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पूरी टीम जब एकजुट होकर खेलती है, तब उसे हराना बेहद मुश्किल: लुइस डे ला फुएंते

पूरी टीम जब एकजुट होकर खेलती है, तब उसे हराना बेहद मुश्किल: लुइस डे ला फुएंते
पूरी टीम जब एकजुट होकर खेलती है, तब उसे हराना बेहद मुश्किल: लुइस डे ला फुएंते

आर्लिंग्टन, 15 जुलाई (आईएएनएस)। स्पेन ने फ्रांस को 2-0 से हराते हुए फीफा वर्ल्ड कप 2026 के फाइनल में जगह बना ली है। स्पेन की शानदार जीत के बाद हेड कोच लुइस डे ला फुएंते ने कहा कि टीम सही समय पर अपनी सर्वश्रेष्ठ फॉर्म हासिल करने में सफल रही है। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों की मेहनत, अनुशासन और एकजुटता का ही नतीजा है कि स्पेन 16 साल बाद फिर से विश्व कप के फाइनल में पहुंचा है।

कोच के अनुसार, अब टीम का अगला और सबसे बड़ा लक्ष्य ट्रॉफी जीतना है। डलास स्टेडियम में खेले गए इस मुकाबले में स्पेन ने शुरुआत से ही शानदार प्रदर्शन किया। टीम को 22वें मिनट में मिकेल ओयारजाबाल ने पेनल्टी पर गोल करते हुए मुकाबले में 1-0 की बढ़त दिलाई। इसके बाद दूसरे हाफ में पेड्रो पोरो ने दूसरा गोल कर स्पेन की जीत लगभग तय कर दी। फ्रांस की मजबूत टीम पूरे मैच में वापसी नहीं कर सकी और स्पेन ने 2-0 से मुकाबला जीतकर फाइनल में जगह बनाई।

मैच के बाद डे ला फुएंते ने कहा कि उनकी टीम पिछले चार वर्षों से एक तय योजना के साथ आगे बढ़ रही है और उसी का परिणाम अब सामने आ रहा है। उन्होंने कहा, "हमने लगभग चार साल पहले एक सोच के साथ काम शुरू किया था और पूरे समय उसी पर भरोसा बनाए रखा। आज हम दुनिया की सबसे मजबूत टीमों में से एक, फ्रांस, के खिलाफ खेले, लेकिन उनके सामने दुनिया की सबसे बेहतरीन टीम थी। हमारे खिलाड़ियों ने हर दिन अपनी मेहनत, समर्पण, एकजुटता और प्रतिभा का परिचय दिया है।"

स्पेन के कोच ने खिलाड़ियों की जमकर तारीफ करते हुए कहा कि उनकी टीम मुश्किल परिस्थितियों को भी आसान बना देती है। उन्होंने बताया कि टीम का माहौल बहुत सकारात्मक है और पूरे देश का समर्थन खिलाड़ियों का हौसला बढ़ा रहा है। उन्होंने कहा, "हमने 2010 वाले विश्व कप जैसा उत्साह और विश्वास फिर से हासिल कर लिया है। हमारी टीम का जज्बा इस बात से समझा जा सकता है कि जो खिलाड़ी सेमीफाइनल में नहीं खेले, वे भी मैच खत्म होने के बाद अभ्यास करने के लिए मैदान पर रुके रहे। यही हमारी सबसे बड़ी ताकत है।"

डे ला फुएंते ने यह भी बताया कि स्पेन के राजा फेलिप षष्ठम ने जीत के बाद ड्रेसिंग रूम में फोन कर पूरी टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा, "यह हमारे लिए बहुत गर्व की बात है कि हमारे राजा ने हमें फोन किया और हमारा हौसला बढ़ाया। आज पूरे देश में लोग हमारी जीत का जश्न मना रहे हैं। हमारी जिम्मेदारी है कि हम उन्हें खुशी दें। मुझे इस पीढ़ी के खिलाड़ियों पर गर्व है क्योंकि वे सिर्फ अच्छे फुटबॉलर ही नहीं, बल्कि अपने व्यवहार और मूल्यों से भी लोगों के लिए मिसाल हैं।"

65 वर्षीय कोच ने कहा कि उनकी टीम पूरे टूर्नामेंट में लगातार बेहतर होती गई है। उन्होंने बताया कि शुरुआत से ही योजना यही थी कि टीम बड़े मुकाबलों तक पहुंचते-पहुंचते अपनी सर्वश्रेष्ठ लय हासिल कर ले। उन्होंने कहा, "हम हर मैच के साथ बेहतर होते गए हैं। हमारा लक्ष्य था कि सबसे महत्वपूर्ण मुकाबलों के समय हम अपने सर्वश्रेष्ठ फॉर्म में हों और मुझे लगता है कि हमने यह हासिल कर लिया है। लंबे और कठिन सीजन के बाद हमारी टीम सही समय पर पूरी तरह तैयार है।"

फ्रांस के स्टार खिलाड़ी किलियन एम्बाप्पे को पूरे मैच में ज्यादा असर नहीं छोड़ने देने पर डे ला फुएंते ने कहा कि यह पूरी टीम की मेहनत का नतीजा था। उन्होंने कहा, "फ्रांस दुनिया की सबसे मजबूत टीमों में से एक है, लेकिन हमने अनुशासन और टीमवर्क के दम पर उनके शॉट्स को रोका। जब पूरी टीम एकजुट होकर खेलती है, तब उसे हराना बेहद मुश्किल हो जाता है।"

कोच ने मिडफील्डर रोड्री को टीम की रीढ़ की हड्डी बताया, जबकि दानी ओल्मो को उनकी पोजीशन का शानदार खिलाड़ी कहा। हालांकि, उन्होंने साफ किया कि स्पेन की सबसे बड़ी ताकत किसी एक खिलाड़ी का प्रदर्शन नहीं, बल्कि पूरी टीम का सामूहिक प्रयास है। उन्होंने कहा, "हमारी टीम में हर खिलाड़ी समूह के हित को सबसे पहले रखता है। यही हमारी सफलता की सबसे बड़ी वजह है।"

हालांकि फाइनल में पहुंचने की खुशी के बावजूद डे ला फुएंते ने कहा कि टीम का काम अभी पूरा नहीं हुआ है। उन्होंने कहा, "हमने एक बड़ा कदम जरूर उठाया है, लेकिन सबसे कठिन चुनौती अभी बाकी है। हमारा सपना विश्व कप जीतना और ट्रॉफी अपने नाम करना है।" खिताबी मुकाबले में स्पेन की भिड़ंत अर्जेंटीना और इंग्लैंड के बीच होने वाले दूसरे सेमीफाइनल के विजेता से होगी।

--आईएएनएस

एसएम/एएस

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