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प्रयागराज में अनंत चतुर्दशी पर उमड़ा आस्था का सैलाब, संगम पर श्रद्धालुओं ने लगाई आस्था की डुबकी

प्रयागराज में अनंत चतुर्दशी पर उमड़ा आस्था का सैलाब, संगम पर श्रद्धालुओं ने लगाई आस्था की डुबकी
प्रयागराज में अनंत चतुर्दशी पर उमड़ा आस्था का सैलाब, संगम पर श्रद्धालुओं ने लगाई आस्था की डुबकी

प्रयागराज, 25 सितंबर (आईएएनएस)। भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को मनाए जाने वाले पावन पर्व अनंत चतुर्दशी के अवसर पर प्रयागराज के त्रिवेणी संगम पर आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। इस पावन मौके पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के मिलन स्थल पर पवित्र डुबकी लगाने और पूजा-अर्चना करने के लिए पहुंचे।

मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की पूजा करने से भक्तों को अनंत पुण्य की प्राप्ति होती है। पूजा-विधि के बाद श्रद्धालु अपनी कलाई पर 14 गांठों वाला पवित्र 'अनंत सूत्र' बांधते हैं, जो अनंत काल तक भगवान की रक्षा और आशीर्वाद का प्रतीक माना जाता है।

संगम घाट पर मौजूद गोपाल गुरु ने आईएएनएस से बातचीत में इस पर्व के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया, "आज अनंत चतुर्दशी है, यह भगवान श्री विष्णु का प्रमुख पर्व है। इस दिन प्रातः काल स्नान और ध्यान करने के बाद रेशम की डोरी में चौदह गांठ लगाकर उसमें भगवान विष्णु का आह्वान कर पूजा की जाती है।"

उन्होंने कहा कि इस व्रत को करने से भगवान विष्णु और माता महालक्ष्मी अत्यंत प्रसन्न होती हैं। इससे घर में सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है और जो भी व्यक्ति नियम और श्रद्धा के साथ यह व्रत करता है, उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

प्रयागराज के महत्व का उल्लेख करते हुए गोपाल गुरु ने कहा, "प्रयागराज तीर्थों का राजा है। यहां आकर इस प्रकार का धार्मिक अनुष्ठान करने से अनंत गुना पुण्य की प्राप्ति होती है और स्वर्ग में भी स्थान प्राप्त होता है। अनंत चतुर्दशी का व्रत करने से मनुष्य को हर प्रकार के कष्टों से मुक्ति मिलती है। इसमें निर्गुण और सगुण दोनों प्रकार के आनंद की अनुभूति होती है।"

अनंत चतुर्दशी के अवसर पर संगम तट पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखी गई। लोग गंगा के पवित्र जल में स्नान कर पूजा-पाठ करते नजर आए। वहीं, घाट पर सुरक्षा के भी पुख्ता इंतजाम किए गए थे।

--आईएएनएस

पीआईएम/पीएम

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