पॉक्सो कोर्ट ने आरोपी को दे दी थी जमानत, मां की याचिका पर हाईकोर्ट ने पलटा फैसला: सौरभ भारद्वाज
नई दिल्ली, 29 जून (आईएएनएस)। जनकपुरी स्थित एक निजी स्कूल में तीन वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म के चर्चित मामले में एक बड़ा कानूनी घटनाक्रम सामने आया है। दिल्ली हाईकोर्ट ने मामले के मुख्य आरोपी की जमानत रद्द कर दी है। इस फैसले के बाद आम आदमी पार्टी (आप) ने इसे पीड़िता और उसके परिवार के संघर्ष की जीत बताते हुए न्यायपालिका के निर्णय का स्वागत किया है।
पार्टी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने आरोप लगाया कि मामले को दबाने और आरोपी को बचाने की कोशिश की गई थी, लेकिन बच्ची की मां के लगातार कानूनी संघर्ष और जनदबाव के चलते आखिरकार न्याय मिला।
सौरभ ने कहा कि यह मामला केवल एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि न्याय व्यवस्था और पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने बताया कि पॉक्सो कोर्ट ने आरोपी को गिरफ्तारी के महज पांच दिन के भीतर जमानत दे दी थी, जिसे लेकर शुरुआत से ही सवाल उठ रहे थे। इसके बाद पीड़ित बच्ची की मां ने दिल्ली हाईकोर्ट में इस जमानत आदेश को चुनौती दी, जहां अदालत ने सभी तथ्यों पर विचार करने के बाद आरोपी की जमानत रद्द कर दी।
उन्होंने बताया कि इस मामले में 57 वर्षीय आरोपी, जो स्कूल में केयरटेकर और सीनियर क्लर्क के पद पर कार्यरत था, पर तीन वर्षीय बच्ची के साथ दुष्कर्म का आरोप है। हाईकोर्ट में पीड़िता की ओर से अधिवक्ता ऋषिकेश कुमार ने पैरवी की। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए निचली अदालत के जमानत आदेश को निरस्त कर दिया।
सौरभ भारद्वाज ने पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि जब आरोपी को पहली बार गिरफ्तार किया गया था, तब पुलिस ने उसकी रिमांड तक नहीं मांगी। उनके अनुसार, यह बेहद असामान्य स्थिति थी और इससे पुलिस की मंशा पर संदेह पैदा हुआ।
उन्होंने कहा कि उस समय के जनकपुरी थाना प्रभारी (एसएचओ) और संबंधित जिले के डीसीपी पर आरोपी की मदद करने के आरोप लगे थे। बाद में दोनों अधिकारियों का तबादला भी कर दिया गया था। उन्होंने यह भी कहा कि इस संवेदनशील मामले में कुछ लोगों द्वारा आरोपी के समर्थन में प्रदर्शन किया जाना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और शर्मनाक था। उनका कहना था कि ऐसे मामलों में समाज को पीड़ित परिवार के साथ खड़ा होना चाहिए, न कि आरोपी के समर्थन में।
आम आदमी पार्टी ने दावा किया कि उसने शुरुआत से इस मामले को प्रमुखता से उठाया और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग की। पार्टी का कहना है कि बच्ची की मां ने हिम्मत नहीं हारी और कानूनी लड़ाई जारी रखी, जिसके परिणामस्वरूप हाईकोर्ट ने जमानत रद्द कर दी। हालांकि, मामले की सुनवाई अभी जारी है और आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर अंतिम निर्णय ट्रायल पूरा होने के बाद ही अदालत द्वारा दिया जाएगा।
--आईएएनएस
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