भागलपुर में सोना-चांदी से बनी आयुर्वेदिक दवाओं की कीमतें 70% से अधिक बढ़ीं, मरीजों को परेशानी
भागलपुर में स्वर्ण और चांदी भस्म से बनी आयुर्वेदिक दवाओं की कीमतों में हाल ही में 70% से अधिक की वृद्धि देखी गई है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस महंगाई का मुख्य कारण सोने और चांदी के बाजार में अचानक और अप्रत्याशित वृद्धि है।
स्थानीय आयुर्वेदिक फार्मासिस्टों ने बताया कि पिछले कुछ महीनों में सोना और चांदी के दाम लगातार बढ़ रहे हैं, जिसके कारण आयुर्वेदिक दवाओं में इस्तेमाल होने वाले इन कीमती धातुओं का मूल्य भी बढ़ा है। इसका सीधा असर मरीजों पर पड़ा है, जो अब इन दवाओं को खरीदने में कठिनाई महसूस कर रहे हैं। कई मरीज अब केवल आवश्यक मात्रा ही खरीद पा रहे हैं या फिर पूरी दवा खरीदने से कतरा रहे हैं।
इन आयुर्वेदिक दवाओं का उपयोग कई गंभीर रोगों जैसे हृदय रोग, मानसिक तनाव, शारीरिक कमजोरी और अन्य दीर्घकालिक बीमारियों के उपचार में किया जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि दवा की बढ़ती कीमतें न केवल मरीजों की आर्थिक स्थिति पर असर डाल रही हैं, बल्कि उनके स्वास्थ्य और नियमित उपचार पर भी प्रभाव डाल सकती हैं।
मरीजों और उनके परिजनों ने कहा कि दवाओं की बढ़ती कीमतों ने उन्हें परेशान कर दिया है। उन्होंने बताया कि पहले औसतन 500 रुपये में मिलने वाली दवा अब 1500 रुपये या उससे अधिक की हो गई है। वृद्ध और कम आय वाले परिवार के लिए यह बड़ी चुनौती बन गई है।
आयुर्वेद विशेषज्ञ और चिकित्सक भी इस बढ़ोतरी से चिंतित हैं। उनका कहना है कि यदि मरीज दवाओं को कम मात्रा में लें या नियमित सेवन न कर पाएं, तो रोग का उपचार प्रभावित हो सकता है। उन्होंने सरकार और संबंधित विभागों से अपील की है कि इस प्रकार की कीमती आयुर्वेदिक दवाओं पर नियमन और आवश्यक सहायता प्रदान की जाए।
फार्मासिस्ट और दुकानदारों ने बताया कि सोने और चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण दवा निर्माण कंपनियों के लिए उत्पादन लागत बढ़ गई है। कई कंपनियां अपने उत्पादों की कीमतें बढ़ाने पर मजबूर हो गई हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर दवा की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं, तो गरीब और मध्यम वर्ग के मरीजों के लिए उपचार मुश्किल और खर्चीला हो जाएगा। उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार को आयुर्वेदिक दवाओं को सस्ती और उपलब्ध कराने की योजना पर ध्यान देना चाहिए।
भागलपुर में मरीज और डॉक्टर दोनों ही स्थिति से चिंतित हैं। कई मरीज अब निजी क्लिनिक या बड़े अस्पतालों के बजाय छोटे और सस्ते विकल्प तलाशने पर मजबूर हो गए हैं।
इस तरह, भागलपुर में सोना-चांदी से बनी आयुर्वेदिक दवाओं की बढ़ती महंगाई ने न केवल मरीजों की आर्थिक स्थिति को प्रभावित किया है, बल्कि उनके स्वास्थ्य और इलाज के विकल्पों पर भी प्रतिकूल असर डाला है।

