लोकसभा के ज़ीरो आवर के दौरान उदयपुर से भाजपा सांसद डॉ. मन्नालाल रावत ने राजस्थान के प्रतापगढ़ जिले में जिला खनिज फाउंडेशन (DMF) के तहत स्वीकृत विकास कार्यों को रोके जाने का मुद्दा जोर-शोर से उठाया। इस दौरान उन्होंने जिले की कलेक्टर डॉ. अंजलि राजोरिया की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की।
सांसद ने सदन में कहा कि प्रतापगढ़ में DMF की बैठक में कुल 54 विकास कार्यों को मंजूरी दी गई थी। इनमें शिक्षा, पेयजल और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट शामिल थे, जो सीधे तौर पर आम जनता के हित से जुड़े हुए हैं।
उन्होंने आगे कहा कि इन सभी कार्यों को राज्य सरकार से वित्तीय स्वीकृति भी मिल चुकी थी, बावजूद इसके जिला प्रशासन की ओर से इन योजनाओं को आगे नहीं बढ़ाया गया। सांसद के अनुसार, कलेक्टर ने अपनी व्यक्तिगत मर्जी से केवल 3 कार्यों को ही आगे बढ़ाया, जबकि शेष 51 विकास कार्यों को रोक दिया गया।
इस मुद्दे को उठाते हुए सांसद ने इसे जनहित से जुड़ा गंभीर मामला बताया और कहा कि विकास कार्यों में इस तरह की बाधा से क्षेत्र के लोगों को बुनियादी सुविधाओं से वंचित रहना पड़ रहा है।
सदन में दिए गए इस बयान के बाद मामला राजनीतिक रूप से भी तूल पकड़ने लगा है और अब इस पर प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर प्रतिक्रिया आने की संभावना जताई जा रही है।
सांसद ने मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और जो भी जिम्मेदार अधिकारी हों, उनके खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में इस तरह की स्थिति दोबारा न बने।
फिलहाल, इस मामले को लेकर प्रतापगढ़ जिला प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन मुद्दे के उठने के बाद इसे गंभीरता से देखा जा रहा है।

