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प्राकृतिक सौंदर्य और आध्यात्मिकता का मेल, बागेश्वर का धौलीनाग देवता मंदिर

उत्तराखंड, 7 अप्रैल (आईएएनएस)। उत्तराखंड के वादियों में कई प्राचीन मंदिर और धार्मिक स्थल हैं। इन्हीं में से एक है धौलीनाग देवता मंदिर, जो विजयपुर क्षेत्र की हरी-भरी पहाड़ियों पर स्थित है। यह मंदिर श्रद्धालुओं की गहरी आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।
प्राकृतिक सौंदर्य और आध्यात्मिकता का मेल, बागेश्वर का धौलीनाग देवता मंदिर

उत्तराखंड, 7 अप्रैल (आईएएनएस)। उत्तराखंड के वादियों में कई प्राचीन मंदिर और धार्मिक स्थल हैं। इन्हीं में से एक है धौलीनाग देवता मंदिर, जो विजयपुर क्षेत्र की हरी-भरी पहाड़ियों पर स्थित है। यह मंदिर श्रद्धालुओं की गहरी आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।

कांडा ब्लॉक में स्थित यह मंदिर कालिया नाग के पुत्र धौलीनाग को समर्पित है। मंदिर की भव्यता को देखने के लिए दूर-दूर से लोग यहां पर आते रहते हैं।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंदिर की भव्यता पर कुछ विचार साझा किए हैं। उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मंदिर का विशेष वीडियो पोस्ट किया। इसके साथ उन्होंने लिखा, "बागेश्वर जनपद के विजयपुर क्षेत्र में स्थित धौलीनाग देवता मंदिर श्रद्धा और आस्था का प्रमुख केंद्र है। ऋषि पंचमी, नाग पंचमी और नवरात्रि की पंचमी के अवसर पर यहां विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन होता है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु सम्मिलित होते हैं। बागेश्वर आगमन पर आप भी इस पावन मंदिर के दर्शन अवश्य करें।"

यह मंदिर बागेश्वर से कांडा जाने वाले मार्ग पर विजयपुर क्षेत्र में स्थित है, जो हिमालय के सुंदर दृश्यों से घिरा हुआ है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, द्वापर युग में श्रीकृष्ण द्वारा कालिया नाग के मर्दन के बाद धवलनाग (धौलीनाग) ने यहां बांज के पेड़ पर निवास किया था। हर साल अश्विन शुक्ल पंचमी (नवरात्रि) और नाग पंचमी के अवसर पर यहां विशेष पूजा और मेला आयोजित होता है। धपोलासेरा से भूल और धपोला के लोग कई किलोमीटर की पैदल यात्रा कर 22 हाथ लंबी मशाल (मशाल यात्रा) मंदिर तक लाते हैं। यह 500 वर्षों से अधिक पुरानी परंपरा है।

स्थानीय लोग इसे बांज के पेड़ पर बना एक प्राचीन स्थल मानते हैं, जहां आज एक सुंदर और भव्य मंदिर बना हुआ है। यह जगह अपने शांत माहौल, प्राकृतिक सुंदरता और त्रिशूल व नंदा देवी जैसी बर्फ से ढकी पहाड़ियों के खूबसूरत नज़ारों के लिए जानी जाती है।

प्रकृति से प्यार करने वालों के लिए यह एक बेहतरीन जगह है। यहां घूमने का सबसे अच्छा समय मार्च से जून और सितंबर से दिसंबर तक होता है, जब मौसम बहुत सुहावना रहता है।

--आईएएनएस

एनएस/पीएम

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