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पीपीएससी मेन्स के रिजल्ट पर पंजाब में बवाल, रवनीत बिट्टू, ढिल्लों और सुनील जाखड़ ने धांधली का आरोप, सीबीआई जांच की मांग

पीपीएससी मेन्स के रिजल्ट पर पंजाब में बवाल, रवनीत बिट्टू, ढिल्लों और सुनील जाखड़ ने धांधली का आरोप, सीबीआई जांच की मांग
पीपीएससी मेन्स के रिजल्ट पर पंजाब में बवाल, रवनीत बिट्टू, ढिल्लों और सुनील जाखड़ ने धांधली का आरोप, सीबीआई जांच की मांग

चंडीगढ़, 5 नवंबर (आईएएनएस)। पंजाब पब्लिक सर्विस कमीशन (पीपीएससी) मेन्स परीक्षा के नतीजों को लेकर पंजाब में सियासी बवाल खड़ा हो गया है। केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों और भाजपा नेता सुनील जाखड़ ने भगवंत मान सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं और पूरे मामले की सीबीआई जांच की मांग की है।

तीनों नेताओं ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि एक ही कमरे से बड़ी संख्या में उम्मीदवारों का चयन होना महज संयोग नहीं हो सकता। यह मेहनती युवाओं के साथ धोखा है।

रवनीत सिंह बिट्टू ने 'एक्स' पर पोस्ट करते हुए लिखा कि भगवंत मान सरकार के बिना सिफारिश और बिना रिश्वत नौकरियां देने के दावों के उलट, पीपीएससी मेन्स नतीजों के सामने आए आंकड़े सीधे सवाल खड़े करते हैं। उन्होंने बताया कि सेंटर-7 के कमरा नंबर 8 से 24 में से 11 उम्मीदवार (45.8 प्रतिशत) शॉर्टलिस्ट हुए हैं। वहीं सेंटर-11 और सेंटर-4 के कमरों से 10-10 उम्मीदवार (41.7 प्रतिशत) शॉर्टलिस्ट हुए हैं।

रवनीत बिट्टू ने कहा कि सिविल सेवा जैसी प्रतिस्पर्धी परीक्षा में एक ही कमरे से इतनी बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों का पास होना महज एक संयोग नहीं हो सकता।

उन्होंने आगे कहा कि जहां सेंटर-8 में कुल शॉर्टलिस्टिंग दर 24.21 प्रतिशत रही, वहीं सेंटर-1 के कमरा नंबर 1 से 7 तक यह दर महज 2.89 प्रतिशत दर्ज की गई। एक ही परीक्षा में केंद्रों के बीच इतना बड़ा अंतर पूरी व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवालिया निशान लगाता है।

रवनीत सिंह बिट्टू ने कहा कि मंचों से मेरिट और पारदर्शिता के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, लेकिन जब विशेष कमरों और खास सीरियल नंबरों से ही चयन निकलते हैं, तो यह मेहनती युवाओं के परिश्रम के साथ सीधा धोखा प्रतीत होता है।

उन्होंने मांग की कि यदि सरकार वास्तव में ईमानदार है, तो साक्षात्कार प्रक्रिया तुरंत रोकी जाए, कॉपियों को सील किया जाए और पूरे मामले की किसी स्वतंत्र एजेंसी या सीबीआई से जांच कराई जाए।

पंजाब भाजपा प्रदेश अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने 'एक्स' पर पोस्ट करके पीसीएस मेन्स के नतीजों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि उम्मीदवारों के आरोपों ने मान सरकार के 'ईमानदार शासन' के खोखले दावों को उजागर कर दिया है। चार सेंटरों में एक ही कमरे से 10-11 उम्मीदवार शॉर्टलिस्ट हुए86 उम्मीदवार लगातार रोल नंबरों में चुने गएनतीजे में अनुपस्थित उम्मीदवारों के रोल नंबर भी आएआंसर शीट का मूल्यांकन विषय के जानकारों ने नहीं, बल्कि यूनिवर्सिटी के छात्रों ने किया, ऐसा आरोप हैढिल्लों ने कहा कि केजरीवाल की सरकार ने पंजाब को लूट का अड्डा बना दिया है, और अब तो राज्य की सबसे बड़ी नौकरियां भी नीलाम हो रही हैं।

नायब तहसीलदार भर्ती के बाद अब एक और भर्ती घोटाला 'आप' सरकार को घेर रहा है। उन्होंने मांग की है कि इंटरव्यू तुरंत रोके जाएं। किसी बैठे हुए हाईकोर्ट जज की निगरानी में जांच हो, नहीं तो सीबीआई जांच हो, सीसीटीवी फुटेज, सीटिंग प्लान, हाजिरी रजिस्टर और आंसर शीट की फोरेंसिक जांच होदोषी पाए जाने वालों पर भ्रष्टाचार रोकथाम कानून के तहत एफआईआर हो। उन्होंने कहा कि मेहनती युवाओं के हक की लूट बर्दाश्त नहीं की जाएगी। भाजपा पंजाब के युवाओं के लिए सड़क से लेकर कोर्ट तक लड़ाई लड़ेगी।

भाजपा नेता सुनील जाखड़ ने भी 'एक्स' पर पोस्ट करके इस मामले को नीट पेपर लीक जैसा बताया। उन्होंने सवाल किया, "पीसीएस परीक्षा और नीट पेपर लीक मामले में क्या अंतर है?"

सुनील जाखड़ ने कहा कि पहले नायब तहसीलदार भर्ती परीक्षा का पेपर लीक हुआ, फिर बाबा फरीद मेडिकल यूनिवर्सिटी में पैरामेडिकल स्टाफ भर्ती परीक्षा का पेपर लीक हुआ, और अब पीपीएससी मेन्स परीक्षा में धांधली के जरिए पीसीएस प्रीलिम्स परीक्षा को हाईजैक कर लिया गया। यह नीट पेपर लीक मामले से कितना अलग है, इसका फैसला पंजाब का युवा खुद करेगा।

उन्होंने कहा कि पीपीएससी मेन्स परीक्षा के घोषित नतीजों ने भगवंत मान सरकार के बिना पैसे, बिना सिफारिश नौकरियां देने के खोखले दावों को उजागर कर दिया है।

सुनील जाखड़ ने बताया कि प्रत्येक व्यक्तिगत परीक्षा कक्ष से 10 से 11 उम्मीदवारों का चयन हुआ, जबकि रोल नंबरों के क्रम में कुल 86 उम्मीदवारों को भी 3 या 4 लगातार उम्मीदवारों के समूह में चुना गया। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या यह पूरी व्यवस्था रोल नंबर जारी करते समय ही कर दी गई थी? क्या कुछ खास उम्मीदवारों को पूर्व नियोजित साजिश के तहत जानबूझकर लगातार रोल नंबर आवंटित किए गए थे?

सुनील जाखड़ ने कहा कि पीसीएस जैसी प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षा में यह कैसे संभव है कि किसी खास परीक्षा केंद्र या कुछ चुने हुए कमरों से लगभग एक-चौथाई उम्मीदवारों का चयन हो जाए, जब तक कि इसके लिए कोई विशेष तरीका नहीं अपनाया गया हो। उन्होंने कहा कि इससे पहले भी भगवंत मान सरकार को भर्ती परीक्षाओं में ऐसी अनियमितताओं के लगातार आरोपों का सामना करना पड़ा है।

सुनील जाखड़ ने कहा कि यह पंजाब के युवाओं के सपनों, उम्मीदों और भविष्य का सवाल है। पूरे मामले की केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराना बेहद जरूरी है, ताकि सच सामने आ सके और सभी तथ्य लोगों के सामने लाए जा सकें।

--आईएएनएस

वीकेयू/पीएम

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