पीएम तारिक रहमान के भारत दौरे की 50 फीसदी से ज्यादा संभावना, शेख हसीना मुद्दे पर बरतें संयम: जेएनयू प्रोफेसर
नई दिल्ली, 17 अगस्त (आईएएनएस)। जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी के इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज के प्रोफेसर डॉ. स्वर्ण सिंह ने कहा कि बांग्लादेश प्रधानमंत्री तारिक रहमान भारत दौरे के लिए अच्छा माहौल चाहते हैं। उन्होंने कहा कि पीएम रहमान के भारत आने और पीएम मोदी से सीधी बातचीत की 50 फीसदी से ज्यादा संभावना है। प्रोफेसर सिंह के मुताबिक, दोनों देशों के पास तालमेल सुधारने के अलावा कोई विकल्प नहीं है, लेकिन इसके लिए शेख हसीना के मुद्दे पर संयम बरतना जरूरी है।
प्रोफेसर डॉ. स्वर्ण सिंह ने भारत और बांग्लादेश के संबंधों को लेकर न्यूज एजेंसी आईएएएस से कहा, "जब भी चुनाव होकर नए राष्ट्राध्यक्ष चुने जाते हैं तो ऐसी अपेक्षा होती है कि वो पहली विदेश यात्रा भारत की करेंगे और ऐसा होता भी है, बांग्लादेश का इतिहास भी रहा है, लेकिन 2024 से जिस तरह से माहौल बदला और भारत ने वहां की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को भारत में रहने दिया, बांग्लादेश में नाराजगी देखने को मिली। जमात-ए-इस्लामी या नेशनल सिटीजन पार्टी ने इस मुद्दे को खूब उछाला। फिर सब एनसीपी की सरकार बनी और तारिक रहमान प्रधानमंत्री बने तो उम्मीद हुई कि अब शायद चुनी हुई सरकार आई है तो संबंध अच्छे हो सकते हैं।"
उन्होंने आगे कहा, "पीएम तारिक रहमान ने शुरू में कहा भी कि लोगों के हित को सामने रखकर सारे निर्णय लेंगे और विदेश नीति में लगातार संतुलन बनाकर आगे बढ़ेंगे, इसलिए उनके शपथ ग्रहण समारोह में भारत ने अपने प्रतिनिधि को भेजा और बाद में उच्चायुक्त भी वहां पहुंचे। उन्हें दो बार निमंत्रण भी जा चुका है, एक बार द्विपक्षीय वार्ता के लिए और दूसरी बार ब्रिक्स के शिखर सम्मेलन (बिम्सटेक के अध्यक्ष के रूप में) के लिए।"
दोनों देशों के बीच तनाव को लेकर प्रोफेसर सिंह ने कहा, "जो हल्की-फुल्की चीजों को लेकर मन मोटाव है। उनकी मांग है कि शेख हसीना का प्रत्यार्पण हो, जब तक ये प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, तब तक ये कोशिश की जाए कि वो भारत में रहकर कुछ ऐसा न करें कि बांग्लादेश की जनता में आक्रोश हो या अस्थिरता का माहौल हो। इस वक्त 50 फीसदी से ज्यादा उम्मीद की जा सकती है कि 20-21 तारीख को पीएम तारिक रहमान भारत आएंगे और पीएम मोदी से सीधी बातचीत होगी।"
हसीना के कार्यकाल में दोनों देशों के संबंध को लेकर उन्होंने कहा, "भारत और बांग्लादेश के पास अपनी तालमेल न सुधारने का कोई विकल्प नहीं है। विकास के लिए ये जरूरी है। बांग्लादेश की जो जमीनी सीमा है, वो 100 फीसदी भारत के साथ है। जब 15 साल तक शेख हसीना की सरकार वहां पर थी, तो उनके संबंध भारत के साथ बहुत अच्छे थे। पीएम मोदी के साथ उनके व्यक्तिगत संबंध बहुत अच्छे थे। वहीं एक समय था, जब हम बांग्लादेश को पूरे दक्षिण एशिया का विकास का मॉडल कहने लगे थे।"
उन्होंने कहा, "भारत से रिश्ते जब अच्छे होते हैं तो बांग्लादेश को विकास में फायदा मिलता है। हालांकि ये भी नहीं भुलाया जा सकता है कि इतिहास में बांग्लादेश की एनसीपी का रुझान चीन की तरफ ज्यादा रहा है। बहुत सी ऐसी चीजें हैं, जो वर्तमान पीएम को सीमाओं में बांध देती हैं। अगर वो भारत आते हैं तो दोनों देशों के संबंधों का एक नया अध्याय शुरू हो सकता है। तीस्ता नदी को लेकर अब तक दोनों देशों के बीच समझ नहीं बन पाई है, लेकिन गंगा नदी पर जो 1990 में 30 साल की संधि हुई थी, उसके 29 साल इस वर्ष पूरे हो रहे हैं। इसपर भी बातचीत शुरू होनी चाहिए।"
यूनुस के कार्यकाल में भारत-बांग्लादेश के बीच के माहौल को लेकर उन्होंने कहा, "कुछ चीजें हैं, जो एकतरह से अटकी हुई है। दो साल तक जब डॉ. मुहम्मद यूनुस वहां थे, वो अंतरिम सरकार में मुख्य सलाहकार की तौर पर नियुक्त हुए। उनका काम कानून व्यवस्था बनाकर चुनाव कराना था, लेकिन वो अपनी महत्वकांक्षा में चले गए और पाकिस्तान से रिश्ते दूसरी तरह से बनाना शुरू किया। बांग्लादेश के इतिहास को बदलना चाहा। चीन के साथ दोस्ती बढ़ाने लगे। उन दो सालों में जमीनी स्तर पर अपनी महत्वकांक्षा के चलते जिस तरह का माहौल बनाया गया, उसको सुधारने में थोड़ा सा समय लगेगा।"
डॉ सिंह ने कहा, "बीएनपी के अंदर भी कुछ लोग ऐसे होंगे, जो भारत को छोड़कर चीन या पाकिस्तान से ज्यादा जुड़ना चाहेंगे। पीएम तारिक रहमान ने अब तक तो ये कहा कि वो संतुलन बनाकर अपनी विदेश नीति को आगे बढ़ाएंगे। ये भी बार-बार कहा गया कि भारत से वो रिश्ते सुधारना चाहते हैं। हसीना ने अपनी हाल की बातचीत में ये स्पष्ट कर दिया कि वो दिसंबर तक वापस अपने देश चली जाएंगी। तो ये एक तरह से सकारात्मक संकेत है कि भारत भी परोक्ष रूप से कोशिश कर रहा है कि यदि ऐसे रास्ते खुलते हैं कि वो वापस जा सकती हैं, तो जाएं। उससे भी कुछ तालमेल बनाने में सहायता हो सकती है।"
--आईएएनएस
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