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खजूर के प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन को बढ़ावा, एसकेआरएयू को मिला नया प्रोजेक्ट

खजूर के प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन को बढ़ावा, एसकेआरएयू को मिला नया प्रोजेक्ट

राजस्थान में खजूर की खेती को बढ़ावा देने और उससे जुड़े किसानों की आय में वृद्धि करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। खजूर के प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन के लिए स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय (एसकेआरएयू) को एक नए प्रोजेक्ट की स्वीकृति मिली है। इस परियोजना के माध्यम से खजूर से विभिन्न मूल्यवर्धित उत्पाद तैयार करने और उसकी बाजार संभावनाओं को बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

कृषि विश्वविद्यालय के अधिकारियों के अनुसार इस प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य खजूर के उत्पादन के साथ-साथ उसके प्रसंस्करण की आधुनिक तकनीकों को विकसित करना है, ताकि किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिल सके। अभी तक अधिकांश किसान खजूर को कच्चे रूप में ही बाजार में बेच देते हैं, जिससे उन्हें सीमित लाभ मिलता है। इस प्रोजेक्ट के जरिए खजूर से कई प्रकार के खाद्य उत्पाद तैयार किए जाने की संभावनाओं पर शोध किया जाएगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि खजूर पोषण के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण फल है। इसमें प्राकृतिक शर्करा, फाइबर, विटामिन और खनिज तत्व प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। अगर इसके प्रसंस्करण और पैकेजिंग की बेहतर व्यवस्था विकसित की जाए तो इससे कई तरह के उत्पाद जैसे खजूर पाउडर, सिरप, मिठाइयां, हेल्थ ड्रिंक्स और अन्य खाद्य पदार्थ तैयार किए जा सकते हैं।

इस परियोजना के तहत विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक खजूर की गुणवत्ता सुधार, भंडारण तकनीक, प्रसंस्करण और पैकेजिंग के विभिन्न पहलुओं पर शोध करेंगे। साथ ही किसानों को प्रशिक्षण भी दिया जाएगा, ताकि वे आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर अपनी उपज से अधिक लाभ प्राप्त कर सकें।

राजस्थान के पश्चिमी इलाकों, विशेष रूप से श्रीगंगानगर, बीकानेर और जैसलमेर जैसे जिलों में खजूर की खेती तेजी से बढ़ रही है। यहां की जलवायु खजूर की खेती के लिए अनुकूल मानी जाती है। ऐसे में अगर प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन की बेहतर व्यवस्था विकसित हो जाती है तो यह क्षेत्र खजूर उत्पादन और उससे जुड़े उद्योगों का प्रमुख केंद्र बन सकता है।

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार इस तरह की परियोजनाएं न केवल किसानों की आय बढ़ाने में मदद करती हैं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा करती हैं। खजूर आधारित उद्योगों के विकास से स्थानीय स्तर पर छोटे और मध्यम उद्योगों को भी बढ़ावा मिल सकता है।

विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि इस प्रोजेक्ट के सफल क्रियान्वयन से खजूर के उत्पादन और प्रसंस्करण के क्षेत्र में नई संभावनाएं खुलेंगी। साथ ही किसानों को अपनी फसल का बेहतर दाम मिलने के साथ-साथ बाजार में इसकी मांग भी बढ़ेगी।

कुल मिलाकर यह परियोजना राजस्थान में खजूर की खेती को नई दिशा देने के साथ-साथ किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। आने वाले समय में इससे खजूर से जुड़े उत्पादों के क्षेत्र में भी नई पहचान बनने की उम्मीद है।

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