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'पोषण ही सबसे बड़ा टीका है', डॉ. सौम्या स्वामीनाथन ने लोगों से की अपील

'पोषण ही सबसे बड़ा टीका है', डॉ. सौम्या स्वामीनाथन ने लोगों से की अपील
'पोषण ही सबसे बड़ा टीका है', डॉ. सौम्या स्वामीनाथन ने लोगों से की अपील

चेन्नई, 27 जून (आईएएनएस)। वैश्विक स्तर पर प्रसिद्ध जनस्वास्थ्य विशेषज्ञ और एम.एस. स्वामीनाथन रिसर्च फाउंडेशन (एमएसएसआरएफ) की अध्यक्ष डॉ. सौम्या स्वामीनाथन ने कहा कि "पोषण ही सबसे बड़ा टीका (वैक्सीन) है।" उन्होंने कहा कि बेहतर पोषण न केवल बीमारियों से लड़ने की क्षमता बढ़ाता है, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य को मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

शनिवार को 'सुपर चेन्नई' की 'अरट्टई' श्रृंखला के दौरान आयोजित कार्यक्रम में डॉ. स्वामीनाथन ने अपने शोध और वैश्विक स्वास्थ्य नीति निर्माण के अनुभव साझा किए। विज्ञान, स्वास्थ्य सेवा और साक्ष्य-आधारित नीतियों में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए 'सुपर चेन्नई' ने उन्हें 'आइकन ऑफ द मंथ' सम्मान से नवाजा।

अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि चेन्नई ने उनके करियर को दिशा देने में अहम भूमिका निभाई। राष्ट्रीय क्षय रोग अनुसंधान संस्थान (पूर्व में ट्यूबरकुलोसिस रिसर्च सेंटर) में एक युवा शोधकर्ता के रूप में शुरू हुआ उनका सफर विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की मुख्य वैज्ञानिक और अब एमएसएसआरएफ की अध्यक्ष बनने तक पहुंचा।

उन्होंने कहा कि भारत में तपेदिक (टीबी) के खिलाफ किए गए शोध ने साबित किया है कि पौष्टिक भोजन मरीजों के स्वास्थ्य में उल्लेखनीय सुधार ला सकता है। आदिवासी समुदायों में किए गए एक अध्ययन का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि टीबी मरीजों और उनके परिवारों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने से मरीजों के स्वस्थ होने की गति बढ़ी और परिवारों में टीबी संक्रमण लगभग 50 प्रतिशत तक कम हुआ। इस अध्ययन के निष्कर्षों को बाद में डब्ल्यूएचओ की वैश्विक पोषण और टीबी संबंधी सिफारिशों में भी शामिल किया गया।

डॉ. स्वामीनाथन ने कहा कि चिकित्सा केवल दवाओं तक सीमित नहीं होनी चाहिए। गरीबी, कुपोषण, खाद्य असुरक्षा, सामाजिक कलंक और खराब जीवन स्थितियां भी लोगों के स्वास्थ्य को गहराई से प्रभावित करती हैं। उन्होंने कहा कि समुदायों के बीच जाकर उनकी समस्याओं को समझना ही प्रभावी सार्वजनिक स्वास्थ्य नीति की आधारशिला है।

उन्होंने कहा, "मैंने विज्ञान और जनस्वास्थ्य के बारे में जो कुछ सीखा, वह समुदायों की बात सुनकर सीखा। चेन्नई ने मुझे यह सिखाया कि सार्थक शोध प्रयोगशालाओं से नहीं, बल्कि लोगों के बीच से शुरू होता है।"

भविष्य की स्वास्थ्य व्यवस्था पर चर्चा करते हुए उन्होंने प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं में अधिक निवेश की आवश्यकता बताई। उनका कहना था कि बेहतर गुणवत्ता वाले स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र लोगों के इलाज पर होने वाले निजी खर्च को कम कर सकते हैं और निवारक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बना सकते हैं।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) पर उन्होंने कहा कि इसका उपयोग साक्ष्य-आधारित और जिम्मेदारी से किया जाना चाहिए। तकनीक का उद्देश्य केवल आधुनिकता नहीं, बल्कि लोगों के स्वास्थ्य परिणामों में सुधार होना चाहिए।

जलवायु परिवर्तन और शहरी विकास पर उन्होंने नागरिकों से 'सिटिजन साइंटिस्ट' बनने का आह्वान किया। उन्होंने जल गुणवत्ता की निगरानी, वायु प्रदूषण पर नजर रखने और कचरा प्रबंधन जैसे अभियानों में आम लोगों की सक्रिय भागीदारी पर जोर देते हुए कहा कि स्वस्थ शहर तभी बनेंगे, जब स्वच्छ पर्यावरण, बेहतर सार्वजनिक स्थान और सामुदायिक सहयोग को प्राथमिकता दी जाएगी।

'सुपर चेन्नई' के प्रबंध निदेशक रंजीत राठौड़ ने कहा कि डॉ. सौम्या स्वामीनाथन का सफर इस बात का प्रमाण है कि चेन्नई ऐसे नेतृत्वकर्ताओं को तैयार करता है, जो वैश्विक स्तर पर समाज और मानवता के लिए महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।

कार्यक्रम के अंत में छात्रों, शोधकर्ताओं, स्वास्थ्य विशेषज्ञों और नागरिकों ने डॉ. स्वामीनाथन के साथ जनस्वास्थ्य, पोषण, जलवायु परिवर्तन और समावेशी विकास जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा की।

--आईएएनएस

डीएससी

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