प्रताप सिंह बाजवा की पंजाब सरकार को दी चेतावनी, 48 घंटे में जारी करें कर्मचारियों का वेतन
चंडीगढ़, 4 मई (आईएएनएस)। पंजाब विधानसभा में विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा ने मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान पर उनकी बात न मानने का आरोप लगाया है। प्रताप सिंह बाजवा ने एक्स पर लिखा, मुख्यमंत्री भगवंत मान, आपने विधानसभा में मुझसे सलाह मांगी थी और मैंने सद्भावनापूर्वक सलाह दी थी। आपने उसे अनसुना कर दिया और कर्मचारियों के महंगाई भत्ते (डीए) पर उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती दी।"
बाजवा ने चेतावनी भरे अंदाज में मुख्यमंत्री भगवंत मान से कर्मचारियों का वेतन जारी करने की मांग की है। उन्होंने लिखा, "अब एक और बात। पंजाब सरकार के कर्मचारियों को अभी तक अप्रैल का वेतन नहीं मिला है। आपकी सरकार के लिए यह उचित होगा कि वह अगले 48 घंटों के भीतर उन्हें वेतन जारी कर दें। आपके वित्त मंत्री का दावा है कि जीएसटी संग्रह और राजस्व रिकॉर्ड ऊंचाई पर हैं, तो फिर वे लोग जो इस सरकार को चलाते हैं, अभी तक अपने हक के वेतन का इंतजार क्यों कर रहे हैं?"
इसके पहले आम आदमी पार्टी (आप) के कई सांसदों के भाजपा में शामिल होने पर प्रताप सिंह बाजवा ने कहा था कि राज्यसभा में आप के भीतर चल रही फूट ने पार्टी का असली चेहरा बेनकाब कर दिया है। बाजवा ने कहा कि इन घटनाक्रमों ने उन पुरानी चिंताओं की पुष्टि कर दी है कि पंजाब में आप की राजनीति शासन-प्रशासन से कम, बल्कि राज्य के खजाने तक पहुंचने की आंतरिक होड़ से ज्यादा प्रेरित रही है।
कांग्रेस विधायक बाजवा ने कहा कि राघव चड्ढा ने दावा किया है कि वह पार्टी के भीतर चल रही गलत हरकतों में भागीदार नहीं बने रह सकते थे, जबकि मुख्यमंत्री भगवंत मान ने आरोप लगाया है कि चड्ढा और अन्य लोग इसलिए पार्टी छोड़कर चले गए, क्योंकि उन्हें भ्रष्टाचार करने की छूट नहीं दी गई।
बाजवा ने कहा कि जब दोनों ही पक्ष एक-दूसरे पर भ्रष्टाचार के आरोप लगा रहे हों, तो सच्चाई अपने आप ही सामने आ जाती है। यह लड़ाई कभी भी विचारधारा को लेकर नहीं थी। यह हमेशा से ही पैसे और पंजाब के सरकारी खजाने की सुनियोजित लूट को लेकर रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी ने भी इस पूरे घटनाक्रम में अपनी भूमिका निभाई है, जिसे उन्होंने 'जनता के जनादेश की सौदेबाजी' करार दिया। बाजवा ने कहा कि केंद्रीय जांच एजेंसियों का इस्तेमाल कथित तौर पर अवैध रूप से जमा की गई संपत्ति का पता लगाने के लिए किया गया था, लेकिन न्याय सुनिश्चित करने के बजाय ऐसा प्रतीत होता है कि इस जानकारी का इस्तेमाल लोगों पर दबाव बनाने और उन्हें राजनीतिक रूप से अपने पाले में लाने के लिए किया गया।
--आईएएनएस
ओपी/वीसी

