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पीएम मोदी शांति के पक्षधर, विपक्ष केवल गुमराह करने में जुटा: ओपी राजभर

लखनऊ, 3 मार्च (आईएएनएस)। कांग्रेस नेता सोनिया गांधी के ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह खामेनेई की मौत पर केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाने पर विवाद बढ़ गया है। उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री ओपी राजभर ने सोनिया गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि दोनों की सोच में बहुत अंतर है।
पीएम मोदी शांति के पक्षधर, विपक्ष केवल गुमराह करने में जुटा: ओपी राजभर

लखनऊ, 3 मार्च (आईएएनएस)। कांग्रेस नेता सोनिया गांधी के ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह खामेनेई की मौत पर केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाने पर विवाद बढ़ गया है। उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री ओपी राजभर ने सोनिया गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि दोनों की सोच में बहुत अंतर है।

उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री ओपी राजभर ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए कहा, "यह गलत है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दोनों देशों से बातचीत कर शांति के प्रयास किए हैं। सोनिया गांधी और प्रधानमंत्री की सोच में स्पष्ट अंतर है। प्रधानमंत्री हमेशा देश और विदेश दोनों स्तर पर संतुलित दृष्टिकोण अपनाते हैं।"

उन्होंने कहा कि विपक्ष कोई न कोई मुद्दा लेकर जनता को गुमराह करने का प्रयास करता रहता है, लेकिन उन्हें नहीं पता कि इससे कुछ होने वाला नहीं है। जनता सब जान रही है।

मंत्री ओपी राजभर ने यूएई, सऊदी अरब और बहरीन के नेताओं के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की टेलीफोन बातचीत को भी सराहा। उन्होंने कहा, "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बातचीत के माध्यम से मुद्दों को सही दिशा में ले जाने की कोशिश की है। यदि दो देश आपस में संघर्ष करते हैं, तो केवल वे दोनों ही नहीं, बल्कि अन्य देशों को भी इसका नुकसान होता है। प्रधानमंत्री हमेशा शांति और सहयोग के मार्ग पर ध्यान केंद्रित करते हैं।"

सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के साथ हुई बातचीत पर राजभर ने कहा, "प्रधानमंत्री चाहते हैं कि देश और विश्व में आपसी संघर्ष न हो। युद्ध से आम नागरिक और देश की संपत्ति दोनों प्रभावित होते हैं। विकास के रास्ते पर आगे बढ़ने के बजाय देश तबाही की ओर बढ़ता है। प्रधानमंत्री की प्राथमिकता हमेशा शांति को बनाए रखना और संघर्ष रोकना है।"

इसके अलावा, ओपी राजभर ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में जनता परेशान है, सरकार उनकी समस्याएं नहीं सुन रही है। आने वाले चुनाव में इसका परिणाम ममता सरकार को देखने को मिलेगा। बंगाल के लोग बदलाव और विकास चाहते हैं, जैसे उत्तर प्रदेश और बिहार में देखा जा रहा है। चुनाव आयोग एक स्वतंत्र एजेंसी है और मृतकों को मतदाता सूची से हटाने जैसी प्रक्रियाएं कानूनी तौर पर लागू की जा रही हैं।"

--आईएएनएस

एसएके/एएस

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