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लंबे समय तक अकेले रहना युवा वयस्कों के स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह

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युवा वयस्कों के बीच लंबे समय तक सिंगल (अकेले) रहने का चलन बढ़ रहा है और नया शोध इस बात का संकेत देता है कि यह उनके स्वास्थ्य और समग्र जीवन‑संतुष्टि पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। शोध के अनुसार, जो युवा लंबे समय तक बिना किसी शाब्दिक रिश्ते में रहते हैं, उनमें एकाकीपन, जीवन की संतुष्टि में गिरावट और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएँ अधिक पाई जाती हैं।

आकड़े बताते हैं कि आज की पीढ़ी के युवा, विशेष रूप से जिनका जन्म 1997 से 2012 के बीच हुआ है (Gen Z), पहले की पीढ़ियों की तुलना में रोमांटिक रिश्तों में कम शामिल हुए हैं। उदाहरण के लिए, 2023 के एक पोल में यह पाया गया कि Gen Z‑युवाओं में किशोरावस्था के दौरान रिश्तों का अनुभव पिछली पीढ़ियों — Gen X और Baby Boomers — की तुलना में काफी कम रहा।

स्विट्ज़रलैंड के यूनिवर्सिटी ऑफ़ ज्यूरिख के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए एक बड़े विश्लेषण में 16 से 29 वर्ष के लगभग 17,000 लोगों का डाटा शामिल था। इस अध्ययन से पता चला कि जो युवा वयस्क लंबे समय तक सिंगल रहते हैं, उनमें एकाकीपन की भावना बढ़ती है और जीवन की संतुष्टि धीरे‑धीरे कम होती है— खासकर 20 के दशक के अंत में।

पहला रिश्ता: क्यों महत्वपूर्ण है?

शोध में यह भी स्पष्ट हुआ कि कई युवा जब अपने पहले रोमांटिक रिश्ते में प्रवेश करते हैं, तो वे न केवल अल्पकालिक बल्कि दीर्घकालिक रूप से भी आत्म‑संतुष्टि और खुशहाली में बेहतरी महसूस करते हैं। पहली बार किसी रोमांटिक साझेदारी में आने वाले युवा लोग खुद को कम अकेला, कम तनावग्रस्त और जीवन से संतुष्ट महसूस करते हैं। वहीं, जिन लोगों ने देर से पहला रिश्ता शुरू किया या अब तक नहीं किया, उनमें अकेलेपन की भावनाएँ और जीवन‑संतुष्टि का अभाव अधिक गहरा पाया गया।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह सिर्फ रोमांस नहीं है, बल्कि सामाजिक संबंधों और भावनात्मक समर्थन का अनुभव जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाता है। यद्यपि एक रिश्ते में होना स्वास्थ्य के लिए एक आवश्यक शर्त नहीं है, परंतु यह निश्चित रूप से अकेले रहने की तुलना में कई मानसिक और भावनात्मक लाभ प्रदान करता है।

एकाकीपन का स्वास्थ्य पर प्रभाव

एकाकीपन सिर्फ भावनात्मक समस्या नहीं है—यह शारीरिक स्वास्थ्य को भी प्रभावित कर सकता है। शोध के अन्य साक्ष्यों के अनुसार, अकेले जीवन जीने से तनाव हार्मोन (जैसे कोर्टिसोल) का स्तर बढ़ सकता है, जिससे हृदय रोग, उच्च रक्तचाप, इम्यून सिस्टम की कमजोरी तथा गंभीर मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है।

क्लिवलैंड क्लिनिक जैसी प्रतिष्ठित स्वास्थ्य संस्थाएँ यह भी मानती हैं कि लगातार अकेलापन शरीर पर तनाव के समान प्रभाव डालता है, जिससे व्यक्ति को स्वयं‑देखभाल (self‑care) की आदतें कम हो सकती हैं और दीर्घकालिक बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।

क्या बदल रहा है समाज का नजरिया?

समाज अब पारंपरिक रिश्तों से हटकर अधिक स्वतंत्रता और व्यक्तिगत विकास को महत्व दे रहा है। युवा अपनी पढ़ाई, करियर और व्यक्तिगत पहचान को प्राथमिकता दे रहे हैं — जो रिश्तों को बाद में शुरू करने का कारण बनता है। लेकिन शोध यह स्पष्ट करता है कि बहुत लंबे समय तक अकेले रहना स्वास्थ्य और मानसिक संतुलन पर कुछ चुनौतियाँ ला सकता है।

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