पष्ट नहीं की जा रही।

वहीं, इमाम इरशाद यूनुस अंसारी ने कहा कि वह पिछले 26 वर्षों से इस मस्जिद से जुड़े हुए हैं। यहां बड़ी संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोग पांच वक्त की नमाज अदा करते थे। उन्होंने कहा कि मस्जिद केवल इबादत की जगह नहीं होती, बल्कि लोगों को इंसानियत और आपसी भाईचारे का संदेश भी देती है। उन्होंने मस्जिद को तोड़े जाने की कार्रवाई को पूरी तरह गलत बताया।

एक मौलाना ने कहा कि जिस भवन को तोड़ा गया, वह पिछले 30 से 35 वर्षों से मौजूद था और उसी समय से वहां नमाज अदा की जा रही थी। उन्होंने बताया कि संबंधित भवन का नियमित रूप से टैक्स भी जमा किया जाता था। उन्होंने सरकार से मांग की कि यदि निर्माण को तोड़ा गया है तो उसकी स्पष्ट और ठोस वजह जनता के सामने रखी जाए। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले एक वर्ष से बाहरी लोगों को परेशान किया जा रहा है और उन पर क्षेत्र छोड़ने के लिए दबाव बनाया जा रहा है।

--आईएएनएस

वीकेयू/एबीएम

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